नई दिल्ली (निमेष शाह)। पिछले कुछ दिनों में भारतीय इक्विटी बाजार में तेज गिरावट आई है। निसंदेह ऊंचाई पर चल रहे बाजार में इस करेक्शन से निवेशकों में घबराहट की स्थिति है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि हालिया करेक्शन की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई गिरावट है। यह कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि अगले 10 साल तक भारत विकास की नई गाथा लिखता रहेगा।

हम तेजी पर चल रहे वैश्विक बाजारों के बीच थे। डाओ जोंस जैसे कुछ बाजारों में 10 से 15 दिन की अवधि के बीच करीब 1,000 अंक तक का उछाल आया था। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी दिखा। जनवरी में भारतीय बाजारों ने लगभग छ: फीसद तक की छलांग लगाई थी। यह पिछले एक दशक में शेयर बाजारों का सर्वश्रेष्ठ मासिक प्रदर्शन रहा था। स्पष्ट है कि जनवरी में ग्लोबल मार्केट सीमा से अधिक तेजी पर रहे थे। इसी कारण से तेज करेक्शन भी देखने को मिला।

अभी यह कहना मुश्किल है कि बाजार में और करेक्शन होगा या नहीं, क्योंकि अमेरिकी बाजार 2009 से 2018 के बीच लगातार बढ़त पर रहे हैं। इन परिस्थितियों में निवेशक सबसे बड़ी गलती करते हैं कि वे अक्सर उचित एसेट एलोकेशन मॉडल पर ध्यान नहीं देते हैं। हमारा मानना है कि अगले डेढ़ साल कंपनियों की कमाई के नतीजे बाजार पर असर डालेंगे और तेजी का क्रम बना रहेगा। अगले डेढ़ साल कंपनियों के मुनाफे में तेजी की उम्मीद है। यह तेजी सभी सेक्टरों में कैपेसिटी यूटीलाइजेशन में सुधार से आएगी।

अभी बाजार ऊंचाई पर हैं, इसलिए इस समय सावधानी बरतने और एसेट एलोकेशन पर ध्यान देने की जरूरत है। पिछले दो से तीन साल के दौरान बाजार तेजी के रास्ते पर रहा है। इस दौरान जिन निवेशकों ने शुरुआत की, उन्होंने अब तक गिरावट वाले दौर का सामना नहीं किया है। ऐसे में उनमें से कई को यह लगता है कि इक्विटी बाजार में निवेश से कोई खतरा नहीं है। उन्होंने अपनी पूंजी का बड़ा हिस्सा इक्विटी में ही लगाना शुरू कर दिया है। यह चिंताजनक स्थिति है। सेक्टर के लिहाज से हम इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर यूटिलिटी स्पेस, आइटी और फार्मास्यूटिकल को लेकर आशान्वित हैं।

निवेश से बेहतर ठिकाने

इस समय डायनामिक एसेट एलोकेशन फंड, लार्ज कैप फंड और क्रेडिट (डेट) फंड निवेश के लिहाज से तीन श्रेष्ठ चुनाव हो सकते हैं। हम निवेशकों को डायनामिक एसेट एलोकेशन फंडों में निवेश की सलाह देंगे, जो पूरी तरह इक्विटी में पैसा लगाने से बेहतर है। इसमें पैसा इक्विटी और डेट दोनों में लगता है। वैल्यूएशन के नजरिये से देखें तो स्माल कैप और मिड कैप सेगमेंट इस समय अपने स्तर से ज्यादा ऊंचे पर चल रहे हैं। इनकी तुलना में लार्ज कैप फंड ज्यादा आकर्षक विकल्प हो सकते हैं।

इसके अलावा उतार-चढ़ाव के लिहाज से भी लार्ज कैप फंड अन्य की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होते हैं। डेट सेगमेंट में निवेशक क्रेडिट ओरिएंटेड फंड की ओर से रुझान रख सकते हैं। इन फंडों से टैक्स की बचत भी होती है और निवेश पूंजी भी बढ़ती है। इनके साथ ही एसआइपी यानी सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये निवेश करने वालों को भी प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए। उन्हें बाजार की हालिया उठापटक से घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

(इस लेख के लेखक आइसीआइसीआइ प्रुडेंशियल एएमसी के एमडी एवं सीईओ निमेष शाह हैं। )

By Surbhi Jain