नई दिल्‍ली, रोहित पोद्दार। भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र (Real Estate Sector) लगातार कुशल और अकुशल दोनों तरह के श्रमिकों का देश का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता रहा है। महामारी ने बीते साल इस क्षेत्र के लिए कई समस्याएं खड़ी कीं। FY21 के Q4 में घर खरीदारों ने रेजिडेंशियल रियल एस्टेट की मांग को बहाल करते हुए सस्ते मॉर्टगेज रेट और डेवलपर प्रोत्साहन का फायदा उठाया। आवासीय बिक्री ने शीर्ष 7 शहरों में तीसरी तिमाही में 2020 से अपने वॉल्यूम का 90% से अधिक रिकवर किया। हालांकि, आज डेवलपर्स कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की बढ़ती कीमतों और लेबर शॉर्टेज से विवश हैं।

महामारी के प्रकोप के बाद उद्योग ने खुदको बरक़रार रखने के लिए कई बदलाव किए हैं। ऐसे समय में जब रियल एस्टेट कोविड-19 की पहली लहर से उबर रहा था, उसी वक्त दूसरी लहर आ गई, जिसने स्टील, सीमेंट, सॉलिड ब्लॉक, खिले, बाइंडिंग वायर और प्लाईवुड जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल की लागत बढाकर समस्याएं अधिक बढ़ा दी। राल (रेसिन) और पॉलीमर की कीमतों में वृद्धि के कारण जनवरी से पाइपिंग और इंसुलेटर की कीमत में लगभग 15% की वृद्धि हुई है। यह विनिर्माण बाधाओं और आपूर्ति की कमी सहित कई परिस्थितियों के कारण था। उद्योग के सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इन वस्तुओं की कीमतों में कुछ मामलों में 100% तक की वृद्धि हुई है। इसने डेवलपर्स की अपने ग्राहकों को किसी भी तरह का डिस्काउंट देने की क्षमता को बाधित किया है।

पिछले साल की कठिन परिस्थितियों से उबरकर जब उद्योग जगत ने राहत की सांस लेना शुरू किया था, उसी समय कई कच्चे माल की कीमतों ने आसमान छू लिया। यह घर खरीदारों को डिस्काउंट और विशेष ऑफ़र देने की हमारी क्षमता को सीमित कर देगा, जो वर्तमान बाजार स्थिति की आवश्यकता है। पिछले साल लॉकडाउन हटने के बाद डेवलपर्स के प्रोमोशनल ऑफरिंग ने देखी गई रिकवरी में योगदान दिया। हालांकि, इस साल इसी तरह के ऑफर को होल्ड पर रखा जा सकता है।

ईंधन की लागत में लगातार वृद्धि को रॉ मटेरियल की कीमतों में वृद्धि का एक प्रमुख चालक माना जाता है, जो इस क्षेत्र की व्यवहार्यता को और कमजोर कर देगा, जो पहले से ही महामारी से पीड़ित था। सीमेंट, बिजली, टाईल्स जैसे अन्य फिक्स्चर की लागत भी बढ़ गई है, जिसके परिणामस्वरूप प्रति वर्ग फुट की लागत बढ़ गई है। रेरा के नियमों के अनुसार, बढ़ी हुई कीमतें खरीदारों को हस्तांतरित नहीं की जा सकतीं, इसलिए उद्योग को अब सामग्री लागत में भारी वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए रॉ मटेरियल के इनपुट कॉस्ट को आसमान छूने से रोकना महत्वपूर्ण है ताकि आवास की बिक्री में हालिया उछाल जारी रह सकें।

नए कंस्ट्रक्शन इकोसिस्टम के उदय में अन्य महत्वपूर्ण चालक एक अधिक विकसित और डिजिटल भारत के लिए सरकार का प्रोत्साहन है, जो 'नई ऊंचाइयों' की ओर बढ़ने की उम्मीद है। भारत के मौजूदा बिल्डिंग पोर्टफोलियो को बुनियादी ढांचे के लिए बढ़े हुए बजट और सभी के लिए गृहनिर्माण, नए निर्माण विधियों को नियोजित करने जैसे पहलों से लाभान्वित होने का अनुमान है। अगले वर्ष, यह क्षेत्र अधिक प्रबल और मजबूत तरीके से उभरने की उम्मीद है, क्योंकि खराब समय बीत चुका है और नई शुरुआत, नई संभावनाएं और नई आशावाद के साथ उज्ज्वल भविष्य की प्रतीक्षा है।

वर्तमान में रियल एस्टेट क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद में 7-8% का योगदान देता है, अगर इसका अच्छी तरह से उपयोग किया जाए तो इसमें 2030 तक 13% तक योगदान करने की क्षमता है। इसलिए कोई भी मूल्य वृद्धि, इनपुट लागत में वृद्धि परोक्ष रूप से देश की बड़ी विकास कहानी को प्रभावित करेगी। यदि सुधारात्मक कदम तुरंत लागू नहीं किए गए, तो संपत्ति के मूल्य बढ़ जाएंगे, जिससे किफायती आवास और सभी के लिए आवास जैसे सरकारी मिशनों के लिए सीधा खतरा पैदा हो जाएगा। घर खरीदारों को रिकॉर्ड लो हाउसिंग लोन इंटरेस्ट रेट से बचत को रद्द करते हुए अपने वांछित घर पर अधिक पैसा लगाना होगा।

(लेखक पोद्दार हाउसिंग एंड डेवलपमेंट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं। छपे विचार उनके निजी हैं।)

Edited By: Ashish Deep