नई दिल्ली, धीरेंद्र कुमार। पिछले कुछ महीनों में मैंने निवेशकों को विरोधाभासी लगने वाली कई बातें कही हैं। इसकी वजह यह है कि बीते कुछ दशकों के दौरान मैंने शेयर बाजारों में इतनी अजीबोगरीब चीजें होती देखी हैं, जिनका सहज अंदाजा लगा पाना बेहद मुश्किल रहा है। एक तरफ तो मैंने चार्ली मंगर जैसे व्यक्तित्व का हवाला देते हुए यह कहा कि शेयर बाजारों में अभी कुछ नहीं करने का समय है। दूसरी तरफ, इस आलेख में मैंने यह भी कहा है कि अगर आप एसआइपी योजना का हिस्सा हैं और अभी तुरंत रकम की जरूरत नहीं है, तो निवेश जारी रखिए। सवाल यह है कि एक निवेशक के तौर पर आपको क्या करना चाहिए। एक महीना पहले जब शेयर बाजारों का यकायक लुढ़कना अपने चरम पर था, तब मैंने यह उम्मीद कतई नहीं की थी कि मई की शुरुआत में मैं निवेशकों को अपने आलेखों के माध्यम से बेहद सकारात्मक या उत्साही होने के खिलाफ चेतावनी दे रहा होऊंगा। 

पिछले कई दशकों के दौरान मैंने शेयर बाजारों में एक से एक अजीब चीजें होती देखी हैं। लेकिन सच कहूं तो अप्रैल के महीने में शेयर बाजारों में उछाल शायद सबसे हैरान करने वाली और अजीब चीज है। यह कहने का कोई मतलब नहीं कि मार्च में शेयर बाजार इतने गिर गए थे कि अप्रैल के दौरान उनमें उछाल आना अवश्यंभावी था। इस तरह के तर्कों के उत्तर में मैं एक ही सवाल करता हूं। वह यह कि कोई यह कैसे जान सकता है। इस वक्त यह कहने में कोई दिक्कत नहीं कि हम बिल्कुल बदले माहौल में आ चुके हैं। ऐसे माहौल में, जहां पड़ोस की किराना दुकान से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक हर स्तर पर माहौल बिल्कुल अलग तरह का है। बहरहाल, यह सब कहने-सुनने के बावजूद जब मैं पिछले दो महीनों के दौरान अपनी कही बातों पर गौर करता हूं, और यह देखता हूं कि पाठकों की उन पर क्या प्रतिक्रिया रही है, तो यह साफ झलकता है कि कई बातों में विरोधाभास है।  

एक तरफ मैंने यह कहा है कि शेयर बाजार में इस वक्त कई ऐसी अच्छी कंपनियां हैं जिनके दाम निवेश के लायक हैं। वैसे निवेशक जिनकी एसआइपी की अवधि चल रही है और उन्हें तुरंत पैसे की जरूरत भी नहीं है, उनके लिए बेहतर यही होगा कि वे अपनी एसआइपी जारी रखें। असल में ऐसा कहने का मतलब यह है कि वे निवेश जारी रखें। लेकिन ठीक पिछले सप्ताह मैंने जो लिखा वह इसके बिल्कुल विपरीत है। पिछले सप्ताह के कॉलम में मैंने लिखा था कि फिलहाल निवेशकों को कुछ नहीं करना चाहिए। इसके लिए मैंने एक ऐसे व्यक्ति का उदाहरण दिया था, जिसे निवेशक के तौर पर पूरी दुनिया जानती है। वह हैं बर्कशायर हैथवे के वाइस चेयरमैन चार्ली मंगर।  

दुनियाभर में लाखों संपत्तियों के दाम इस वक्त अपने निचले स्तर पर हैं। और वारेन बफेट व चार्ली मंगर इस वक्त 12,500 करोड़ डॉलर यानी नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक के नकदी भंडार पर बैठे हैं। वे चाहें तो इस वक्त दुनिया में कोई भी संपत्ति खरीद सकते हैं। लेकिन दुनिया की कोई भी संपत्ति उन्हें ललचाने में विफल रही है। जैसा कि मंगर ने कहा भी कि मौजूदा परिस्थिति बिल्कुल अलग है। हर कोई ऐसे बात करता है जैसे वह सबकुछ जानता हो। लेकिन हकीकत यह है कि कोई कुछ भी नहीं जानता। उनकी इस बात से कौन असहमत होगा। ऐसे में यह सवाल बेहद वाजिब है कि कोई करे तो क्या करे। दूसरी तरह से कहें तो कुछ भी करने की जरूरत क्या है। इस बारे में मैं यह कहना चाहूंगा कि बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं जो इस 'कुछ नहीं करना चाहिए' के फ्रेमवर्क से बाहर होती हैं। वे बहुत केंद्रित या खास होती हैं। एसआइपी उन्हीं में से एक है जो इस कुछ नहीं करना चाहिए के दायरे से बाहर है। अगर आपको तुरंत रकम की जरूरत नहीं है और आपकी एसआइपी चल रही है, तो ऐसे समय में भी बेहतर यही है कि उसे चलने देना चाहिए।  

