नई दिल्ली, धीरेंद्र कुमार। कुछ सप्ताह पहले एचडीएफसी म्यूचुअल फंड के चीफ इन्वेस्टमेंट आफिसर प्रशांत जैन ने 19 साल के बाद कंपनी छोड़ी। पिछले कुछ दशकों में जैन, भारत के सबसे मशहूर फंड मैनेजरों में से रहे, बावजूद इसके कि उनके पिछले कुछ साल उतने अच्छे नहीं गुजरे। एक विलक्षण फंड मैनेजर के तौर पर जैन की साख, लंबे अर्से के दौरान, अच्छे दौर में बेहतर मुनाफा हासिल करने और खराब वक्त में मुनाफे को बचाए रखने के उनके ट्रैक रिकार्ड से बनी। कुछ हद तक ये उनकी तीन दशक के करियर का अति सरलीकरण लग सकती है, लेकिन मोटे तौर पर ये बात इस इंसान के स्टार फंड मैनेजर बनने की वजह साफ कर देती है।

कई दशकों के म्यूचुअल फंड निवेश के रिटर्न किसी भी मध्यमवर्गीय व्यक्ति के जीवन में किस तरह का आमूलचूल परिवर्तन ला सकते हैं, इसे बहुत कम बचत करने वाले समझते हैं। इस बात को समझने के लिए मैंने एक तरह की माडलिंग एक्सरसाइज की। इसका मकसद ये देखना था कि अगर एसआइपी के जरिये लगातार किसी भी ठीक-ठाक फंड में जीवनभर छोटा निवेश किया जाता है, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है। चूंकि हमारा विषय एचडीएफसी और प्रशांत जैन का फंड है, और मुझे एक ऐसे फंड की जरूरत है, जिसका लंबा और अच्छा रिकार्ड हो, इसलिए मैंने इस हाइब्रिड फंड को चुना है। जैन इसे फरवरी, 1994 से मैनेज कर रहे थे। पिछले 28 सालों के दौरान ये फंड पहले पहल ज्यूरिख इंडिया प्रूडेंस फंड के तौर पर मौजूद था। इसके बाद यह एचडीएफसी प्रूडेंस फंड हुआ और उसके बाद एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड के साथ मर्ज हो गया।

अब मान लेते हैं कि किसी ने फरवरी, 1994 से हर महीने 1,000 रुपये निवेश करने शुरू किए। यह भी मान लेते हैं कि उसने ये रकम हर साल बढ़ाई भी। 2008-09 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान हमारे बचत करने वाले ने बिना घबराए अपना निवेश जारी रखा। इस दौर में भी जैन का फंड अपने जैसे दूसरे फंड के मुकाबले कम गिरा। ये मैराथन एसआइपी अगस्त, 2022 यानी 28 साल जारी रही। क्योंकि सालाना निवेश आठ प्रतिशत बढ़ाया गया था, इसलिए महीने का निवेश बढ़कर 8,627 रुपये हो गया। एक छोटी सी रकम हर महीने जमा करना और उसका इतना बढ़ जाना कि किसी की जिंदगी में एक बड़ा फर्क पैदा कर सके, इक्विटी या इक्विटी हाइब्रिड फंड का ठीक यही काम है। इस स्टोरी का मकसद यह साबित करना नहीं है किसी को इसे 28 साल तक जारी रखना है, बल्कि उस अनुभव का है, जो एक म्यूचुअल फंड निवेशक को इस बात का विश्वास दिलाता है कि कैसे बचत और सही निवेश उसके जीवन में बड़ा फर्क पैदा कर सकते हैं। असल बात है इसे बिना ध्यान भटकाए लगातार करते जाना है। अगर आपको एक लंबे अर्से का विजेता होना है, तो आपको शुरुआत जल्दी करनी होगी।

नोट- यह लेखक धीरेंद्र कुमार, सीईओ, वैल्यू रिसर्च आनलाइन डाट काम के निजी विचार हैं।

Edited By: Sarveshwar Pathak