नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अब मानसिक रोगी भी स्वास्थ्य बीमा का लाभ उठा पाएंगे। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 लागू होने के तीन महीने बाद भारतीय बीमा नियामक ने इसके लिए कंपनियों को आदेश जारी कर दिया है।

16 अगस्त को जारी नोटिस में कहा गया है कि, सभी बीमा कंपनियों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के प्रावधान को मानना होगा। मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा कानून-2017 के तहत मानसिक रोग से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को शारीरिक बीमारी से प्रभावित व्यक्ति के समान ही माना जाएगा। साथ ही आदेश में कहा गया है कि भारत की सभी बीमा कमनियां इसे तत्काल प्रभाव से लागू करें।

बता दें कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 का उद्देश्य मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार, मानसिक बीमारी से पीड़ित कम से कम 15 करोड़ भारतीयों को इलाज की दरकार थी। सर्वेक्षण में पाया गया कि बीमारी के इलाज में और यात्रा में पीड़ित परिवारों को 1000 से 1,500 रुपये खर्च करने पड़े। जबकि इसके अलावा अन्य खर्चे भी हुए जिसे सर्वेक्षण में नहीं जोड़ा गया है।

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते इन बातों का रखें ध्यान:

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना ही सब कुछ नहीं होता। किसी भी इंश्योरेंस पॉलिसी की खरीद से पहले जरूरी है कि उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल की जाए। सही पॉलिसी का चुनाव ही जरूरत के समय लाभदायक साबित होता है। किसी भी पॉलिसी को उसकी कीमत के आधार पर खरीदना सबसे बड़ी गलती होती है।

ऐसा जरूरी नहीं है कि सस्ती पॉलिसी ही सबसे अच्छी हो। कीमत के अलावा अन्य बेनिफिट्स भी ध्यान में रखने चाहिए। इनमें सबसे पहले यह जांचें कि कंपनी की ओर से पॉलिसी प्रीमियम पर क्या क्या फायदे दिये जा रहे हैं।

इस पर फाइनेंशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी का मानना है कि एक अच्छी हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले सबसे पहले इसकी कवरेज जान लें। साथ ही यह सुनिश्चित कर लें कि इसके दायरे में कौन-कौन सी बीमारियां और बेनिफिट्स नहीं आते हैं। इसके पैनल में जो भी अस्पताल हैं उनकी टॉप लिमिट क्या है, उसमें डॉक्टर के विजिट के चार्जेस, आईसीयू में भर्ती होने के घंटों पर कोई लिमिट तो नहीं है। यह भी जांच कर लें कि किन-किन स्थितियों में पॉलिसीधारक क्लेम का हकदार नहीं होता है।

Posted By: Surbhi Jain