अगर आपने पिछले दस साल के दौरान औसत प्रदर्शन करने वाले इक्विटी म्यूचुअल फंड के सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआइपी) में 10,000 रुपये प्रति माह जमा किए हैं तो आपकी बचत और निवेश की वैल्यू करीब 22 लाख रुपये हो चुकी होगी। अभी तक बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट और पीपीएफ में निवेश कर रहे लोगों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन इक्विटी फंडों में लंबे अरसे तक निवेश के सामान्य रिटर्न पर नजर डालें तो यह कोई असाधारण नहीं है। सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले म्यूचुअल फंडों के मामले में यह रिटर्न 27 लाख से 35 लाख रुपये के बीच होना चाहिए। लेकिन इस समय हमें सिर्फ औसत निवेश पर ही ध्यान देना चाहिए क्योंकि यहां हम एक अन्य अहम बिंदु पर चर्चा कर रहे हैं।

आजकल बड़ी संख्या में निवेशक एसआइपी में निवेश कर रहे हैं। लेकिन ऐसे निवेशकों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं होगी जो दशक भर से एसआइपी में लगातार निवेश कर रहे हैं क्योंकि एसआइपी के जरिये निवेश के प्रति लोगों में जागरूकता और संस्कृति पिछले सात-आठ साल में ही बढ़ी है। वैसे तो एसआइपी के जरिये निवेश करने पर शानदार रिटर्न मिलता है। लेकिन शानदार रिटर्न और वैल्यू उस समय नहीं मिल सकती है जब निवेशक होम्योपैथिक डोज के अंदाज में बहुत कम रकम हर महीने निवेश करते हों।

इस बिंदु को एक उदाहरण के जरिये समझते है। मैं पिछले सप्ताह एक व्यक्ति से मिला जिसकी मासिक आय पांच अंकों में यानी एक लाख रुपये से ज्यादा थी। यह एक ऐसा प्रमुख उदाहरण है जो बहुत से निवेशक करते हैं। ये निवेशक पूरी ईमानदारी से लंबे अरसे तक एसआइपी में निवेश कर रहे हैं। लेकिन उनके निवेश की रकम इतनी कम होती है कि वे उसके सहारे बड़ा निवेश खड़ा नहीं कर सकते हैं। इससे उनकी वित्तीय स्थिति को भी कोई मजबूती नहीं मिलती है। अपनी मासिक आय की महज तीन फीसद राशि इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से प्राप्त होने वाली वैल्यू आपके मन बहलाने के लिए ही पर्याप्त हो सकती है।

आपके द्वारा किए गए निवेश की तुलना में प्राप्त रिटर्न आपको बहुत अच्छा प्रतीत हो सकता है लेकिन इससे आपके जीवन में कोई खास वित्तीय बेहतरी नहीं मिल पाएगी। कुछ महीनों पहले, हमारे एक पूर्व पड़ोसी अपनी पत्नी के साथ हमारे घर आए। वे हमसे अपने निवेश के बारे में चर्चा करना चाहते थे। उन्होंने पिछले कई वर्षो में बड़ी रकम अपने बचत खातों में जमा की थी। उन्होंने सारी बचत बैंकों की एफडी में ही जमा कराई थी। लेकिन उन्होंने मेरी सलाह पर करीब 15 साल पहले एसआइपी में निवेश शुरू किया।

उन्होंने बैंकों में जमा बचत राशि एक अच्छे बैलेंस्ड फंड में जमा कर दी और हर महीने 2500 रुपये एसआइपी के जरिये जमा करने लगे। उन्होंने कुछेक बार निवेश की मासिक राशि में थोड़ी बढ़ोतरी भी की। अब उन्हें रिटायरमेंट के बाद के जीवन की योजना बनाने के लिए निवेश निकालने की जरूरत है। उनके बैलेंस्ड फंड में निवेश 12 लाख रुपये का हो चुका है। हर महीने जमा की गई मामूली रकम को देखते हुए अपने निवेश की वैल्यू देखकर वे खासे आश्चर्यचकित हैं। लेकिन कई दशकों के बाद रिटायर होने पर एकत्रित यह रकम कोई खास नहीं है। रिटर्न की दर बहुत अच्छी रही लेकिन एकत्रित हुए रकम आपके आरामदायक सेवानिवृत जीवन के लिए बहुत कम है।

इसी तरह एक अन्य स्थिति ऐसी होती है जिसमें बचतकर्ता पर्याप्त पैसा जुटा पाने में कामयाब नहीं हो पाता है। कई बचतकर्ता एसआइपी के जरिये इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करते हैं लेकिन मासिक बचत राशि में कई वृद्धि नहीं करते हैं। किसी ने 2004 में 10,000 रुपये प्रति माह का एसआइपी शुरू किया। बाद के वर्षो में भी उसने यही राशि एसआइपी में जमा कराई। 2004 में यह रकम उसकी आय के मुकाबले 20 फीसद थी। जबकि अब यह करीब सात फीसद है।

ज्यादातर बचतकर्ताओं की आय हर साल अच्छी दर से बढ़ जाती है लेकिन वे एसआइपी में हर साल पांच फीसद भी वृद्धि नहीं करते हैं। इसका भी आपके कुल निवेश पर खासा असर दिखाई देता है जब आप अपना निवेश निकाल रहे होते हैं। इस पूरी चर्चा का उद्देश्य स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल करने के लिए निवेश पर रिटर्न की उच्च दर ही पर्याप्त नहीं है। अगर आप अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं तो रिटायरमेंट के समय अच्छी रकम हासिल करने के लिए एसआइपी का निवेश समय-समय पर बढ़ाते रहना चाहिए। देश में बचतकर्ता फिक्स्ड-इनकम की मानसिकता से बाहर निकल रहे हैं और शेयर आधार निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। शुरुआत में बेहतर है कि आप कम निवेश ही करें। लेकिन यह कतई तार्किक नहीं है कि दशकों तक आप बहुत मामूली ही निवेश करते रहें। अगर आप अच्छा रिटर्न और बड़ी रकम जुटाना चाहते हैं तो आपको निवेश भी बढ़ाना होगा।

(इस लेख के लेखक वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार हैं।)

Posted By: Praveen Dwivedi