नई दिल्ली, श्लोक श्रीवास्तव। क्या आपके सेविंग अकाउंट में काफी अधिक बैलेंस हैं? अगर हां, तो यह बहुत खुश होने वाली बात नहीं है। आइए जानते हैं कि किस प्रकार सेविंग बैंक अकाउंट में जमा अधिक राशि आपके लिए फायदेमंद से ज्यादा नुकसानदायक है। क्या बचपन में आपके पास गुल्लक होता था? उस दौरान गुल्लक को हिलाने पर जब ऐसा लगता था कि वह बिल्कुल भरा हुआ है तो वह अनुभव कितना शानदार होता था, न। लेकिन अगर संतोष की उस भावना की वजह से आपने जरूरत पड़ने पर गुल्लक को नहीं तोड़ा होता तो शुरुआत में बचत की पूरी गतिविधि ही निरर्थक साबित हो जाती।

आपके बड़े होने पर सेविंग अकाउंट भी एक तरह का गुल्लक ही होता है। अधिक बैलेंस देखना अच्छी बात है लेकिन इसे लेकर आपको इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि आप अपने वित्तीय लक्ष्य को हासिल करने के करीब हैं। इकोनॉमी से जुड़ी एक प्रसिद्ध कहावत है कि पैसे से पैसा बनता है। हालांकि, दुर्भाग्यपूर्ण रूप से आपके सेविंग अकाउंट में पड़े रहने से पैसे का कोई खास ग्रोथ नहीं होता। आपके सेविंग अकाउंट में जितनी अधिक रकम पड़ी होती है, आप पैसे से और बड़ी संपत्ति खड़ा करने के लक्ष्य से और दूर होते जाते हैं।

सेविंग अकाउंट में कितने पैसे होने चाहिए?

एक खास राशि से ज्यादा रकम आपके बचत खाते में नहीं होनी चाहिए। यह रकम आपकी आय, खर्च और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है। इसे लेकर एक नियम बिल्कुल स्पष्ट है कि आपको अपने छह माह के खर्च के बराबर रकम अपने सेविंग अकाउंट में रखना चाहिए। इसे इमरजेंसी फंड कहते हैं। दरअसल, आपका इमरजेंसी फंड इस तरह होना चाहिए कि आपको जब जरूरत पड़े, आप आसानी से उसे निकाल लें।

यहां तक कि इमरजेंसी फंड के लिए भी आपको सेविंग अकाउंट में पैसे रखने की जगह फिक्स्ड डिपोजिट की सुविधा का लाभ उठाना चाहिए। इसकी वजह है कि फिक्स्ड डिपोजिट में आपको सेविंग अकाउंट की तुलना में अधिक ब्याज मिलता है और उन्हें भी जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सकता है।

कुछ लोग जो वित्तीय रूप से ज्यादा कंजर्वेटिव हैं, वे इमरजेंसी फंड में 12 माह के खर्चे के बराबर रकम रख सकते हैं। यहां तक कि कुछ लोग तीन माह के बराबर के खर्चे का इमरजेंसी फंड रखना चाहते हैं। यह व्यक्तिगत निर्णय है और इसे अपनी सुविधा के हिसाब से तय करना चाहिए। हालांकि, सेविंग अकाउंट में 12 महीने के खर्चे से ज्यादा रकम रखा आपकी वित्तीय सेहत को सक्रिय रूप से नुकसान पहुंचाता है।

सेविंग अकाउंट में पड़ी रकम से चीजें किसी तरह गलत दिशा में चली जाती हैं। आपके सेविंग अकाउंट में जब जरूरत से ज्यादा रकम होती है तो उसके दो तरह के परिणाम होते हैं। दोनों आपके खिलाफ होते हैं।

1. वास्तविक मायनों में निगेटिव रिटर्न

अलग-अलग बैंक सेविंग अकाउंट में जमा रकम पर 2.5%-4% का ब्याज देते हैं। यह नॉमिनल रेट है। अगर आप अपने सेविंग अकाउंट में 50,000 रुपये का एवरेज मेंटेन करते हैं तो आपको 4% की सालाना दर से एक साल में महज 2000 रुपये की आय होगी। यह वास्तव में आय का एक तरह का भ्रम है क्योंकि यह इनकम महंगाई दर को मात देने में सक्षम नहीं है। वर्तमान में भारत में महंगाई दर 6% के आसपास है। ऐसे में आपको समझना होगा कि आपको निगेटिव रिटर्न मिल रहा है। टैक्स और महंगाई दर में से अपने रिटर्न को घटाकर आप वास्तविक निगेटिव रिटर्न का आकलन कर सकते हैं। महंगाई दर की वजह से आपके बैंक अकाउंट में पड़ी रकम का वैल्यू समय के साथ घटता है क्योंकि आपको इस पर मिलने वाला रिटर्न महंगाई दर को मात देने में सक्षम नहीं होता है।

2. अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति

अगर आपके बैंक अकाउंट में आपकी जरूरत से ज्यादा रकम है तो आप अपनी जरूरत से ज्यादा खर्च करते हैं। यह आपके मन में सुरक्षा और अतिरिक्त होने का झूठा भाव देता है। अगर आपकी सेविंग ज्यादा है तो आप कई बार गैर-जरूरी खर्चे कर डालते हैं।

आपके सेविंग अकाउंट में ज्यादा रकम पड़े हैं तो बहुत संभव है कि आप अपने अमेजॉन के विशलिस्ट में पड़े सभी सामानों की खरीद के लिए दोबारा ना सोचें, आपका मन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अपग्रेड करने के लिए ललचा जाए और इस कारण आप ज्यादा रकम खर्च कर डालें। ऐसे में आपको अपने आपको इन चीजों से बचाना और दिमाग को यह संकेत देना है कि आपके पास अतिरिक्त फंड नहीं हैं। मैं अपनी अतिरिक्त जमा पूंजी को सेविंग अकाउंट में रखने की बजाय क्या करूं?

आप पैसे से पैसे बनाइए। कई लोग पैसे कमाने के लिए ज्यादा काम करते हैं और उन्हें यह अहसास नहीं होता है कि उनके पैसे भी उनके लिए अतिरिक्त पैसे बनाने का काम कर सकता है। आप फाइनेंशियल प्लानिंग और निवेश के जरिए ऐसा कर सकते हैं।

बचत करना फाइनेंशियल प्लानिंग का महज पहला पड़ाव होता है। आपको इस चीज के आकलन की जरूरत है कि आपकी कम अवधि और लंबी अवधि के लक्ष्य क्या हैं। इक्विटी, सोना, रियल एस्टेट, ईटीएफ और अन्य में निवेश से आप संतुलित इंवेस्टमेंट पोर्टफोलिया का निर्माण कर सकते हैं और अपने पैसे से और पैसे बना सकते हैं।

ऐसे में जब आप निवेश से जुड़ा कोई रणनीतिक फैसला करते हैं तो आपका पैसा आपके लिए हर वक्त काम करना शुरू कर देता है। इसके बाद जब आप सोए रहते हैं या किसी वेकेशन पर जाते हैं तब भी आपका पैसा आपके लिए काम करता है। यह निवेश और कम्पाउंडिंग की खूबसूरती है और इसीलिए आपको पूरी जमा पूंजी सेविंग अकाउंट में नहीं छोड़ देना चाहिए।

लेखक एप्रिसिएट के को-फ़ाउंडर हैं और लेख में व्यक्त उनके विचार निजी हैं 

Edited By: Nitesh