[संदीप सोमानी]। केंद्र की मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट ऐसे कठिन समय में पेश किया गया है, जब अर्थव्यवस्था की वृद्धि में हाल की तिमाहियों में उल्लेखनीय रूप से कमी आई है। सरकार के लिए सबसे कठिन कार्य इस संबंध में समुचित कदम उठाने से जुड़ा था, ताकि अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाया जा सके। बुनियादी ढांचा, कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास से जुड़ी परियोजनाओं में पहले से जारी नीति को बरकरार रखना भी आर्थिक गतिविधियों में तेजी न आने का कारण रहा है।

सरकार की उपलब्धि को गिनाने का एक बड़ा आंकड़ा यह भी है कि अपनी गतिविधियों के जरिये सरकार मुद्रा स्फीति को 3.3 प्रतिशत से नीचे रखने में कामयाब रही है। बजट में व्यापक रूप से तमाम क्षेत्रों को शामिल करते हुए सरकार ने एक लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2024-25 तक भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बनाना है। सरकार ने संकेत दिया है कि बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में आगामी पांच वर्षों में वह 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जो इस क्षेत्र में एक बड़ा सकारात्मक कदम है।

इससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्त मुहैया कराते हुए उन्हें तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। साथ ही देश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की गतिविधियों को नया आयाम मिल सकता है। बुनियादी ढांचों के निर्माण कार्य में तेजी आने से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और निवेश चक्र को मजबूती मिलेगी। इससे सीमेंट, स्टील और वाणिज्यिक वाहनों जैसे निर्माण गतिविधियों से जुड़े सेक्टर में मांग में बढ़ोतरी होगी। साथ ही अन्य संबंधित क्षेत्रों पर भी इसका सकारात्मक असर दिखाई देगा।

इससे नई नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे जो हमारी अर्थव्यवस्था की प्रमुख चुनौतियों में शामिल है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की दशा को सुधारने के लिए तरलता स्थिति को आसान बनाने के उपायों की कवायद करते हुए 70,000 करोड़ रुपये की पूंजी देने की घोषणा की गई है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को भी सुधार की राह पर अग्रसर करने के लिए मदद दी जाएगी। इससे उधार लेने और खपत में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है। ऑटोमोबाइल्स, हाउसिंग और छोटे उद्यमों को इससे फायदा होगा।

कृषि और ग्रामीण क्षेत्र पर भी बजट में पूरा फोकस किया गया है जो अर्थव्यवस्था में इसकी महत्ता को दर्शाता है। शौचालय, बिजली और एलपीजी कनेक्शन जैसी सुविधाओं के साथ गांवों में मकान निर्माण की दिशा में सरकार काम कर रही है। सरकार ने खेती से जुड़े बुनियादी ढांचों की अनेक योजनाओं की घोषणा की है। मत्स्य पालन, डेयरी और अन्य पारंपरिक उद्योगों को भी क्लस्टर- आधारित विकास मॉडल के जरिये प्रोत्साहित किया जाएगा।

संदीप सोमानी, प्रेसिडेंट फिक्की

Posted By: Amit Singh