बीमा कारोबार में आइडीबीआइ फेडरल लाइफ का अनुभव अभी तक कैसा है?
-आइडीबीआइ फेडरल लाइफ बीमा क्षेत्र में काफी नई कंपनी है। हमने वर्ष 2008 में काम करना शुरू किया है। जब हमारी कंपनी ने काम चालू किया, तब ग्लोबल मंदी का दौर था। उसके कुछ ही समय बाद देश के बीमा क्षेत्र में नियमन को लेकर समस्या होनी शुरू हो गई। इन दोनों का बीमा कारोबार पर बहुत असर पड़ा। बहरहाल, हालात को सुधरने में समय लगा। धीरे-धीरे नियमन संबंधी समस्याओं का समाधान हुआ। हमारे साथ अच्छी बात यह थी कि हमारे पास काफी बड़ा वितरण नेटवर्क पहले से ही तैयार था। इससे हमें अपने उत्पादों की मार्केटिंग में खास समस्या नहीं आई। हम पिछले तीन वर्षो से मुनाफा कमाने वाली कंपनी हैं। लंबी अवधि के लिए हमारी योजना तैयार है। वर्ष 2020 तक बीमा कारोबार को अपने समूह के संस्थानों के लिए राजस्व का अहम जरिया बनाना चाहते हैं। इस दिशा में काम कर रहे हैं।
अब जबकि अर्थव्यस्था में तेजी का माहौल दिख रहा है, बीमा पर क्या असर पड़ेगा?
-देखिए, बीमा कारोबार भी सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है। जब आर्थिक विकास दर तेज होती है तो बीमा कंपनियां भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं और जब मंदी होती है तो इसका भी असर यहां दिखता है। अच्छी बात यह है कि बीमा कंपनियां भी अपना बुरा वक्त पीछे छोड़ चुकी हैं। खासतौर पर जिस तरह से महंगाई की दर काफी नीचे है और आगे भी इसके कम ही रहने की संभावना है, इसका बीमा क्षेत्र पर असर पड़ने की मजबूत संभावना है। दरअसल होता यह है कि जब महंगाई बढ़ती है तो लोगों की बचत पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए वे वित्तीय उत्पादों में निवेश करना भी कम कर देते हैं या बंद कर देते हैं। जब महंगाई कम होती है तो लोगों के पास पैसा बचता है। वे इसका एक हिस्सा में बीमा करवाने में भी खर्च करने लगते हैं।

किस तरह के बीमा उत्पादों पर आपकी कंपनी का ज्यादा फोकस है?
-अभी हम पार्टिसिपेटरी बीमा उत्पादों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। इस तरह के उत्पाद में कंपनी निवेश पर जो मुनाफा कमाती है उसका 90 फीसद तक हिस्सा ग्राहकों में बांट देती है। इस तरह के उत्पादों की मांग भारत जैसे विकासशील देश में बने रहने की काफी उम्मीद है। हाल ही में हमने ऑनलाइन टर्म पॉलिसी भी लांच की है। ऑनलाइन बीमा बाजार में काफी संभावनाएं हैं। इसका फायदा उठाने के लिए कई नए उपायों पर विचार कर रहे हैं। जिस तेजी से युवा वर्ग रोजगार में आ रहा है उसे देखते हुए ऑनलाइन उत्पादों का काफी बड़ा बाजार देश में बनेगा। हालांकि यहां प्रतिस्पद्र्धा भी बहुत होगी। इससे बचत के बारे में तत्काल फैसला लेने में मदद मिलती है। साथ ही ऑनलाइन होने पर आपके लिए तमाम उत्पादों के बीच एक दूसरे से तुलना करना और फैसला करना आसान होता है।

बीमा कानून में एक संशोधन को लेकर बवाल मचा हुआ है कि इससे कंपनियों के लिए दावे को निरस्त करना मुश्किल होगा? आपका क्या कहना है?
-हां, यह बात सच है कि बीमा कानून में जो नए संशोधन किए गए हैं उसके बाद बीमा कंपनियों के लिए किसी भी ग्राहक के दावे को खारिज करना आसान नहीं हो सकेगा। इसका असर आने वाले दिनों में पूरे बीमा कारोबार पर पड़ेगा। बीमा कंपनियों को भी अब और ज्यादा सतर्क रहना होगा। उन्हें बीमा करने से पहले काफी छानबीन करने की जरूरत होगी।
ग्राहकों के स्तर पर बीमा करवाने से पहले क्या सोचना चाहिए?
-बीमा करवाने से पहले मोटे तौर पर तीन या चार चीजों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले, आपकी आय क्या है? आपके खर्चे कितने हैं? आपकी जिम्मेदारी कितने की है? अंत में आपके जीवित नहीं रहने पर परिवार के लोगों के जीवन-यापन के लिए कितनी राशि चाहिए। यह सोचना चाहिए कि जब तक परिवार का मुखिया जीवित है, तब तक तो उसके परिवार या आश्रितों को कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन उन्हें असली जरूरत मुखिया के नहीं रहने पर होगी। ऐसे में उस परिस्थिति को आंककर बीमा करवाना होता है। साथ ही यह भी देखना होता है कि आपके वित्तीय लक्ष्य क्या हैं। इनके आधार पर ही तय होता है कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। अगर जोखिम उठाने की स्थिति में हैं और लंबी अवधि के लक्ष्य हैं, तो आप यूनिट लिंक्ड बीमा पॉलिसियों यानी यूलिप के जरिये उन्हें पूरा कर सकते हैं। यूलिप कई तरह से सीधे इक्विटी में निवेश करने या म्यूचुअल फंड के मुकाबले बेहतर होती हैं।
अनीश श्रीवास्तव
चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर
आइडीबीआइ फेडरल लाइफ इंश्योरेंस

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