बीमा पॉलिसी पसंद करना और उसे खरीदना कोई आसान का नहीं होता। जो लोग बीमा करवाते हैं, उन्हें बखूबी पता है कि किनकिन हालात से गुजरना पड़ता है। कई मुद्दों पर विचार करने और कई प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही यह काम हो पाता है। उदाहरण के लिए सबसे पहले तो ग्राहक के सामने यह सवाल होता है कि किस कंपनी से बीमा करवाया जाए। 15-16 वर्ष पहले तक स्थिति दूसरी थी, तब बाजार में सिर्फ कुछ कंपनियां हुआ करती थीं। आज बाजार में बीस से ज्यादा कंपनियां हैं। इसके अलावा ग्राहकों को कई अन्य तथ्यों को भी ध्यान में रखना पड़ता है, मसलन पॉलिसी की शर्तें क्या हैं, अवधि क्या है, प्रीमियम क्या है, वगैरह। अधिकांश लोगों के लिए बीमा खरीदने से पहले उनसे जुड़े कागजात का अध्ययन करना आसान नहीं होता।

असल में किसी भी तरह का बीमा करवाने से पहले उनसे जुड़े कागजात का अध्ययन करना बेहद अहम होता है। इससे ही आपको पता चलेगा कि बीमा से जुड़ीं शर्तें क्या हैं और वह आपके मतलब की है या नहीं। कंपनी के साथ आपने जो समझौता किया है उसका पता इन कागजात से ही चलता है। कंपनी को आपको कितना प्रीमियम देना है, कब देना है, कवरेज कितने की है, वगैरह का पता इन कागजात से ही चलता है। इसलिए इन कागजात की देखभाल जरूरी है।

पॉलिसी के समझौते पर सावधानी

1. बीमा करवाने के लिए दिए जाने वाले सभी कागजात असली और सत्यापित होने चाहिए। सभी शर्तों को पढ़ लें और सुनिश्चित करें कि आप सभी का पालन कर रहे हैं। अब अधिकांश कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे जाने वाले कागजात को स्वीकार करने लगी हैं। भौतिक तौर पर जो कागजात भेज रहे हैं, वही इलेक्ट्रॉनिक रूप

से भी भेजें। दोनों में अंतर नहीं होना चाहिए।

2. हेल्थ बीमा देने वाली कंपनियां फ्री लुक अवधि देती हैं। मतलब यह हुआ कि बीमा खरीदने के फैसले के कुछ दिनों के भीतर आप पॉलिसी लेने से मना कर सकते हैं या उसे वापस कर सकते हैं। अगर आप बीमा

कंपनी की शर्तों के मुताबिक पॉलिसी एक निश्चित अवधि के भीतर वापस करते हैं तो आपसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। प्रीमियम की पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। इसका फायदा उठाने के लिए लिखित आवेदन भेजना पड़ता है। इसे कंपनियों की बेवसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। अगर पॉलिसी वापस करने का

फैसला करते हैं तो साथ में कुछ कागजात और सूचनाएं देनी पड़ती हैं। इसकी जानकारी भी वेबसाइट पर है। साथ ही एक रुपये का स्टांप पेपर भेजना होता है। ख्याल रखें कि इन दस्तावेज को भेजकर इन्हें भूल न जाएं, बल्कि इनकी कॉपी या असली कागजों को संभाल कर रखें। अब तो सॉफ्ट कॉपी को अपने पास संभाल कर रख सकते

हैं। बीमा पॉलिसियों की ई-कॉपी आप चाहें तो क्लाउड एप में भी संभाल कर रख सकते हैं। बेहतर होगा कि पॉलिसी की एक कॉपी किसी भरोसेमंद संबंधी के पास रखें। अगर रिश्तेदार आपसे दूर रहता तो ज्यादा अच्छा है ताकि बाढ़, आग वगैरह से आपके दस्तावेज नष्ट होते हैं तो उसकी कॉपी किसी दूसरे के पास सुरक्षित रहे। विकल्प के तौर पर अपने बैंक के लॉकर में भी रख सकते हैं। इन बातों को उन्हें जरूर ध्यान में रखना चाहिए

जहां प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं या जहां इनके आने की संभावना अधिक है।

हाल ही में चेन्नई में आई बाढ़ के बाद 2,500 करोड़ रुपये की बीमा राशि का भुगतान किया गया है। जिन लोगों ने कागजात संभाल कर नहीं रखे होंगे उन्हें यकीनन मुश्किलों का सामना करना पड़ा होगा।

पुनीत साहनी

हेड (प्रोडक्ट डेवलपमेंट)

एसबीआइ जनरल इंश्योरेंस

Posted By: Babita Kashyap

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