अगर अंतरिम बजट से आपके निवेश पर कोई असर नहीं पड़ा तो आगामी चुनाव का असर पड़ सकता है। या फिर अपनी कंपनियों की सारी हिस्सेदारी गिरवी रखने वाले प्रमोटरों की धोखाधड़ी की मार पड़ सकती है। अथवा ब्याज दर को लेकर आरबीआइ के कड़े फैसले का असर पड़ सकता है। या फिर क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की ओर से कोई बुरी खबर आ सकती है। पहले ही अखबारों में सुर्खियां पा चुकी ऐसी खबर जिसमें रेटिंग एजेंसी ने अपनी रेटेड कंपनियों के बारे में कोई गड़बड़ी खोज निकाली हो।

निवेश को प्रभावित करने वाली ग्लोबल घटनाओं पर नजर डालें तो कच्चे तेल की तेजी या फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का तीखा बयान हो सकता है। अथवा कोई अन्य अच्छी या बुरी खबर हो सकती है। यह आश्चर्यजनक होगा कि ऐसी बुरी खबरों के बीच कोई निवेशक एक भी पैसा बाजार में लगाए। मेरे कहने का आशय है कि किसी भी क्षण आपके निवेश के साथ कुछ भी हो सकता है, अच्छा या बुरा। कोई निवेशक पैसा लगाते समय कितने तरह के कारकों पर विचार कर सकता है।

घटनाओं और रुझान के लिहाज से पिछले कुछ महीने निवेशकों के लिए खासतौर पर कठिनाई भरे रहे हैं। इन घटनाओं और रुझानों पर नजर रखने की जरूरत है या फिर वे ऐसी घटनाएं हैं जो नजर रखे जाने योग्य प्रतीत होती हैं। बेहद मजबूत दिखने वाले कारोबार और कंपनियां अनायास दिवालिया हो जाती हैं। दिवालिया प्रक्रिया में गई कंपनियों को दुनिया के सामने यह स्वीकार करना पड़ा। उन्हें मानना पड़ा कि आगे आने वाला समय उनके लिए और चुनौतीपूर्ण होगा।

सबसे बड़ा धोखा यह हुआ कि पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत दिखने वाली कंपनियों ने भी अपने शेयरधारकों को झटका दे दिया क्योंकि प्रमोटरों का कोई और कारोबार समानांतर रूप से चल रहा था। इस तरह का ताजा उदाहरण एसेल-जी ग्रुप का रहा। निवेशक इस तरह की घटनाओं से कैसे निपटें। इसका सीधा निष्कर्ष यह निकलता है कि निवेशकों को हमेशा पूरी तरह जानकार रहना चाहिए और इसका आंकलन करना चाहिए कि कौन सी कंपनी खतरे में आ सकती हैं।

हालांकि, समस्या का यह समाधान कतई नहीं है। आप खुद को आश्वस्त कर सकते हैं कि आपने एसेल व जी ग्रुप के प्रमोटरों की हिस्सेदारी से जुड़े मुद्दे पर पर्याप्त ध्यान दिया है और आप इस मामले में सही निर्णय ले सकते हैं। फिर भी यह अनुमान लगाना अभी कठिन है कि इस मामले में आगे क्या होगा। अगर सवाल सिर्फ इस मसले का होता तो आप नजर रख पाते लेकिन दूसरे अनगिनत मु्ददों पर आप कैसे नजर रख सकते हैं और जोखिम का अनुमान लगाकर उनसे बचने के लिए कैसे फैसला कर सकते हैं। सबसे अहम है कि आप कितने मुद्दों में सही अनुमान लगा सकते हैं।

मैं अनुमान इस वजह से कहता हूं कि इनमें से कोई भी कारक आपके नियंत्रण में नहीं है। आरबीआइ ब्याज दर के बारे में क्या करता है या किसी कारोबारी समूह के अभी तक सुरक्षित रहे प्रमोटर पर क्या आपदा आएगी, ये कारक आपके नियंत्रण में नहीं हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि निवेशक उन पर गौर करें जो उनके नियंत्रण में हों। आपके नियंत्रण में है कि आप कब निवेश करते हैं और कहां और किस कीमत पर निवेश करते हैं। आप किसी बुलबुले के उत्साह में आकर पैसा लगाते हैं या फिर आप व्यवस्थित तरीके से धीरे-धीरे पैसा लगाते हैं। आप जहां भी पैसा लगा रहे हैं, उस पर आपका पूरा नियंत्रण होगा। आपके कुल फाइनेंस की जनरल स्कीमों में यह निवेश आपके लिए कितना अहम है। आप कितने समय के लिए निवेश कर सकते हैं। क्या आपको अनायास इस पैसे की आवश्यकता होगी या फिर यह पैसा नियोजित खर्चो के लिए है। आपके बाकी फाइनेंस कितने स्थिर हैं।

कुल मिलाकर आपका नियंत्रण इन्हीं पर हैं या फिर कहें तो आपके पास इनकी ही वास्तविक जानकारी है। आपको अपने फाइनेंस के बारे में सही जानकारी और समझ होनी चाहिए। यह जानकारी आपके पास पूरी तरह से सत्य होगी। जबकि चीन के साथ ट्रेड वार को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के रुख के बारे में सिर्फ अनुमान ही होगा।

ये ही नियंत्रित अनुमान हैं जिनके बारे में हमने बताया है। लोग उन मुद्दों पर ज्यादा चिंता करते हैं जिन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता है। उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते हैं जिन पर उनका पूरा नियंत्रण है। इसका सटीक उदाहरण है, फ्लाइट में हमें भय लगता है जबकि ड्राइविंग में अतिविश्वास दिखाते हैं। चूंकि हमें नहीं पता कि विमान की छत पर क्या चल रहा है, इसलिए हमें ज्यादा चिंता होती है। जबकि हम खुद ड्राइव कर रहे होते हैं तब हम पर्याप्त चिंता नहीं करते हैं। हम सावधानी से ड्राइविंग की चिंता भी नहीं करते हैं और अनावश्यक जोखिम उठाते हैं। हमारे कहने का आशय है कि हमें उन पर ज्यादा निर्भर होना चाहिए जिन पर हमारा नियंत्रण हो, न कि उन पर जो हमारे नियंत्रण के बाहर हैं। हमें सिर्फ अपने नियंत्रण वाली सूचनाओं पर ही फोकस करना चाहिए। 

(इस लेख के लेखक वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार हैं)

Posted By: Nitesh

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