कई साल पहले मैंने अमेरिका के गणित के अध्यापक जॉन एलेन पाउलोज की एक किताब पढ़ी थी। उन्होंने उस किताब में एक संगठन के संभावित कर्मचारियों के लिए आयोजित टेस्ट के कुछ उदाहरण पेश किए थे। वह उस संगठन को परामर्श देते थे। इस टेस्ट में एक सवाल था कि अगर एक मात्र 50 से बढ़कर 100 हो जाती है तो कितनी बढ़ोतरी हुई, 50 फीसद, 100 फीसद या 200 फीसद? उम्मीदवारों ने उत्तर में अलग-अलग विकल्पों को चुना। इन उत्तरों से पता चलता है कि उम्मीदवारों ने उत्तर महज अनुमान लगाकर दिया। इस सवाल के मामले में यह बात अहम है कि इसका सही उत्तर पाने के लिए किसी बड़ी कुशलता या योग्यता की आवश्यकता नहीं थी। इसकी गणना के लिए सिर्फ गणितीय समीकरण समझने भर की जरूरत थी।

टेस्ट में एक अन्य सवाल पूछा गया था। उम्मीदवारों से पूछा गया कि अमेरिका की जनसंख्या कितनी है। उस समय अमेरिका की जनसंख्या 220 मिलियन यानी 22 करोड़ थी। यह बहुविकल्प प्रश्न नहीं था बल्कि परीक्षार्थियों को अपनी ओर से उत्तर लिखना था। लगभग आधे परीक्षार्थियों ने सही उत्तर दिया। लेकिन इसमें दिलचस्प पहलू गलत उत्तरों में है। गलत उत्तर बेतरतीबी के साथ फैले हुए नहीं थे। परीक्षार्थियों ने सही उत्तर के आसपास की संख्या में भी उत्तर नहीं दिया था। बल्कि उन्होंने जो उत्तर लिखे थे, वे काफी दिलचस्प थे। किसी ने 20 मिलियन तो किसी अन्य ने 2 बिलियन और कुछ ने तो 20 बिलियन की संख्या अपने उत्तर में लिखी थी। बहुत से लोग किसी संख्या को देखकर उसकी अधिकता पर गौर नहीं करते हैं। जबकि सही उत्तर इस पर गौर करने से ही मिलता है। इसके विपरीत वे शुरुआती अंकों पर ध्यान देकर उत्तर निकालने लगते हैं।

आखिर निवेश और पर्सनल फाइनेंस से इस सांख्यकीय ज्ञान का क्या लेना-देना है? इस संबंध को समझने के लिए आपको यह अहसास होना चाहिए कि क्या आप पर्सनल फाइनेंस के मामले में इसी के बूते सफल हो सकते हैं। फिर भले ही आप लोन या म्यूचुअल फंड चुन रहे हों या फिर शेयर में निवेश करने पर विचार कर रहे हों। आमतौर पर उपलब्ध जानकारियों और उनके विश्लेषण अथवा आप अपने तरीके से अपने उपयुक्त विकल्प का चयन कर लेते हैं। निश्चित ही, अधिकांश पर्सनल फाइनेंस की सलाह सूचना या निर्देश के तौर पर दी जाती है कि आपको क्या करना है। मैं यहां जो कुछ भी लिखता हूं, वह भी इसी श्रेणी में आता है। तमाम वित्तीय उत्पादों के विक्रय प्रतिनिधि यानी एजेंट आपको जो बताते हैं, वह भी इसी श्रेणी में आता है। हालांकि दोनों का उद्देश्य भिन्न होता है।

फिर भी मेरा मानना है कि सफलतापूर्वक निवेश करना किसी भी निवेशक की खुद की क्षमता पर ज्यादा निर्भर करता है। काफी कुछ स्वभाव पर भी निर्भर करता है। जो अपने में अलग कहानी है। हालांकि वास्तविक कामकाजी कुशलता के लिए मूलभूत गणितीय कुशलता सबसे जरूरी पहलू है। लेकिन दुर्भाग्यवश, यह कुशलता हर किसी में मौजूद नहीं होती है। इससे खराब स्थिति तो यह है कि कोई भी निवेशकों को इस समस्या के बारे में नहीं बताता है और इसमें सुधार का प्रयास नहीं करता है।

पाउलोज ने इसी किताब में रेखांकित किया है कि संख्या को समझने में अक्षमता को सामाजिक दोष के तौर पर भी नहीं देखा जाता है। लोग मामूली सी व्याकरण या विराम चिन्ह की गलती पर काफी शर्मिदगी महसूस करते हैं लेकिन आसान गणना को भी समझने में अपनी अक्षमता को खुशी से बताते हैं। या कहें तो लोग गर्व के साथ इसका उल्लेख करते हैं।

मैं इस पर कोई अटकल नहीं लगा रहा हूं कि ऐसा क्यों होता है। लेकिन इसका सामाजिक पहलू एकदम स्पष्ट है। यहां मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि अगर आप अपने धन का बेहतर तरीके से प्रबंधन करना चाहते हैं तो आप ऐसी गलतियां न करें। निवेश की मूलभूत गणितीय समझ से ही आप वित्तीय बेहतरी पा सकते हैं। यह आपके लिए कोई अन्य नहीं करेगा। वास्तविकता यह है कि ऐसे बहुत से लोग मिल जाएंगे जो आपकी सांख्यकीय अज्ञानता का फायदा उठा सकते हैं।

किसी अन्य काम की तरह यह बहुत कठिन भी नहीं है। इंटरनेट पर गणितीय ज्ञान बढ़ाने के लिए काफी सामग्री मिल सकती है। इनमें खान एडेकमी की सामग्री सबसे अच्छी है। सिर्फ मूलभूत ज्ञान हासिल करने की जरूरत है। दसवीं कक्षा का गणित दोबारा पढ़ने और उसे समझने भर की आवश्यकता है। अगर आप व्यापक स्तर पर गणितीय या कहें तो अंकीय ज्ञान की कमी से होने वाली गलतियों के बारे में जानने को उत्सुक हैं तो आपको पाउलोज की पुस्तकें पढ़नी चाहिए। इन पुस्तकों में ‘इन्यूमिरेसी: मैथामैटिकल इल्लिटरेसी एंड इट्स कंसिक्वेंसीज’ और ‘ए मैथामैटीशियन रीड्स दि न्यूजपेपर’ प्रमुख हैं। ये पुस्तकें वाजिब कीमत पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं। ये पुस्तकें उपयोगी तो हैं ही, मनोरंजक भी हैं।

निवेश में सफलता पाने के लिए निवेशक की खुद की क्षमता बहुत जरूरी है। अगर आप अपने पैसे का बेहतर तरीके से प्रबंधन करना चाहते हैं तो मामूली गणितीय गलतियां नहीं करनी चाहिए। मूलभूत गणितीय समझ से ही आप सफल निवेशक बन सकते हैं। यह काम आपको खळ्द करना होगा। यह कोई दूसरा नहीं कर सकता है। इस तरह की अज्ञानता के चलते आपसे फायदा उठाने वाले बहुत लोग मिल जाएंगे।

(इस लेख के लेखक धीरेन्द्र कुमार हैं जो कि वैल्यू रिसर्च के सीईओ हैं।)

Posted By: Praveen Dwivedi