महिलाओं के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेते वक्त किस बात का ध्यान रखना चाहिए?

भारतीय परिवारों में महिलाओं की काफी अहम भूमिका है। इस लिहाज से उनकी सेहत भी बहुत ज्यादा अहम हो जाती है। खासतौर पर कामकाजी महिलाओं के लिए यह और भी ज्यादा अहम हो जाता है क्योंकि उनकी आजीविका उनकी सेहत से सीधे जुड़ती है। इसलिए महिलाओं के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेते वक्त इस बात का ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि उसमें उनकी कौन सी बीमारियों को कवर किया जा रहा है। आज के दौर में महिलाओं के लिए क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी एक आवश्यकता बन गई है। वर्तमान में जिन महिलाओं के लिए जो पॉलिसियां उपलब्ध हैं उनमें ब्रेस्ट कैंसर, फेलोपियन ट्यूब कैंसर, यूटराइन कैंसर, ओवेरियन कैंसर, वैजाइनल कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों को भी कवर किया जाता है। ये ऐसी बीमारियां हैं जो केवल महिलाओं को ही प्रभावित करती हैं। गंभीर बीमारियों के दौरान अस्पताल में भर्ती होने और अस्पताल के बाद के उपचार शुल्क को कवर करती हैं। इस तरह की पॉलिसियां महिलाओं और उनके आश्रित परिवारों को सुरक्षित करती हैं। कुछ पॉलिसियों में बीमित महिलाओं और महिला के परिवार के अर्जित सदस्यों के लिए पर्सनल एक्सीडेंट कवर भी होता है। ऐसी पॉलिसियां भी हैं जिनमें बच्चों के लिए एजुकेशन फंड और बेटियों के लिए मैरिज फंड का प्रावधान भी है।

कितना बीमा कवर हो?

कोई भी पॉलिसी लेते वक्त इस बात का ध्यान रखना होगा कि पॉलिसी आपके जीवन स्तर को सुरक्षित रखते हुए कम से कम इतनी एकमुश्त राशि उपलब्ध कराए जिससे स्वास्थ्य लाभ के दौरान आप अपने सभी खर्च उठा सकें। आजकल ऐसी पॉलिसियां है जो आपकी ईएमआइ, एसआइपी, बच्चों की स्कूल फीस, क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग और रोजाना के खचरें में मददगार साबित होती हैं। क्रिटिकल इलनेस कवर खरीदते समय क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी द्वारा ऑफर की जाने वाली विभिन्न मूल्यवर्धित सेवाओं जैसे हास्पिटल कैश एलाउंस, होम नर्सिग, एंबुलेंस शुल्क, इन पेशेंट फिजियोथेरेपी शुल्क, रिकवरी ग्रांट पर खर्च होने वाली रकम भी पॉलिसी में शामिल होनी चाहिए।

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