नई दिल्‍ली। अगर आप अपनी मौजूदा हेल्‍थ इंश्‍योरेंस (Health Insurance) पॉलिसी से संतुष्‍ट नहीं हैं तो इसे मोबाइल नंबर की तरह ही दूसरी इंश्‍योरेंस कंपनी के पास पोर्ट करवा सकते हैं। हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी के जरिए इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर एक इंश्योरेंस कंपनी से दूसरी कंपनी में अपनी पॉलिसी को शिफ्ट करा सकते हैं। पॉलिसी को पोर्ट करने पर ग्राहक प्रारंभिक प्रतीक्षा अवधि, विशिष्ट बीमारियों के लिए प्रतीक्षा अवधि, इत्यादि को नहीं खोते हैं साथ ही पॉलिसी में अर्जित नो क्लेम बोनस (NCB) का लाभ भी जारी रहता है। पोर्टेबिलिटी तब भी लागू होती है, जब आप एक ही कंपनी के एक इंश्योरेंस प्लान से दूसरे में स्विच करते हैं। मिसाल के तौर पर अगर आप तीन साल की लगातार कवरेज के बाद अपनी पॉलिसी को पोर्ट करते हैं और पॉलिसी में प्री-एग्जिस्टिंग बीमारियों पर 3 साल की प्रतीक्षा अवधि है तो पॉलिसी पोर्ट होने के बाद भी आप बिना किसी प्रतीक्षा अवधि के अपनी प्री-एग्जिस्टिंग बीमारी पर इंश्योरेंस कवर ले सकते हैं। 

कब कराएं पॉलिसी पोर्ट

जब आप अपनी मौजूदा इंश्योरेंस कंपनी द्वारा दिए गए कवरेज और लाभों के बारे में किए वादों से से संतुष्ट न हों तो आप उपलब्ध अन्य विकल्पों को देखना शुरू कर सकते हैं। लेकिन पॉलिसी को पोर्ट करने से पहले आपको उपलब्ध कवरेज, कंपनी के नेटवर्क में अस्पतालों की उपस्थिति, इंश्योरेंस क्लेम्स को सेटल करने में आसानी जैसे प्रमुख पहलुओं की जांच करनी चाहिए।

पॉलिसी पोर्ट करने के फायदे

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की पोर्टेबिलिटी आपकी पॉलिसी के फायदों को बनाए रखने की सुविधा प्रदान करती है। आप उन सुविधाओं / लाभों को भी चुन सकते हैं जो आपको पर्याप्त इंश्योरेंस कवर प्राप्त करने में मदद करते हैं। पोर्टेबिलिटी के जरिए पॉलिसीधारक के पास अपनी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के मुताबिक इंश्योरेंस पॉलिसी में बदलाव करने का विकल्प मिलता है।

कैसे कराएं हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पोर्ट

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पोर्ट करने के लिए पांच चरणों की प्रक्रिया होती है- 

  • आपको मौजूदा पॉलिसी के नवीनीकरण की तारीख से कम से कम 45 दिन पहले पॉलिसी पोर्ट करने के लिए नए बीमाकर्ता के पास आवेदन करना होगा।
  • पोर्टिंग एप्लिकेशन प्राप्त होने पर, नई बीमाकर्ता कंपनी आपको एक प्रस्ताव फॉर्म के साथ पोर्टेबिलिटी फॉर्म प्रदान करेगी, जिसे आपको सही ढंग से भर कर बीमा कंपनी को प्रस्तुत करना होगा। 
  • नई बीमाकर्ता कंपनी पॉलिसीधारक के मेडिकल और क्लेम हिस्ट्री जैसे आवश्यक विवरणों की जांच करेगा। मौजूदा बीमा कंपनी अनुरोध प्राप्त होने के 7 कार्य दिवसों के भीतर निर्धारित प्रारूप में जानकारी प्रदान करेगी।
  • आवश्यक जानकारी प्राप्त करने पर, नए बीमाकर्ता अपने मानदंडों के अनुसार पॉलिसी का प्रस्ताव तैयार करेंगे।
  • नई बीमाकर्ता कंपनी 15 दिनों के अंदर संबंधित पॉलिसीधारक को अपना निर्णय बताएगी। यदि कंपनी इस निर्धारित समय सीमा में अपना निर्णय ग्राहक को सूचित नहीं करती, तो बीमा कंपनी को प्रस्ताव को अस्वीकार करने और पॉलिसी पोर्ट करने के ग्राहक के अनुरोध को अस्वीकार करने का कोई अधिकार नहीं होगा।

हेल्थ इंश्योरेंस पोर्ट करने में आने वाली दिक्कतें

  • रिन्यूअल के वक्त ही किसी पॉलिसी को पोर्ट कराया जा सकता है। आप साल के दौरान किसी अन्य समय पर पॉलिसी पोर्ट नहीं कर सकते।
  • जिस प्लान को आप पोर्ट करना चाहते हैं, उसके आधार पर प्रीमियम लागू हो सकता है। यदि आपने अतिरिक्त कवर का विकल्प चुना है, तो आपका प्रीमियम बढ़ सकता है।
  • आपको केवल समान प्रकार की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों को पोर्ट करने की इजाज़त मिलती है। 
  • बीमाकर्ता कंपनी को पोर्टिंग अनुरोध स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार है। यदि बीमाकर्ता आपके आवेदन को 'अनुपयुक्त' पाता है, तो वो आपके अनुरोध को नकार सकता है।

पोर्ट करते वक्त ध्यान में रखने योग्य बातें 

लाइफटाइम रिन्यूएबिलिटी: हेल्थ पॉलिसी पोर्ट करते समय, आपको ऐसी इंश्योरेंस कंपनी चुननी चाहिए जो आपके प्लान के लिए लाइफटाइम रिन्यूएबिलिटी ऑफर करे। ऐसा करने से आपको चिकित्सा बिलों के भुगतान के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं रहती और कंपनी अस्पताल के खर्चों को हमेशा कवर करती है। 

पर्याप्त कवरेज: पॉलिसी पोर्ट करने के आवेदन से पहले आपको अपने पूरे परिवार की स्वास्थ्य आवश्यकताओं का सही आंकलन करना चाहिए और फिर एक ऐसी कंपनी पर स्विच करना चाहिए जो आपको पर्याप्त स्वास्थ्य कवर प्रदान करे। साथ ही आपको एक ऐसी बीमा कंपनी चुननी चाहिए जो इलाज के दौरान कमरे के किराए, उप-सीमा और सह-भुगतान पर कोई प्रतिबंध न लगाए।

कैशलेस हॉस्पिटलाइज़ेशन: जब आप एक नेटवर्क अस्पतालों में भर्ती होते हैं, तो आप कैशलेस हॉस्पिटलाइज़ेशन का लाभ उठा सकते हैं। आपको ऐसी कंपनी में स्विच करना चाहिए, जिसमें ऐसे नेटवर्क अस्पतालों की एक विस्तृत लिस्ट हो जोकि आपके घर के करीब हों। 

प्रीमियम पर लोडिंग: आपकी स्वास्थ्य स्थिति और इंश्योरेंस क्लेम्स के इतिहास के आधार पर बीमा कंपनी आपके हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ा सकती है। ऐसे में आपको ऐसी कंपनी चुनना चाहिए जोकि इंश्योरेंस प्रीमियम पर लोडिंग लागू नहीं करता।

(लेखक, सुभाष नागपाल इंश्योरेंस सेक्टर के जानकार और comparepolicy.com के सीईओ हैं)

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Posted By: Manish Mishra