यहां कुछ नहीं करने का संदेश भी यही है कि ऐसी योजनाओं को रोकिए मत, उसे चलने दीजिए। लंबी अवधि तक चलने वाली एसआइपी विशेष तरह के मामले हैं, ऐसा मैंने इसलिए कहा क्योंकि भविष्य में बेहतर कमाई के लिए एसआइपी को ऐसे ही मौकों की दरकार रहती है। एसआइपी का तो कुल गणित ही इस तर्क पर चलता है कि जब शेयरों के दाम गिरे हों और नेट असेट वैल्यू यानी एनएवी निचले स्तर पर हो तो आपको निश्चित मासिक रकम में खरीदारी के लिए ज्यादा यूनिट मिल जाएंगे। उसके बाद जब बाजारों में उछाल दिखता है तो आपको स्वाभाविक रूप फायदा होगा। लेकिन गिरते बाजार के दौर में अगर आप एसआइपी को बंद कर देते हैं, तो फायदे के इस मौके को पूरी तरह गंवा बैठेंगे। इसलिए ऐसा मत कीजिए।  

हालांकि, ऐसे माहौल में एक और उपाय ऐसा है, जो कुछ काम का लगता है। वह यह कि अगर आपने बीते दिनों अपने निवेश को लेकर कोई गलती की है, तो उसे सुधारने का यह सही समय है। मसलन, आपने इक्विटी बाजार में बहुत ज्यादा निवेश कर रखा हो और आने वाले कुछ समय के दौरान आपको इनमें से कुछ रकम की जरूरत हो। या, एक गलती यह हुई हो कि आपने अपने हाथ में आपातकालीन फंड रखना अब तक जरूरी नहीं समझा हो। या फिर आपात स्थिति में आपको ऐसा लगा हो कि अब तक आपने स्वास्थ्य बीमा या दुर्घटना बीमा नहीं लेकर कोई गलती की हो। यह जरूरी है कि आप उन गलतियों को ऐसे वक्त में जल्द से जल्द दुरुस्त कर लें।  

इसके लिए आपकी लंबी अवधि की योजनाओं में भले ही कोई फेरबदल करनी पड़े तो कीजिए। पिछले कुछ सप्ताह के दौरान बहुत से लोगों ने इक्विटी बाजार से आहिस्ता-आहिस्ता निकल जाने के महत्व को समझा है। बहुत से लोगों ने पिछले वर्षो के दौरान इक्विटी बाजार में निवेश किया हुआ था और इसी उम्मीद से किया हुआ था कि वर्ष 2020 या 2021 में उन्हें रकम की जरूरत होगी। उनके लिए बेहतर यह होता कि चरणबद्ध निवेश योजना यानी एसआइपी की तरह पर ही वे दो-तीन वर्ष पहले चरणबद्ध निकासी योजना यानी एसडब्ल्यूपी पर काम शुरू कर देते, ताकि अंतिम क्षणों में इस तरह के चैंकाने वाले नतीजों से सुरक्षित रहते। अगर आपने भी यही किया है और आपको दो-तीन वर्षो के बाद उसकी जरूरत हो सकती है, तो आप भी एसडब्ल्यूपी की तर्ज पर उसकी निकासी शुरू कर दीजिए। आप खुद को खुशकिस्मत मानिए कि इस वर्ष अप्रैल में भी शेयर बाजारों में उछाल दिखा है। अभी भी वक्त गया नहीं है। अगर आपने लंबी अवधि के लिए कुछ भी निवेश किया हो, तो वह निवेश इक्विटी से बाहर होना चाहिए।

(लेखक वैल्यू रिसर्च के सीइओ हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)

Posted By: Ankit Kumar

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