नई दिल्ली, राहुल जैन। अब सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIPs) म्युचुअल फंड्स में निवेश का सबसे स्वाभाविक माध्यम बन गया है। SIP का बढ़ता वॉल्यूम इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के डेटा के मुताबिक भारत में 4.02 करोड़ एसआईपी अकाउंट्स हैं, जिनके जरिए निवेशक विभिन्न म्युचुअल फंड स्कीम्स में निवेश करते हैं। ऐसा आम तौर पर देखा जाता है कि निवेशक SIP की सही रकम तय करते समय ऊहापोह में रहते हैं। सबके लिए एक जैसा अप्रोच मुनासिब साबित नहीं हो सकता है। SIP की सही रकम तय करते समय इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैसला किया जा सकता है।

आइए इन पहलुओं पर डालते हैं एक नजरः

लक्ष्य का पूरा विश्लेषण

अधिकतर निवेशक अपने लक्ष्यों का पूरी तरह विश्लेषण किए बगैर SIP में निवेश शुरू कर देते हैं। इससे आम तौर पर लोग जरूरी फंड तैयार करने से चूक जाते हैं। लक्ष्य पर आधारित निवेश के अप्रोच से ना सिर्फ निवेश के लिए जरूरी रकम तय करने में मदद मिलती है बल्कि जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव भी किया जा सकता है।

यहां उल्लेखनीय बात यह है कि हर लक्ष्य दूसरे से अलग होता है और एक अलग तरह के फंड की डिमांड करता है। कार खरीदने के लिए डाउन पेमेंट की रकम जुटाना छोटी अवधि का लक्ष्य है क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा राशि जुटाने की दरकार नहीं होती है। वहीं, दूसरी ओर बच्चों की शिक्षा या रिटायरमेंट फंड तैयार करने के लिए बड़ी राशि के फंड्स की जरूरत होती है।

अपने लक्ष्य के सूक्ष्म विश्लेषण से आपको SIP की रकम तय करने और उद्देश्यों को पूरा करने में मदद मिलती है।

लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जरूरी रकम की करें गणना

SIP के सबसे प्रमुख लक्ष्यों में से एक संपत्ति का सृजन और निर्धारित फंड तैयार करना है। इसलिए हर लक्ष्य के लिए जरूरी रुपये-पैसे की गणना आवश्यक हो जाता है। बच्चों की उच्च शिक्षा एवं आपके रिटायरमेंट के लिए आपको महंगाई दर को भी ध्यान में रखता है क्योंकि इससे समय के साथ आपके धन के मूल्य में कमी आती है।

अगर किसी उच्च शिक्षा में आज के समय में 10 लाख रुपये लगते हैं तो पांच फीसद की वार्षिक महंगाई दर को ध्यान में रखते हुए आपको 15 साल बाद उसी कोर्स के लिए 20 लाख रुपये से ज्यादा रकम की जरूरत होगी। ऐसे में इस तरह के लक्ष्य के लिए आपको महंगाई दर को ध्यान में रखते हुए SIP की रकम का निर्धारण करना होगा। आप इसके लिए ऑनलाइन उपलब्ध कैलकुलेटर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन कैलकुलेटर्स की मदद से आप लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए जरूरी रकम की गणना कर सकते हैं।

इंवेस्टमेंट की अवधि का निर्धारण

SIP की रकम तय करने के लिहाज से निवेश की अवधि का निर्धारण भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। आप जितनी अधिक अवधि के लिए निवेश करते हैं, आपकी SIP की राशि उतनी ही कम होती है। वहीं, आप जितनी कम अवधि के लिए निवेश करते हैं, आपकी SIP की रकम भी उतनी अधिक होती है।

लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए जल्द से जल्द शुरुआत करना फायदेमंद साबित होता है क्योंकि इससे आपके धन को वृद्धि के लिए अधिक समय मिल जाता है एवं आपको कम्पाउंडिंग की शक्ति का फायदा मिल जाता है। आपके पास जब कम वक्त होता है तो ना सिर्फ आपको ज्यादा रकम निवेश करना पड़ता है बल्कि आप पावर ऑफ कम्पाउंडिंग का लाभ भी नहीं उठा पाते हैं।

रिटायरमेंट के लिए फंड बनाने के संदर्भ में इस बात की परामर्श दी जाती है कि नौकरी की शुरुआत से ही और पहली सैलरी मिलने के साथ ही आपको निवेश की शुरुआत कर देनी चाहिए।

निष्कर्ष

SIPs से बचत की एक अनुशासित आदत विकसित होती है। इससे आप पूरे मार्केट साइकिल में निवेश जारी रखते हैं। बाजार जब नीचे होता है तो आप कम राशि में अधिक यूनिट खरीद पाते हैं। इससे आपको कॉस्ट को एवरेज करने में मदद मिलती है।

अगर आप बुनियादी रूप से मजबूत फंड में निवेश करते हैं और निवेश जारी रखते हैं तो आप जरूरी फंड बनाने में कामयाब हो जाते हैं। अपने लक्ष्य के लिए बड़ी रकम तैयार करने के वास्ते आय बढ़ने पर SIPs को टॉपअप करना जरूरी होता है।

(लेखक Edelweiss Wealth Management में प्रेसिडेंट और प्रमुख (पर्सनल वेल्थ) हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)

डिस्कलेमरः किसी भी फंड में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय जरूर लें। किसी भी तरह के नफा-नुकसान के लिए दैनिक जागरण जिम्मेदार नहीं होगा।