नई दिल्ली, ओंकेश्वर सिंह। किसी भी टैक्सपेयर के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग बहुत महत्वपूर्ण होती है। यही वजह है कि किसी भी व्यक्ति को वित्त वर्ष की शुरुआत से ही टैक्स में अधिकतम छूट पाने के लिए निवेश की शुरुआत कर देनी चाहिए। लेकिन अमूमन ऐसा देखा जाता है कि टैक्सपेयर्स वित्त वर्ष के आखिरी महीनों तक इस चीज को टालते रहते हैं। नतीजन, साल खत्म होते-होते आनन-फानन में निवेश से जुड़े निर्णय कर लेते हैं। इस चक्कर में कई बार तो लोग गलत इंस्ट्रुमेंट में निवेश कर देते हैं। इससे टैक्स तो बच जाता है लेकिन पूंजी गलत जगह फंस जाती है।  

यह ध्यान रखने वाली बात है कि निवेश का मकसद संपत्ति में इजाफा करना होना चाहिए। टैक्स सेविंग एक अतिरिक्त फायदे वाला लक्ष्य होना चाहिए लेकिन केवल यही मकसद नहीं होना चाहिए।  

आप टैक्स बचाने एवं बेहतर रिटर्न पाने के लिए निम्नलिखित टैक्स सेविंग प्लान को अपना सकते हैंः

  • इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान, मेडिकल इंश्योरेंस, ईपीएफ अंशदान और होम लोन के भुगतान पर टैक्स में छूट का लाभ मिलता है। आपको इस बात पर गौर करना है कि आप इसके जरिए कितना टैक्स बचा पा रहे हैं। 
  • आप इन खर्चों को 1.5 लाख रुपये में से घटा लीजिए। अब आप इस बात का बेहतर आकलन कर पाएंगे कि आपको और कितनी धनराशि निवेश करने की जरूरत है। 
  • अब आप इंवेस्टमेंट के लिए ऐसे ऑप्शन्स चुनिए, जिससे आपको टैक्स में बचता का फायदा भी मिले और साथ ही संपत्ति में भी बढ़ोत्तरी हो। 
  • अगर आप सेक्शन 80C के तहत टैक्स में अधिक छूट चाहते हैं तो ELSS फंड्स इस मामले में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। इसकी वजह यह है कि इसमें लॉक-इन पीरियड सबसे कम होता है और इसमें निवेश से आपको 80C के अन्य विकल्पों की तुलना में बेहतर औसत रिटर्न मिलता है। 
  • अगर आपने अब तक किसी प्रकार का टैक्स सेविंग इंवेस्टमेंट नहीं किया है तो आप ELSS फंड में 1,50,000 रुपये तक का इंवेस्टमेंट कर सकते हैं और सेक्शन 80C के तहत टैक्स में छूट क्लेम कर सकते हैं।  

आइए इस बात का संक्षेप में तुलनात्मक अध्ययन करते हैं कि किस प्रकार ELSS फंड में निवेश से आपको 80C के तहत अन्य इंस्ट्रुमेंट से बेहतर रिटर्न मिलता हैः

निवेश          रिटर्न लॉक-इन पीरियड

ईएलएसएस (ELSS) 12-15%* 3 साल

नेशनल पेंशन स्कीम  9-10% रिटायरमेंट तक

पीपीएफ          7-8% 15 वर्ष

नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट  7-8% 5 वर्ष

बैंक एफडी         6-7% 5 वर्ष

(* एज्यूम्ड रेट ऑफ रिटर्न) 

इस तरह आप इस बात का पता लगा सकते हैं कि अपने टैक्स सेविंग लिमिट का ज्यादा-से-ज्यादा फायदा कैसे उठाया जा सकता है। आपको सजगता के साथ ऐसे ELSS फंड में निवेश करना चाहिए, टैक्स की बचत के साथ संपत्ति का भी सृजन हो।  

किसी भी तरह के निवेश और टैक्स प्लानिंग में ज्यादा-से-ज्यादा रिटर्न प्राप्त करने के लिए सबसे अहम है जल्दी प्लानिंग और फिर उसे अमल में लाना।  

हर कोई पैसे कमाने के लिए बहुत कड़ी मशक्कत करता है लेकिन उसे कैसे खर्च या निवेश करना है, इस बारे में लोग बहुत कम सोचते हैं। हमें अपने पैसे के निवेश के बारे में ज्यादा मशक्कत करने की दरकार है। इससे टैक्स बचाने के साथ-साथ रुपये में कई गुना वृद्धि हासिल करने में मदद मिलती है। 

लंबे समय तक निवेश पर मिलता है बेहतर रिटर्न

बाद में निवेश करने की तुलना में जल्द निवेश करने से आपको ज्यादा फायदा मिलता है। आपके समय को बढ़ने के लिए ज्यादा वक्त मिलता है और इस तरह आप अगले साल के मार्च में आनन-फानन में किए गए निवेश की तुलना में ज्यादा संपत्ति का सृजन कर पाते हैं।  

सालाना बड़े इंवेस्टमेंट के मुकाबले हर महीने छोटा इंवेस्टमेंट ज्यादा सुविधाजनक

जनवरी या फरवरी में एक बड़ी रकम एकमुश्त निवेश करने की तुलना में आपके समक्ष टैक्स सेविंग फंड में हर महीने SIPs के जरिए छोटे-छोटे निवेश का विकल्प मौजूद होता है। अगर आप 80C में सालाना 1,50,000 रुपये की टैक्स छूट की ओर देख रहे हैं तो आप हर महीने 12,000 रुपये के निवेश से शुरुआत कर सकते हैं। SIPs के जरिए हर माह निवेश करने से आपको काफी सुविधा होती है। इसके जरिए आपके पॉकेट पर एक बार में बहुत अधिक बोझ नहीं पड़ता और आपका काम भी हो जाता है।  

अच्छे ELSS फंड को सतर्कता से चुनना है जरूरी

अंतिम वक्त में लिए गए फैसले हमेशा बहुत विवेकपूर्ण और सक्षम नहीं होते हैं। अंतिम वक्त में फैसले लेने पर आपके पास यह शोध करने का समय नहीं होता है कि कौन-सा ELSS फंड सही है। ऐसे में आप जल्द किए गए निवेश से होने वाले फायदे को कैश करने का मौका तो गंवा ही देते हो, साथ में गलत फंड सेलेक्ट करने से आपको नुकसान होने की भी आशंका रहती है। इसलिए फंड का चुनाव समय लेकर और बहुत सोच-विचार कर करने की जरूरत होती है।  

(लेखक सैमको ग्रुप में RankMF के प्रमुख हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं। )

Edited By: Ankit Kumar