नई दिल्ली, वैभव शाह। बैंकिंग और पीएसयू फंड डेट फंड स्कीम होती हैं। ये बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) और पब्लिक फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन ( PFI) की ओर से जारी डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। सेबी के म्यूचुअल फंड वर्गीकरण निर्देशों के मुतबिक बैंक और पीएसयू फंड को अपनी 80 फीसदी रकम का निवेश इस तरह के इंस्टीट्यूशन की ओर से जारी डेट इंस्ट्रूमेंट्स में करना होता है।

बैंकिंग और पीएसयू फंड कैसे काम करते हैं?

1. बैंकिंग और पीएसयू फंड को अपना 80 फीसदी निवेश बैंकों, पीएसयू और पीएफआई की ओर जारी डेट इंस्ट्रूमेंट्स में करना होता है।

2. फंड मैनेजर के पास यह विकल्प रहता है वह यील्ड के नजरिये से आकर्षक अवधि चुन कर निवेश कर सकते हैं।

3. बैंकिंग और पीएसयू फंड के फंड मैनेजर इनके इंटरेस्ट आउटलुक के हिसाब से निवेश के लिए सक्रिय समय का चुनाव करते हैं। अगर इंटरेस्ट रेट आउटलुक उनके पक्ष में लगता है तो बैंकिंग और पीएसयू फंड अपनी अवधि बढ़ाते हैं। या फिर ये दोनों चीज आपस में अदल-बदल होती हैं। फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज की कीमतें ब्याज दरों में परिवर्तन के उलट होती हैं। डेट इंस्ट्रूमेंट की अवधि जितनी लंबी होगी,यह ब्याज दर परिवर्तन के लिहाज से उतना ही संवेदनशील होगी।

4. क्रेडिट रिस्क: बैंक, पीएसयू और पीएफआई की ओर से जारी डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स अमूमन काफी हाई क्रेडिट क्वालिटी के होते हैं। पीएसयू और कुछ पीएफआई सरकारों के होते हैं। इससे डेट और मनी मार्केट सिक्योरिटी को अदर्ध संप्रभु (सोवरेन) दर्जा मिलता है। चूंकि इनका क्रेडिट जोखिम काफी कम होता है । इसलिए बैंक और पीएफआई ( सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों के) की क्रेडिट रेटिंग काफी ऊंची होती है। इसकी वजह यह है कि ये ऐसी इकाइयां होती हैं जो नियमन के दायरे में आती हैं और उनके पास पर्याप्त पूंजी होती है।

बैंकिंग और पीएसयू फंड पर टैक्स देनदारी

अगर आप इनमें तीन साल से कम समय तक निवेश करते हैं तो कैपिटेल गेन आपकी आय में जुड़ जाएगा और इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक इस पर टैक्स लगेगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स ( तीन साल से ज्यादा समय तक निवेश करने पर मिला रिटर्न) इंडेक्सेशन बेनिफिट के बाद 20 फीसदी लगता है। बैंकिंग और पीएसयू फंड की ओर से दिया जाने वाला डिविडेंड (इसे इनकम डिस्ट्रीब्यूशन सह विड्रॉल भी कहते है) आपकी आय में जुड़ जाएगा और आप पर लगने वाली इनकम टैक्स दर के हिसाब से इसमें टैक्स लगेगा।

अभी इनमें क्यों निवेश करना चाहिए?

यूएस ट्रेजरी बॉन्ड अब भी निचली दरों पर चल रहे हैं क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें अभी भी शून्य फीसदी पर हैं और यह अपने बॉन्ड खरीद कार्यक्रम को जारी रखे हुए है। लेकिन इस बात के संकेत मिल रहे हैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रिकवरी के संकेत मिलते ही फेडरल रिजर्व अपनी उदार मौद्रिक नीति को समेटने लगेगा। जैसे-जैसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था सुधरेगी फेडरल रिजर्व का जोर ग्रोथ की बजाय महंगाई नियंत्रण पर होगा। लिहाजा अमेरिका में ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड मध्यावधि में बढ़ने लगेंगी। इसका असर भारत के गवर्नमेंट सिक्योरिटीज ( G-Sec) के यील्ड पर पड़ेगा।

दस साल के गवर्नमेंट सिक्योरिटीज का यील्ड अभी यहां दस साल के निचले स्तर पर और जल्द ही इसमें एक समय ऐसा आएगा कि यह बढ़ सकता है। यील्ड के साथ बॉन्ड कीमतें का संबंध उल्टा होता है। जब यील्ड बढ़ता है तो बॉन्ड की कीमतें घटती है। लंबी अवधि के बॉन्ड छोटी अवधि की बॉन्ड कीमतों की तुलना में ज्यादा मूल्य संवेदी होते हैं। बैंकिंग और पीएसयू फंड अवधि के मामले में लचीले होते हैं। ये फंड इंटरेस्ट रेट के अपने आउटलुक के आधार पर अवधि के बारे में सक्रिय फैसला लेते हैं। अगर ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद होती है तो बैंकिंग और पीएसयू फंड इंटरेस्ट रेट रिस्क घटाने के लिए अवधि छोटी कर देते हैं। वे उस समय निवेश करते हैं जब क्रेडिट स्प्रेड आकर्षक होते हैं। इस तरह वे रिस्क और रिटर्न का अंदाजा लगा कर निवेश करते हैं इसके अलावा बैंकिंग और पीएसयू फंड में क्रेडिट रिस्क कम होता है। क्योंकि इन स्कीमों में अंडरलाइंग सिक्योरिटीज के जारीकर्ता की क्रेडिट रेटिंग ऊंची होती है।

किसे निवेश करना चाहिए

1. ऐसे निवेशकों को जो आय के साथ पूंजी बढ़ाना चाहते हैं खास कर तब जब ब्याज दरों का माहौल सकारात्मक हो।

2. ऐसे निवेशक जो हल्का जोखिम ले सकते हैं।

3. ऐसे निवेशक जो अपना निवेश तीन साल तक जारी रख सकते हैं।

4. निवेशकों को बैंकिंग और पीएसयू फंड्स में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर्स से सलाह-मशविरा कर लेना चाहिए। उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि क्या ये उनकी निवेश जरूरतों के मुफीद हैं।

डेटा स्रोत : ब्लूमबर्ग और ACE MF, 31 मई 2021 के मुताबिक

(लेखक मिरे एसेट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स में प्रोडक्ट, मार्केटिंग और कम्युनिकेशन विभाग के प्रमुख हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं। निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह अवश्‍य लें। किसी भी तरह के वित्तीय नफा-नुकसान के लिए दैनिक जागरण जिम्मेदार नहीं होगा।)

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