जीवन बीमा उद्योग के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में एक है उत्पाद का गुम होना। जीवन बीमा पॉलिसी दस्तावेज एक वैधानिक अनुबंध होता है। इसमें उत्पाद के बारे में सभी जानकारी एवं शर्तें होती हैं। इसमें पॉलिसीधारक की मृत्यु होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति का वादा किया गया होता है। यह महत्वपूर्ण है कि इन दस्तावेजों को बहुत सावधानी के साथ रखा जाए। इनकी देखभाल वैसे ही जरूरी है जैसे कि आप संपत्ति के कागजों या वित्तीय अथवा शैक्षिक दस्तावेजों को संभाल कर रखते हैं।

बीमा अवधि के दौरान इन दस्तावेजों की सुरक्षा आपके लिए काफी लाभकारी उस समय होती है जब आप दावे के दौरान सही पॉलिसी पेश करते हैं। इसकी आपको पॉलिसी की परिपक्वता पर दावा भुगतान पाने या कर्ज लेने की स्थिति में भी जरूरत पड़ती है। मैं पाठकों को सलाह दूंगा कि हम सभी को अपने सभी निवेश जीवन बीमा पॉलिसी के बारे में प्रियजनों से चर्चा करनी चाहिए। वह भी साल के किसी खास दिन। वह दिन आपके जन्मदिन से बेहतर क्या हो सकता है। जिस प्रकार आप जन्मदिन नहीं भूलते उसी प्रकार इस दिन इन दस्तावेजों पर चर्चा और देखभाल के विषय में बात की जा सकती है।

इसके कई कारण हैं। कई बार हम देखते हैं कि किसी प्रियजन के निधन के बाद लाभान्वित होने वाले को जीवन बीमा उत्पादों के बारे में जानकारी ही नहीं होती। इस प्रकार की संवेदनशील स्थितियों में लोग इन दस्तावेजों के लिए हड़बड़ा जाते हैं। इस समय जरूरत के अनुसार उन्हें वित्तीय सहायता में कंपनी के कानून की भूल भुलैया में विलंब हो जाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि आप पॉलिसी दस्तावेज मकान बदलने, प्राकृतिक आपदा या अपने

कर सलाहकार के पास भूल जाते हैं।

जीवन बीमा सहित सभी महत्वपूर्ण निवेश आपके प्रियजन के पास रहने चाहिए। आपसे लाभांवित होने वाले व्यक्ति को इस बात की जानकारी जरूर होनी चाहिए कि आपात स्थिति या दुर्भाग्यपूर्ण इत्यादि के क्षण में वह किससे संपर्क करे। इसके बावजूद ऐसे हालात में निम्न कदम उठाए जाने चाहिए।

1. फाइल केबिनेट में तलाश करें : यदि आप लाभांवित होने वालों में हैं और पता नहीं है कि दस्तावेज कहां पर हो सकते हैं, तो उपयुक्त होगा कि आप अपने केबिनेट में एक-एक फाइल को गहनता से देखें। ऐसा मौका भी हो सकता है कि बीमा दस्तावेज सुरक्षित रूप से अन्य महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेजों के बीच कहीं रखे हों, जैसे की मकान की लीज के कागजात, बैंक स्टेटमेंट, इनकम टैक्स रिटर्न इत्यादि। यदि वे नहीं हैं, तो किसी बैंक की सेफ्टी

डिपॉजिट बॉक्स या लॉकर में इन्हें तलाश करें, जिसका लाभ पॉलिसीधारक ने ले रखा हो।

2. बैंक स्टेटमेंट और इनकम टैक्स रिटर्न की समीक्षा करें : बैंक स्टेटमेंट का गहनता से अध्ययन करें। साथ ही विगत कुछ वर्षों के इनकम टैक्स रिटन्र्स का अवलोकन करें। यह भी आपके लिए उपयोगी हो सकता है। बैंक स्टेटमेंट देखने से शायद यह मौका मिल जाए कि पिछले कुछ वर्षों में आपके प्रियजन ने किसी बीमा प्रीमियम का भुगतान किया हो, या इनकम टैक्स रिटन्र्स में बीमा पॉलिसी से मिले ब्याज का विवरण मिल जाए। इससे आपको उस बीमा कंपनी को खोजने में मदद मिल सकेगी जिसकी सेवाएं पॉलिसीधारक ने प्राप्त की हैं।

3. बीमा रिपॉजिटरी के साथ जांच करें: ई-इंश्योरेंस के आगमन के बाद आपकी बीमा पॉलिसियों को सुरक्षित रखना और भी आसान हो गया है। ऐसे मौके भी आए हों जब पॉलिसीधारक ने किसी बीमा रिपॉजिटरी का उपयोग इन दस्तावेजों के भंडारण के लिए किया हो। बीमा पॉलिसियां प्राथमिक तौर पर भौतिक रूप से दी जाती हैं, लेकिन कोई इन्हें ई-इंश्योरेंस अकाउंट में भी तो स्टोर करवा सकता है।

4. पॉलिसीधारक के क्लोज नेटवर्क पर नजर रखें : एक बार पॉलिसीधारक के नियोजक से भी संपर्क किया जा सकता है। संभव है कि नियोजक के पास इन फाइलों के बारे में कुछ विवरण हों। यह आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं या बीमा खरीद के बारे में जानकारी दिला सकते हैं। पॉलिसीधारक की फोन बुक को भी भली-भांति जांचें और प्रयास करें कि इसमें किसी बीमा एजेंट या बैंक कर्मी के नंबर हों जिसने आपके प्रियजन को पॉलिसी

बेची हो। जब खोए हुए दस्तावेजों को ढूंढने के लिए उपरोक्त कदम उठाए जाएंगे, तो इनमें से कुछ मापदंड तो ऐसे होंगे ही जिसका पालन पॉलिसीधारक ने किया ही होगा।

इरडा द्वारा वर्ष 2014 में जारी अधिसूचना में उल्लेख है कि जीवन बीमा पॉलिसी की ऐसी भारी रकम है जिस पर बीमाधारकों ने दावा ही नहीं किया है। बीमा पॉलिसी से लाभांवित होने वाले का जागरूक नहीं होना इसका मुख्य कारण बताया गया है।

अमित कुमार राय

मुख्य वितरण अधिकारी

एगान लाइफ इंश्यारेंस

Posted By: Babita Kashyap

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