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नई दिल्ली (धीरेंद्र कुमार)। इस वर्ष फरवरी में तत्कालीन कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पेश किया गया बजट किसी रोमांचक फिल्म के इंटरवल से ठीक पहले के दृश्य की तरह था। इंटरवल तक दर्शकों की भूख बढ़ाने के लिए काफी मसाला पेश किया जा चुका होता है, लेकिन उन्हें यह बिल्कुल पता कि आगे क्या-क्या होने वाला है। अब इंटरवल खत्म होने के बाद सभी दर्शक वापस थिएटर में आ चुके हैं। और फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, रहस्य गहराता जा रहा है।

हर वर्ष आम बजट से ठीक पहले कुछ बातें मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बनी रहती हैं और ये सभी बातें हर साल एक जैसी होती हैं। मसलन, अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की जरूरत है, इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र का बजट बढ़ाया जाना चाहिए, राजकोषीय घाटे पर दबाव है, 80-सी के तहत टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने की जरूरत है, इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ाई जा सकती है..वगैरह-वगैरह। इनमें से आखिरी दो (80-सी के तहत टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने की जरूरत है और इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ाई जा सकती है) के सच होने की संभावना काफी ज्यादा होती है, क्योंकि हर दूसरे-तीसरे वर्ष इनमें राहत दे दी जाती रही है। ऐसे में यह कयास आम है और ठीक भी है कि इन दोनों मामलों में कोई नई बात कही जा सकती है।

भला हो वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का, जिसके लागू होने के बाद अप्रत्यक्ष कर में फेरबदल के बारे में कयासबाजियों का दौर अब खत्म हो गया है। अब अप्रत्यक्ष कर में बदलाव जीएसटी काउंसिल की बैठक में साल में किसी भी वक्त और कितनी भी बार किए जा सकने की सुविधा है। अब जबकि जीएसटी कानून की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ती जा रही है, तो अप्रत्यक्ष कर में बदलाव की बारंबारता भी कम हुई है। अप्रत्यक्ष कर में किसी भी बदलाव को लेकर अब बजट पर निर्भरता खत्म हो गई है।

सच तो यह है कि पिछले कुछ वर्षो के दौरान एक सबसे महत्वपूर्ण घटना यह घटी है कि अब बजट का महत्व पहले से बहुत कम हो गया है। आम धारणा यह है कि पांच जुलाई को बजट पेश करते वक्त निर्मला सीतारमण शायद ही ऐसी कोई घोषणा करें, जिसका सबकी जिंदगी पर तत्काल कोई महत्वपूर्ण असर पड़ता हो। मान लीजिए कि अगर आयकर कानून की धारा 8-सी की सीमा वर्तमान डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी जाती है (जो वास्तव में बड़ा कदम होगा), तब भी जो टैक्स के सबसे ऊंचे स्लैब में होंगे, उनकी मासिक टैक्स बचत करीब 1,300 रुपये की ही होगी। जिनकी कमाई 10 लाख रुपये तक मासिक है, उनके लिए यह अच्छा कदम होगा लेकिन बड़ा फायदा नहीं दिखेगा। जो सबसे निचले टैक्स के दायरे में हैं, उन्हें शायद कोई फायदा नहीं दिखे। कुल मिलाकर कहें तो इस तरह की घोषणाएं अखबारों की सुर्खियां तो बनेंगी, लेकिन इससे किसी की जिंदगी नहीं बदलेगी।

धारा 80-सी की सीमा बढ़ाए जाने का उन लोगों पर बड़ा असर होगा, जिन्होंने चालू वित्त वर्ष (2019-20) के लिए टैक्स बचत संबंधी कोई तैयारी नहीं की है। लगभग हर करदाता टैक्स बचाने के लिए 80-सी का पूरा उपयोग कर लेना चाहता है। इस धारा की सबसे अच्छी बात यह है कि इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) फंड्स के माध्यम से इस धारा के तहत किए गए सभी निवेश किसी को भी लंबे समय का निवेशक बनने का एक जरिया प्रदान करते हैं। जो भी करदाता टैक्स बचाने के लिए ईएलएसएस का उपयोग करते हैं, वे कम से कम तीन वर्षो के लिए अपनी रकम इसमें छोड़ते हैं। तीन वर्षो का यह निवेश कुल मिलाकर लंबी अवधि का ही निवेश कहा जा सकता है। फिर, इस अवधि के बाद उन्हें जिस तरह का आकर्षक रिटर्न मिलता है, वह उन्हें लंबी अवधि का इक्विटी निवेशक बनने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे में 50,000 रुपये की इस अतिरिक्त टैक्स छूट सीमा का लंबी अवधि में बड़ा फर्क पड़ जाता है।

सीधे कहें तो 10 वर्षो की अवधि में कम से कम पांच लाख रुपये की सीधी बचत के अलावा भी परोक्ष रूप से कई ऐसे फायदे मिलते हैं, जो बुढ़ापे के सुकून और खुशी के लिए बेहद लाभकारी हो सकते हैं। मेरे विचार से टैक्स बचत के इस 80-सी उपकरण में सबसे बड़ा सुधार यह हो सकता है कि इसकी निवेश संबंधी प्रकृत्ति को बदल दें और खर्च की गुंजाइश ही खत्म कर दें। ऐसे खर्चो में बच्चों की पढ़ाई पर किया गया खर्च सबसे प्रमुख है। मैं यह कतई नहीं कह रहा कि बच्चों की स्कूल या कॉलेज की फीस को टैक्स बचत के दायरे से बाहर कर दें। मैं सिर्फ इतना कह रहा हूं कि उन्हें टैक्स से छूट वाली कैटेगरी में रहने दें, लेकिन उसे 80-सी में शामिल नहीं करें। असल में 80-सी का पूरा मकसद बचतकर्ताओं में निवेश की आदत को बढ़ावा देना था। यही बात टर्म इंश्योरेंस के लिए भी सच है।

मैं पिछले कई वर्षो से रोज ऐसे सैकड़ों लोगों से मिलता रहा हूं, जो या तो पर्याप्त बचत नहीं कर पाते या अपनी पूंजी गलत तरह की बचत योजनाओं में फंसा लेते हैं। हो सकता है कि मैं उन्हीं लोगों से बहुत ज्यादा प्रभावित हो गया होऊंगा। लेकिन मैं शिद्दत से महसूस करता हूं कि अगर टैक्स नीतियों का उपयोग कर व्यक्तियों में बचत को बढ़ावा देने के उपाय किए जा सके, तो यह इस वर्ष के बजट की सबसे सकारात्मक बातों में एक होगी।

(लेखक वेल्यू रिसर्च के सीईओ हैं।)

Posted By: Pawan Jayaswal

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