नाजुक का विलोम शब्द क्या होगा। लेबनानी-अमेरिकन रिस्क एनालिस्ट नासिम निकोलस तालेब अपनी पुस्तक एंटीफ्रेजाइल के बारे में बात करते हुए यह सवाल हमेशा पूछते हैं। लोग इस सवाल के जवाब में मजबूत, सुदृढ़ या अटूट जैसे शब्द बताते हैं। इस पर तालेब पूछते है, पॉजिटिव यानी सकारात्मक का विलोम शब्द क्या है। स्पष्टतया लोग इसके जवाब में निगेटिव यानी नकारात्मक बताते हैं। तो वह लोगों से पूछते हैं कि आपने पॉजिटिव का विलोम जीरो यानी शून्य नहीं नहीं बताया। अगर नाजुक यानी फ्रेजाइल का विलोम सुदृढ़ यानी रोबस्ट है, तो पॉजिटिव का विपरीत जीरो क्यों नहीं होना चाहिए। आमतौर इसके लिए उनकी ओर से और व्याख्या की जाती है।

तालेब बताते हैं कि अगर आप कांच की कोई वस्तु भेज रहे हैं तो आप आमतौर पर उसके पैकेट पर लिखते हैं, ‘सावधानी बरतें।’ लेकिन अगर आप लोहे की कोई वस्तु भेज रहे हैं तो आप ऐसा कोई संदेश नहीं लिखते हैं क्योंकि लोहे की वस्तु मजबूत और सुदृढ़ होती है और उसका पैकेट गिरने पर टूटने की संभावना नहीं होती है। लेकिन नाजुक यानी फ्रेजाइल का सही विलोम शब्द सुदृढ़ नहीं है। अगर आप कोई पैकेट भेज रहे हैं जिसमें नाजुक के विपरीत वस्तु है तो क्या आप उस पर लिखेंगे, ‘कृपया असावधानी बरतें या मिसहैंडल करें।’ अगर नाजुक वस्तुओं को किसी भी तरह के झटके से नुकसान हो सकता है तो इसके विपरीत ऐसी वस्तुएं होनी चाहिए जिन्हें झटकों से कोई लाभ हो।

पहला तर्क पढ़कर अटपटा लगता है। ऐसी वस्तुएं हो सकती हैं जो झटकों को झेल सकती हैं पर निश्चित ही ऐसी वस्तु नहीं हो सकती जिसे झटकों से फायदा मिले। हालांकि जब तालेब इसकी व्याख्या शुरू करते हैं तो आप सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि ऐसी वस्तुएं होती हैं जो पूरी तरह नाजुक के विपरीत हैं।

जब हम शेयर निवेश के बारे में समाचारों पर नजर डालते हैं तो हमें अहसास होता है कि उथल-पुथल निवेशकों के लिए सबसे खराब होती है। जैसे, पिछले कुछ महीनों से शेयर बाजार में काफी उथल-पुथल रही है। बिजनेस टीवी चैनल्स के एंकरों के चेहरे लटके हुए होते हैं। समाचार लिखने वाले हमेशा यह मानते हैं कि शेयर बाजार काफी गिर चुके हैं और अगले कुछ दिनों तक गिरावट रह सकती है लेकिन इसके बाद सुधार होने लगेगा। तमाम निवेशक जिनकी सफलता या विफलता अगले दिन बाजार की दिशा की भविष्यवाणी पर निर्भर रहती है, उन्हें भी इसमें नुकसान उठाना पड़ जाता है। लेकिन क्या कोई निवेश रणनीति ऐसी है जो आम बचतकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो और जिसके जरिये शेयर बाजार में फायदा उठाया जा सके। उथल-पुथल के दौर में भी यह रणनीति फायदा देने वाली साबित हो। क्या कोई एंटीफ्रेजाइल (नाजुक के विपरीत यानी सुदृढ़) निवेश रणनीति है जिसका हम और आप इस्तेमाल कर सकें।

निश्चित ही ऐसी रणनीति है। यह वही रणनीति है जिसे म्युचुअल फंड के स्मार्ट निवेशक पहले से ही अपना रहे हैं। हम बात कर रहे हैं एसआइपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) की। एसआइपी इसी धारणा पर आधारित है कि लंबे समय तक निवेश करने से आपकी निवेश लागत की एवरेजिंग हो जाती है यानी घट जाती है। यह सबसे आसान फिर भी सबसे प्रभावित तकनीक है जिससे उथल-पुथल के दौर में भी फायदा उठाया जा सकता है। आप नियमित रूप से निश्चित राशि हर महीने निवेश करते रहते हैं और यह प्रक्रिया लंबे अरसे तक जारी रहती है। जब बाजार गिरते हैं तो शेयर मूल्य कम होते हैं। इक्विटी म्युचुअल फंडों की नेट असेट वैल्यू यानी एनएवी कम हो जाती है। इससे आपके द्वारा निवेश की गई राशि से आपको म्युचुअल फंड की ज्यादा यूनिट मिलती हैं। लेकिन जब आप अपना निवेश निकालते हैं तो सभी यूनिटों की कीमत समान होती है।

हालांकि इसमें उथल-पुथल के दौर में फायदा ज्यादा होता है क्योंकि गिरावट के समय आपने निवेश किया है। यही एंटीफ्रेजाइल है। उथल-पुथल से वास्तव में आपको फायदा मिलता है। लंबे समय तक शेयर मूल्य धीरे-धीरे बढ़ने से एसआइपी में फायदा होता है। लेकिन बीच-बीच में बाजार में उथल-पुथल होती है तो इसमें रुकावट आती है। एंटीफ्रेजाइल निवेश की सबसे उत्तम रणनीति है। आप ज्यादा फायदा उठाते हैं क्योंकि बाजार में उथल-पुथल होती है। सिर्फ कल्पना कीजिए, अगर बाजार में गिरावट न आए, हर दिन शेयर मूल्य बढ़ते रहें तो आपको एसआइपी में निवेश से कोई फायदा नहीं होगा।

एसआइपी अनिवार्य रूप से नियमित निवेश जारी रखने के लिए एक मनोवैज्ञानिक चाल है। बाजार में तेजी-मंदी से एसआइपी निवेश पर कोई असर नहीं होता है। यह निवेशकों के लिए ऐसा नियमित बंधन है जिसका उन्हें फायदा होता है। इसमें एंटीफ्रेजाइल का तत्व छिपा लाभ है जो लंबे अरसे के बाद मिलता है। जब कोई निवेश को फ्रेजाइल-एंटीफ्रेजाइल के लिहाज से देखेगा तो उसे तुरंत अहसास हो जाएगा कि शेयर या डेरिवेटिव्स में शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में निवेश सबसे नाजुक है जबकि लंबे अरसे तक एसआइपी निवेश सबसे सुदृढ़ रणनीति है।

Posted By: Praveen Dwivedi