नई दिल्‍ली, प्रकर्ष गगदानी। कोविड-19 महामारी ने हमारे काम करने के तौर-तरीकों और अपने साथियों, दोस्तों और व्यवसायों के साथ बातचीत करने के तरीकों को भी पूरी तरह बदल दिया है। हालांकि, आम तौर पर यही कहा जाता है कि हर विपरीत परिस्थिति में भी कोई न कोई अवसर छिपा होता है। आज देशभर में तेजी से चलाए गए टीकाकरण अभियान और सरकार द्वारा कोविड की रोकथाम संबंधी उठाए गए उपायों के कारण, भारतीय अर्थव्यवस्था वापस अपनी पटरी पर लौट रही है। इस तरह के परिदृश्य की पृष्ठभूमि में आज हम ऐसे सेगमेंट्स की चर्चा करते हैं, जिनमें निवेशकों को निवेश के आकर्षक अवसर हासिल होते हैं।

थीम 1- उपभोग

भारत अब अत्यधिक आकांक्षी बनता जा रहा है। न केवल खपत बढ़ रही है, बल्कि खपत का पैटर्न भी बदल रहा है। पिछले 10 वर्षों में, भारत में घरेलू खपत साल-दर-साल 13 प्रतिशत की दर से बढ़कर 2019 में 120 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गई। बुनियादी जरूरतों के अलावा, लोग अब स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, जीवन शैली, शिक्षा और अवकाश पर भी पैसा खर्च कर रहे हैं। हालांकि महामारी ने उपभोग चक्र में रुकावट पैदा की, लेकिन यह दीर्घकालिक संरचनात्मक परिवर्तन की बजाय एक अस्थायी झटका था। ऐसे कई कारक हैं जो महामारी के बाद खपत को बढ़ाने वाले हैं। सबसे पहले, लोगों की आमदनी में एक मजबूत वृद्धि नजर आ रही है, जो मध्यम वर्ग के विस्तार के साथ भी मेल खाती है। दूसरा, टैक्नोलॉजी लोगों और व्यवसाय को कई तरीकों से जोड़ने का काम कर रही है और सूचना, सेवाओं और उत्पादों के बेहतर आदान-प्रदान को सक्षम कर रही है। और तीसरा, भारतीय आबादी बहुत विविध है और लोगों की अनेक किस्म की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है। इन सभी कारकों के एक साथ होने से आने वाले वर्षों में खपत को बढ़ावा मिलने की संभावना है। जैसे-जैसे हम महामारी से बाहर निकलते हैं, खपत बढ़ने की संभावना है और इसका कई क्षेत्रों और उद्योगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे निवेश के आकर्षक अवसर मिलते हैं।

थीम 2- बैंकिंग

यह सर्वविदित है कि बैंकिंग क्षेत्र आर्थिक विकास को गति प्रदान करता है। यह अर्थव्यवस्था में सेतु का काम करता है। यह आपके और हमारे जैसे खुदरा ग्राहकों को अपने पैसे को बचत खातों में सुरक्षित रखने में मदद करता है और उनके निवेश उत्पादों के माध्यम से निवेश करने और रिटर्न उत्पन्न करने के अवसर भी प्रदान करता है। साथ ही, जो धन आप बैंकों में रखते हैं, वह उन कॉरपोरेट्स को उधार दिया जाता है, जिन्हें विस्तार और विकास के लिए धन की आवश्यकता होती है और उन खुदरा ग्राहकों को भी, जो संपत्ति खरीदना चाहते हैं। ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस (जीएफसी) के बाद, अधिकांश बैंकों को संपत्ति की गुणवत्ता के मुद्दों से निपटना पड़ा, जो कि उनकी लोन बुक के गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में परिवर्तित होने के अनुपात से उपजा था। हालांकि, अच्छी बात यह है कि आज की स्थिति में कई बैंकों ने या तो अपने ऋण बहीखाते को साफ़ कर दिया है या अधिकांश पुराने एनपीए के लिए प्रावधान किए हैं। इस प्रकार वे एनपीए के कारण उपजे हालात से बाहर निकलकर आगे बढ़ रहे हैं और उभरते अवसरों को भुनाने के लिए बेहतर स्थिति में नजर आ रहे हैं। इस लिहाज से चीजें भी रफ्तार पकड़ रही हैं। मेटल, फार्मास्यूटिकल्स, बिजली, सीमेंट, वस्त्र आदि जैसे क्षेत्रों में पहले से ही नयापन देखने को मिल रहा है। आर्थिक गतिविधियों में तेजी और मांग और वृद्धि में सुधार के साथ, कंपनियों के भविष्य के विकास और विस्तार योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना है। इससे पूंजीगत व्यय और ऋण की मांग में वृद्धि होगी।

थीम 3- आईटी और डिजिटल

यह एक ऐसा विषय है जिसे केवल अपने जोखिम पर ही अनदेखा किया जाना चाहिए। दुनिया बदल रही है और इस बदलाव का एक बड़ा हिस्सा टैक्नोलॉजी और डिजिटल सॉल्यूशंस के कारण संभव हो रहा है। टैक्नोलॉजी और डिजिटल सॉल्यूशंस का महत्व इतना बढ़ता जा रहा है कि ऐसा माना जाता है कि भविष्य में सिर्फ वे कंपनियां ही जीवित रह पाएंगी और आगे बढ़ पाएंगी, जो अनिवार्य रूप से डिजिटलीकरण को अपनाने के लिए तैयार होंगी। भारतीय आईटी कंपनियां क्लाउड, ब्लॉकचेन आदि जैसी नई और उभरती टेक्नोलॉजी की क्षमता का दोहन करने के लिए खुद को फिर से स्थापित कर रही हैं। जैसे ही कंपनियां इन समाधानों को अपनाना शुरू करती हैं, भारतीय आईटी स्थायी विकास के चरण में आगे बढ़ सकता है, जिससे निवेश के अच्छे अवसर हासिल हो सकते हैं।

हालांकि, उपरोक्त तीन विषय निकट भविष्य में अच्छी तरह से काम करने की संभावना रखते हैं, लेकिन इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि आप इन थीम के साथ किस तरह पेश आते हैं। निवेशक या तो चुनिंदा शेयरों में निवेश कर सकते हैं या म्युचुअल फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में से चुन सकते हैं जो इन थीम पर आधारित हैं। इसके अलावा, डिजिटल थीम को भुनाने के इच्छुक निवेशक ऐसे अंतरराष्ट्रीय म्युचुअल फंड में भी निवेश कर सकते हैं जो इस एक्सपोजर की पेशकश करते हैं। यहां तक कि जब आप अपने पोर्टफोलियो को पुनर्व्यवस्थित करते हैं, तो आपको यह याद रखना चाहिए कि चयन और जोखिम कम करना एक महत्वपूर्ण पहलू बना रहेगा।

(लेखक 5पैसा डॉट कॉम के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं। निवेश करने से पहले अपने निवेश सलाहकार की राय अवश्‍य लें।)

Edited By: Manish Mishra