नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित मुद्रास्फीति की दर जुलाई, 2022 में घटकर 13.93 फीसद (अनंतिम) हो गई है। जून 2022 में WPI आधारित मुद्रास्फीति 15.18 फीसद थी। जुलाई, 2022 में मुद्रास्फीति के इस स्तर पर बने रहने का कारण मुख्य रूप से खनिज तेलों, खाद्य पदार्थों, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस, बुनियादी धातुओं, बिजली, रसायन और रासायनिक उत्पादों आदि की कीमतों में वृद्धि होना है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि मई में थोक महंगाई की दर 16.63 प्रतिशत थी। उसके बाद इसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है। बता दें कि मुद्रास्फीति कम करने के तमाम उपायों के बावजूद भी WPI अप्रैल 2021 से लगातार 16वें महीने दोहरे अंकों में बना हुआ है।

किस चीज में कितनी रही महंगाई

पिछले साल जुलाई में थोक मुद्रास्फीति 11.57 फीसद थी। खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति जुलाई में घटकर 10.77 प्रतिशत हो गई, जो जून में 14.39 प्रतिशत थी। सब्जियों के दाम जुलाई में घटकर 18.25 फीसद पर आ गए, जो पिछले महीने 56.75 फीसद थे। फ्यूल और पावर बास्केट में महंगाई दर जुलाई में 43.75 फीसदी रही, जो पिछले महीने 40.38 फीसदी थी। विनिर्मित उत्पादों और तिलहन में मुद्रास्फीति क्रमशः 8.16 प्रतिशत और (-)4.06 प्रतिशत थी।

बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक मुख्य रूप से मौद्रिक नीति तैयार करने के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों को आधार मनाता है। खुदरा मुद्रास्फीति लगातार सातवें महीने रिजर्व बैंक के 'कंफर्ट जोन' से ऊपर रही। जुलाई में यह 6.71 प्रतिशत पर थी। महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने इस साल रेपो रेट को तीन बार बढ़ाकर 5.40 फीसदी कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने 2022-23 में खुदरा मुद्रास्फीति का स्तर औसतन 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

Edited By: Siddharth Priyadarshi