नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) से रिटायरमेंट के बाद होने वाली पूरी निकासी को आखिरकार टैक्स फ्री बना दिया गया है। यह बात हालांकि पहले से ही स्पष्ट थी कि एक-न-एक दिन ऐसा निश्चित रूप से किया जाएगा और हर साल आम बजट से पहले कुछ लोग ऐसा कहते भी रहे थे। खुद मैं 2009 के बाद से हर साल ऐसा लिखता रहा हूं। कुछ साल पहले वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ ब्यूरोक्रैट ने भी आम बजट से पहले कहा था कि तार्किक आधार पर ऐसा किया जाना उचित है। हालांकि अभी तक ऐसा किया नहीं जा सका था, जो अब आखिरकार हो गया।

रिटायरमेंट के बाद होने वाली संपूर्ण निकासी को टैक्स फ्री बनाने से आखिरकार एनपीएस भी कराधान के लिहाज से ईपीएफ और पीपीएफ के समान हो गया। प्रोविडेंट फंड स्कीम्स में भी जमाओं पर टैक्स नहीं लगता है (निर्धारित सीमा तक), रिटर्न पर टैक्स नहीं लगता और निकासी भी टैक्स फ्री है। एनपीएस में यह तीसरा चरण अब तक टैक्स फ्री नहीं था। बल्कि सच्चाई तो यह है कि इसमें अब तक खंडित कराधान की संरचना थी, जो किसी भी अन्य प्रकार की जमा योजनाओं की कराधान व्यवस्था के मुकाबले अधिक जटिल थी। एनपीएस में कुल फंड के 40 फीसद का एन्युटी (पेंशन) खरीदने में अनिवार्य तौर पर उपयोग करने का प्रावधान है और यह अंश टैक्स फ्री है। शेष राशि की निकासी की जा सकती है और इस हिस्से पर टैक्स लगता था। अब एनपीएस का पूरा का पूरा फंड टैक्स फ्री कर दिया गया है।

एनपीएस जहां 2004 के बाद सेवा से जुड़ने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है, वहीं यह निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी उपलब्ध है। साथ ही यह स्वरोजगार करने वाले लोगों के लिए भी उपलब्ध है। एनपीएस को टैक्स फ्री बना देने से देश में उपलब्ध सेवानिवृत्ति विकल्पों में एक बुनियादी और महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। अभी यह इसलिए भी और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि इक्विटी फंड से होने वाले लांग टर्म रिटर्न को टैक्सेबल बना दिया गया है।

अब एक आम आदमी एनपीएस में हाई इक्विटी ऑप्शन चुन सकता है और 60 साल तक बचत कर सकता है। उस समय जाकर पूरी की पूरी राशि की निकासी टैक्स फ्री हो जाएगी, हालांकि 40 फीसद राशि को एन्युटी में निवेश करना अनिवार्य है। आप म्यूचुअल फंड में भी ऐसा कर सकते हैं, पर मुझे लगता है कि एनपीएस को टैक्स फ्री बनाए जाने के बाद की स्थिति में एनपीएस तुलनात्मक रूप से एक बेहतर विकल्प बन गया है। म्यूचुअल फंड (बल्कि किसी भी अन्य फंड) की तुलना में एनपीएस का खर्च काफी कम होता है। लंबी अवधि में देखा जाए, तो कंपाउंडिंग के प्रभाव के कारण कम खर्च का लाभ बढ़कर काफी अधिक हो जाता है। इसमें यदि नई शून्य कर वाली व्यवस्था के लाभ को भी जोड़ दिया जाए, तो म्यूचुअल फंड की तुलना में एनपीएस एक बेहतर रिटायरमेंट सेविंग ऑप्शन हो जाता है।

हालांकि यह भी सही है कि कोई भी इस बात को लेकर पक्का नहीं हो सकता है, क्योंकि भविष्य के बारे में सटीक अनुमान लगा पाना संभव नहीं है। खासकर रिटायरमेंट की योजना बनाने में क्योंकि यह एक अत्यधिक लंबी अवधि की योजना होती है। हालांकि मेरा मन यह कहता है कि अब एनपीएस में म्यूचुअल फंड से बेहतर लाभ है। चूंकि एनपीएस काफी लंबी अवधि की योजना होती है, इसलिए इसमें एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भी ध्यान देने योग्य होती है। वह है नियम और कानूनों की स्थिरता।

एनपीएस जैसी रिटायरमेंट से जुड़ी योजना में हालांकि लंबी अवधि में नियमों की स्थिरता की अधिक उम्मीद की जा सकती है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इसका सीधा संबंध सरकारी कर्मचारियों से है। इतना ही नहीं यदि नियमों में बदलाव होता भी है, तो यह बदलाव निवेशकों के लिए फायदेमंद होने की उम्मीद अधिक है और नुकसानदेह होने की आशंका कम है। पिछले अनुभवों को देखते ऐसा ही माना जा सकता है। म्यूचुअल फंड और शेयर निवेश के मामले में हालांकि ऐसी स्थिति नहीं है। हाल में इक्विटी म्यूचुअल फंड और शेयरों के निवेश पर लगाया गया लांग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स इस बात का गवाह है।

कुल मिलाकर देखा जाए, तो रिटायरमेंट के बाद होने वाली संपूर्ण निकासी को टैक्स फ्री बनाए जाने के बाद किसी भी भारतीय निवेशक के लिए एनपीएस का विकल्प पहले से काफी अच्छा हो गया है। अब भी हालांकि एनपीएस के मामले में कुछ पेचीदगियां बची हुई हैं, लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि सरकारी कर्मचारियों के लिए एनपीएस वाले रिटायरमेंट की पहली पीढ़ी के शुरू होने से काफी पहले इन मुद्दों का भी समाधान हो जाएगा। यह बात भी ध्यान में रखना चाहिए कि एनपीएस के बारे में बताने और इसमें निवेश करने के लिए आपको प्रोत्साहित करने के लिए कोई भी नहीं आने वाला है।

एनपीएस का कम खर्चीला निवेश विकल्प सिक्के का एक पहलू है और दूसरा पहलू यह है कि एनपीएस के मामले में किसी एजेंट को कमीशन देने वाला कोई नहीं है और ऐसा कोई फंड नहीं है, जिससे किसी भी एजेंट को कमीशन दिया जा सके। आपको एनपीएस के बारे में खुद जानना और समझना होगा और इसमें निवेश करने का निश्चय खुद ही करना होगा। निश्चित रूप से वैल्यू रिसर्च जैसे निवेशक केंद्रित संसाधन हमेशा रहेंगे, लेकिन नई खासियत वाले एनपीएस का लाभ उठाने के लिए आपको खुद ही पहल करनी होगी।

(इस लेख के लेखक वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार हैं)

Posted By: Praveen Dwivedi

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