मकान खरीदना हम सबका सपना होता है लेकिन अगर उस मकान का उचित तरीके से बीमा न हो तो यह

दुस्वपन भी साबित हो सकता है। यह भलीभांति मालूम है कि प्राकृतिक या मानवीय आपदाएं आने का वक्त पता नहीं होता और इसीलिए इनकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से भविष्य में चेन्नई और कश्मीर जैसी बाढ़ और नेपाल की तरह भूकंप आने का खतरा बढ़ेगा। साइंटिफिक अमेरिकन में मार्च 2015 में प्रकाशित एक शोध के अनुसार आने वाले समय में नदियों में बाढ़ और विकराल होगी। सबसे बड़ी आपदा एशिया खासकर भारत, बांग्लादेश और चीन में आने की आशंका है।

तकरीबन हर साल भारी बारिश के चलते देश की वित्तीय राजधानी मुंबई बाढ़ जैसे हालात का सामना करती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी भारी बारिश के चलते जलभराव की समस्या होती है। नदियों के किनारे बसे शहरों में इस तरह की आपदा आने का खतरा अधिक है। उत्तराखंड से लेकर दक्षिणी राज्यों तक हर जगह बारिश तबाही मचाती है। प्राकृतिक आपदाओं के चलते लाखों लोग बेघर, बीमार और घायल हो जाते हैं और बहुत से लोगों की असमय मृत्यु हो जाती है। अधिकांश मामलों में इस नुकसान की भरपाई नहीं हो पाती क्योंकि पीडि़त व्यक्ति ने बीमा कवर नहीं लिया होता है। भारत में होम इंश्योरेंस इतना प्रचलित नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने होम इंश्योरेंस ले रखा है। होम इंश्योरेंस किसी भी व्यक्ति की महंगी से महंगी परिसपंत्ति का कवर उपलब्ध कराता है लेकिन इसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। बहुत कम लोग अपने घरों को होने वाले नुकसान का बीमा कराते हैं।

लोग इस बात को ध्यान में नहीं रखते कि ऐसी किसी घटना से न सिर्फ किसी व्यक्ति को भावनात्मक तौर पर चोट

पहुंचती है बल्कि उस पर आजीवन वित्तीय बोझ भी पड़ता है। इसलिए हमें ऐसी प्राकृतिक आपदाएं जो हमारे घर को नुकसान पहुंचा सकती हैं, के लिए बीमा कराने की जरूरत है। एक अच्छा होम इंश्योरेंस आपको वित्तीय सुरक्षा मुहैया कराता है। अगर आपके घर या उसमें मौजूद किसी सामान को कोई नुकसान हुआ है। घर में मौजूद फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, ज्वैलरी, बेशकीमती कलाकृतियां और चित्र सहित हर चीज बीमा कवर के दायरे में होती है।

कई प्रकार की बीमा पॉलिसी हैं जो आपके घर के लिए उपलब्ध हैं। इनमें एक बेसिक पॉलिसी है जो घर की लागत को कवर करती है। दूसरी पॉलिसी इससे भी व्यापक है जिसमें घर में रखे सामान का भी बीमा होता है। कुछ

ऐसी बीमा पॉलिसी भी हैं जो आपको अगर आप आपदा के बाद कुछ समय तक अपने घर में नहीं रह पाते हैं तो अलग रहने के लिए अतिरिक्त खर्च भी देती हैं। आप अगर थोड़े समय के लिए घर से दूर जाते हैं और चोरी हो

जाती है तो यह भी आपके होम इंश्योरेंस में कवर हो सकता है। इसके अलावा कई प्लान भी हैं जो व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकता है। जहां तक प्रीमियम का सवाल है तो यह बेसिक होम इंश्योरेंस पॉलिसी

के लिए चार हजार रुपये तक हो सकता है। इस प्रीमियम में मकान का 20 लाख रुपये तथा सामान का 7 लाख रुपये का बीमा होगा। सामान के बीमा की सीमा में 2 लाख रुपये तक की ज्वैलरी भी कवर होगी।

यह प्रीमियम एक साल के लिए है। हालांकि लंबी अवधि के लिए बीमा लेने पर छूट भी मिल सकती है।

इसलिए मेहनत से कमाई हुई चीजों की हिफाजत के लिए बीमा लेना बुद्धिमानी है। यह सुनियोजित योजना से संभव है।

किसी व्यक्ति का घर उजड़ जाए तो उसको भावनात्मक रूप से कितनी कठिनाई होती है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन जो लोग वित्तीय नुकसान से बचना चाहते हैं उनके लिए मौसम आधारित या प्राकृतिक आपदा के चलते होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए होम इंश्योरेंस पॉलिसी जरूरी है।

अमित भंडारी

प्रमुख, हेल्थ एंड एग्री इंश्योरेंस,

आइसीआइसीआइ लोम्बार्ड

Posted By: Babita Kashyap

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