नई दिल्ली। बीमा सिर्फ मकान, दुकान और इंसान का ही नहीं होता, बल्कि आपके घर की रसोई में रखे गैस सिलेंडर का भी बीमा होता हैं। यानी आप गैस सिलेंडर से हादसा होने पर बीमा क्लेम कर सकते हैं। साथ ही क्या आप जानते हैं कि गैस सिलेंडर की एक एक्सपायरी डेट भी होती है? जागरुकता की कमी के कारण अधिकांश लोग सिलेंडर बिना एक्सपायरी डेट जांचे खरीद लेते हैं।

आपको बता दें कि गैस सिलेंडर से हादसा होने पर उपभोक्ता को कंपनी की ओर से 50 लाख रुपए तक का बीमा मिलता है। बीमा के लिए चुकाया जाने वाला प्रीमियम आपकी ओर से भुगतान की जाने वाली राशि में सम्मिलित होता है। लेकिन जानकारी के अभाव में उपभोक्ता इसका लाभ नहीं उठा पाते।

रसोई में रखे सिलेंडर पर मिलता है 50 लाख का बीमा:

आरटीआई में हुए खुलासे के तहत गैस कनेक्शन लेते ही उपभोक्ता का 10 से 25 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा हो जाता है। इसके तहत गैस सिलेंडर से हादसा होने पर पीड़ित बीमा क्लेम कर सकता है। साथ ही, सामूहिक दुर्घटना होने पर 50 लाख रुपए तक देने का भी प्रावधान है। इसके लिए दुर्घटना होने के 24 घंटे के भीतर संबंधित एजेंसी और लोकल थाने को सूचना देनी होती है। साथ ही दुर्घटना में मृत्यु होने पर जरूरी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने होते हैं। इसके बाद मामला क्षेत्रीय कार्यालय और फिर क्षेत्रीय कार्यालय बीमा कंपनी को सौंप दिया जाता है।

यह है गैस सिलेंडर की एक्सपायरी डेट जानने का तरीका

गैस सिलेंडर की पट्टी पर ए, बी, सी, डी और 12, 13, 15 लेटर और नंबर की सहायता से एक कोड लिखा होता है। गैस कंपनियां वर्ष के कुल 12 महीनों को चार हिस्सों में बांटकर सिलेंडरों का ग्रुप बनाती हैं। मसलन, ‘ए’ ग्रुप में जनवरी, फरवरी, मार्च और ‘बी’ ग्रुप में अप्रैल मई जून होते हैं। ऐसे ही ‘सी’ ग्रुप में जुलाई, अगस्त, सितंबर और ‘डी’ ग्रुप में अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर होते हैं।

एक्सपायरी या टेस्टिंग का महीना सिलेंडर पर लिखा कोड़ दर्शाता है। साथ ही आगे लिखा नंबर एक्सपायरी ईयर का होता है। मसलन, अगर आपके सिलेंडर पर ‘A-16’ लिखा है तो इसका मतलब है कि एक्सपायरी डेट मार्च, 2016 है। ऐसे ही, ‘सी-16’ का मतलब सितंबर, 2016 के बाद सिलेंडर का इस्तेमाल खतरनाक है।

एक्सपायरी डेट में भी रहती है हेर फेर की संभावना

एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन पांच फीसदी सिलेंडर एक्सपायर्ड या एक्सपायरी डेट के करीब होते हैं। लोगों के बीच जागरुकता की कमी होने के कारण से ये बार बार रोटेट होते रहते हैं। सामान्य तौर पर एक्सपायरी डेट औसतन छह से आठ महीने एडवांस रखी जाती है। चूंकि एक्सपायरी डेट पेंट से प्रिंट की जाती है, इसलिए इसमें हेर-फेर की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। कई बार जंग लगे हुए सिलेंडर पर भी एक्सपायरी डेट डेढ़-दो साल आगे की होती है। इसपर एजेंसी वाले तर्क देते हैं कि यहां से वहां लाते ले जाते वक्त उठा-पटक से कुछ सिलेंडर पुराने दिखने लगते हैं।

एक्सपायर्ड सिलेंडर मिलने पर लें एक्शन

एक्सपायर्ड सिलेंडर मिलने पर उपभोक्ता एजेंसी को सूचना देकर सिलेंडर को रिप्लेस करवा सकता है। गैस एजेंसी के रिप्लेसमेंट से मना करने पर वह खाद्य या प्रशासनिक अधिकारी से शिकायत कर सकता है। इस सेवा में भी कमी दिखने पर उपभोक्ता फोरम में मामला दायर किया जा सकता है।

बीमा लेने के लिए पूरी करनी होती हैं ये शर्तें

शर्तों के तहत आपके घर में इस्तेमाल होने वाला गैस कनेक्शन वैध होना चाहिए। साथ ही आईएसआई मार्क वाले गैस चूल्हे का ही उपयोग होना चाहिए। गैस कनेक्शन में एजेंसी से मिली पाइप-रेग्युलेटर ही इस्तेमाल हो। गैस इस्तेमाल की जगह पर बिजली का खुला तार न हो। चूल्हे का स्थान, सिलेंडर रखने के स्थान से ऊंचा होना चाहिए।

Posted By: Surbhi Jain

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप