नई दिल्ली, धीरेंद्र कुमार। आजादी के 75वें साल में हर तरफ आजादी का खुमार है। ऐसे में मुझे लगा कि इसी थीम यानी फाइनेंशियल फ्रीडम या वित्तीय आजादी पर बात करनी चाहिए, क्योंकि आजादी और पर्सनल फाइनेंस के बीच बड़ा गहरा रिश्ता है। वित्तीय आजादी हासिल करना हम सबके लिए एक अहम लक्ष्य है, क्योंकि इसका अभाव बड़ी परेशानी का सबब बन सकता है। अन्य आजादी की तरह ही वित्तीय आजादी को लेकर जागरूकता तभी पैदा होती है, जब इसका अभाव होता है। यानी वित्तीय दासता वो है जिसे महसूस किया जाता है मगर वित्तीय आजादी इससे अलग है।

आजादी कई तरीके की हो सकती है जैसे कि राजनीतिक आजादी, या फिर खराब सेहत से आजादी। इसी तरह वित्तीय आजादी के भी कई स्तर हैं। इसका सबसे ऊंचा दर्जा वो है, जब आपको बाकी जिंदगीभर कमाने के लिए कुछ नहीं करना पड़े। इस दर्जे को हासिल करने के लिए हममें से ज्यादातर लोगों को अपनी पूरी जिंदगी खपानी पड़ती है। सिवाय उन चंद लोगों के जिन्हें विरासत में संपत्ति मिलती है या फिर वो, जिन्हें हम जैसे करदाताओं के पैसों से कोई पेंशन या सामाजिक सुरक्षा हासिल हो जाती है।

कोरोना संकट के दौरान एक अच्छी बात यह उभरकर सामने आई कि मुश्किल दौर में बहुत से लोगों ने एहसास किया कि थोड़ी सी भी वित्तीय आजादी बड़े काम आती है। अप्रैल 2020 के बाद बड़े पैमाने पर लोगों ने नौकरी और काम-धंधे को लेकर मुश्किलों का सामना किया। जिन लोगों ने करियर की शुरूआत में ही बचत शुरू कर दी थी, वे दिमागी तौर पर थोड़ा कम परेशान रहे। जिन लोगों ने बचत और निवेश को लेकर बुनियादी बातों पर अमल किया था, उन्होंने इस दौर का सामना बेहतर तरीके से किया। बुनियादी बातों से मेरा मतलब हेल्थ कवर, टर्म इंश्योरेंस कवर, ईएमआइ, और एक या दो वर्षो के खर्च के लिए जरूरी रकम को बचाकर रखने से है। जिन लोगों ने अपने लिए कम से कम इतना किया इंतजाम किया हुआ है वे जीवन में किसी भी परेशानी का सामना कर सकते हैं।

आपके पास अच्छी बचत हो, इसके लिए पहला कदम है कि आप बचत करें। दूसरा कदम है कि यह बचत आपकी जरूरतें पूरी करने में सक्षम हो। हम में से बहुत से लोग, कमाने के बाद कई वर्षों बाद तक भी बचत शुरू ही नहीं करते हैं। वे खाओ-पीयो-मौज करो के सिद्धांत पर चलते हैं। फिर, मौजूदा दौर में वित्तीय आजादी के लिए बचत शुरू करना आसान भी नहीं है। लेकिन इसके लिए जितनी जल्दी हो सके, आपको बचत शुरू करनी ही होगी और ये बचत आपकी जरूरतों के हिसाब से होनी चाहिए।

वित्तीय आजादी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें कुछ ऐसे काम हैं, जो आपको नहीं करने हैं। ये काम, किए जाने वाले कामों के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। यह खुद आपको देखना होगा कि इनमें से आपके लिए क्या करने और क्या नहीं करने लायक है : शार्ट टर्म इक्विटी ट्रेडिंग, उधार लेकर निवेश करना, टर्म प्लान के अलावा कोई और लाइफ इंश्योरेंस खरीदना, बिटकाइन और क्रिप्टो से जुड़ी कोई भी चीज खरीदना, नए फंड या नए इक्विटी शेयर इश्यू में निवेश, म्यूचुअल फंड और इक्विटी प्रोडक्ट के अलावा किसी और चीज में निवेश, बाजार की तेजी में निवेश खरीदना और गिरते वक्त बेचना, केवल अग्रेसिव असेट जैसे कि इक्विटी में ही निवेश करना या निवेश नहीं करना।

कुछ लोगों को महसूस होगा कि हां ऐसा तो होना ही चाहिए, और कुछ लोगों के लिए ये बातें चौंकाने वाली हो सकती हैं। इन सभी बातों को जानने का तब तक कोई खास मतलब नहीं है, जब तक आप इसे अपना नहीं लेते और जीवन भर इस पर अमल नहीं करते। अगर आप कम उम्र में बचत करना शुरू कर देते हैं तो वित्तीय आजादी का लक्ष्य थोड़ी आसानी या मुश्किल से आप हासिल कर सकते हैं, लेकिन इसे हासिल करना है या नहीं, यह फैसला आपको ही करना है।

(लेखक वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन डॉट कॉम के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)

Edited By: Ankit Kumar