नई दिल्‍ली, ज्योति रॉय। कैपिटल मार्केट अर्थव्यवस्था के विकास और फाइनेंशियल सिस्टम को बढ़ावा देने में मुख्य भूमिका निभाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए मौजूदा समय में कैपिटल मार्केट में निवेश की कमी है और ऐसे कई बेहतरीन विकल्प उपलब्‍ध हैं, जिनका लाभ निवेशक उठा सकते हैं।

युवा और नए निवेशकों के लिए अभी स्टॉक मार्केट में निवेश का सबसे अच्छा समय है। अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस के कारण हुए वैश्विक आर्थिक संकट से जूझ रही है, जिससे भारतीय बाजारों में करेक्शन का समय है। मेडिकल साइंटिस्ट का मानना है कि जैसे-जैसे हम गर्म मौसम की ओर बढ़ेंगे कोरोना वायरस की समस्या हल हो जाएगी। इससे कारण मौजूदा बाजार निवेशकों को एंट्री लेने का अच्छा अवसर दे रहा है। 

जब हम पिछले कुछ दशक के बाजार पर नजर डालते हैं, तो हमें बाजार कई सफलता की कई कहानियां देखने को मिलती हैं। यहां तक कि 2009 के वित्तीय संकट के बाद से अब तक के छोटे अंतराल को भी देखें तो कई ऐसे स्मॉल व मिड कैप स्टॉक हैं, जिन्होंने लार्ज कैप बनने के दौरान कई गुना मुनाफा दिया है। यही बात हमें मूल प्रश्न की ओर ले जाती है कि स्टॉक मार्केट में पैसे कैसे लगाएं।

बजट सोच-समझकर तय करें

इसमें कोई दोराय नहीं है कि स्टॉक में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इसीलिए जरूरी चीजों के लिए की गई बचत के पैसों का निवेश मार्केट में नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार अपने बच्चों की पढ़ाई का फंड या अपनी डाउन पेमेंट के पैसों को मार्केट में न लगाएं। अपनी बचत के पैसों का हिसाब लगाएं और इन्हें विभिन्न विकल्पों में निवेश करें, जिनमें अलग-अलग प्रकार के जोखिम और रिटर्न हों। टेक्नोलॉजी यहां भी आपके काम आएगी। कई स्मार्टफोन एप्लीकेशन बजटिंग टूल के साथ आती हैं जो आपकी बचत को विभिन्न विकल्पों में निवेश की सलाह देती हैं और इस प्रकार और कम जोखिम लेते हुए अच्छा निवेश कर सकते हैं।

एग्जिट प्लान तैयार रखें

निवेशक एग्जिट प्लान तैयार न कर एक बड़ी गलती करते हैं। मार्केट से कब एग्जिट करना है, इसके बारे में पता न होने से निवेश का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। मार्केट हमेशा ही आकर्षित या भयभीत करेगा। इसके बावजूद अपनी योजना पर टिके रहें और जब आपको लगे कि आपके निवेश का उद्देश्य पूरा हो गया है तो एग्जिट करें। 

रिसर्च करें

शेयर मार्केट के बारे में सबकी अपनी अलग राय होती है और बेहतर व व्यावहारिक सुझाव हासिल करना मुश्किल होता है। इसीलिए निवेशक को अपनी रिसर्च करना आवश्यक हो जाता है। कंपनी के बारे में रिसर्च करते समय कुछ प्रमुख कारक जिन पर गौर किया जाना चाहिए, इस प्रकार हैं:

ग्रोथ और नॉन-साइक्लिकैलिटी का कॉम्बिनेशन

पूरे इकोनॉमिक व मार्केट में ग्रोथ एक प्रमुख कारक जो स्टॉक मार्केट में वैल्यू बनाता है। जहां मार्केट ग्रोथ को वैल्यू देता है वहीं ग्रोथ की निरंतरता ज्यादा बेहतर प्रीमियम देती है। स्टॉक मार्केट में लॉन्ग टर्म में बेहतर मुनाफा देने वाली अधिकतर कंपनियों की नॉन साइक्लिकैलिटी बिज़नेस में ग्रोथ बेहतर होती है। पारंपरिक कॉमोडिटी बिज़नेस जैसे स्टील, एल्युमिनियम या तेल में ऐसा मुनाफा कम ही होता है।   

कम डेट और ज्यादा एसेट आधारित बिज़नेस मॉडल कमाई की कुंजी

मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर व यूटिलिटी जैसे सेक्टर में मल्टी बैगर्स ढूंढना मुश्किल होता है क्योंकि इनके बिज़नेस मॉडल में ज्यादा कैपिटल की जरूरत होती है और डेट में इजाफा होता है और रिटर्न रेशियो कम मिलता है। ज्यादा डेट के कारण आर्थिक स्थिति खराब होने पर दिवालियापन का जोखिम ज्यादा होता है। यह जरूरी नहीं है कि जीरो डेट वाली कंपनियों को ही चुना जाए, क्योंकि थोड़ा उधार कंपनी की स्थिति को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ अत्यधिक उधार शेयरहोल्डर की पूरी वैल्यू खत्म कर सकता है। 

कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उच्च मानक

मार्केट बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस को हमेशा सराहता है और बेहतर प्रीमियम देता है। अच्छी कॉर्पोरेट गवर्नेंस वाली कंपनियों के कुछ प्रमुख लक्षण होते हैं:

छोटे शेयरहोल्डर्स को ध्यान में रखकर मैनेजमेंट रूपरेखा तय करती है। शेयरहोल्डर्स संबंधी जानकारी को जाहिर करने को लेकर उच्च मानक तय होते हैं। नारायण मूर्ति ने इस बात का बहुत अच्छा सार निकालते हुए कहा है “जब भी कोई संशय हो, सभी बातें सामने लाओ”।

जरूरी नहीं है कि अच्छी कंपनी खरीदने के लिए हमेशा अच्छा स्टॉक हो

लंबी विरासत वाली कोई बड़ी कंपनी जरूरी नहीं है कि हमेशा अच्छा स्टॉक हो। यह इसलिए क्योंकि कई बार कंपनी का प्राइज और फ्यूचर ग्रोथ इसकी वैल्यूएशन के साथ मेल नहीं खाते हैं। पीईजी रेशियो (पीई रेशो को सब्स्टेंशियल ग्रोथ से विभाजित करने पर) कंपनी की वैल्यूएशन और ग्रोथ की तुलना करने का आसान तरीका है। 

खैर, इसके अलावा निवेशकों को अन्य मानकों पर भी ध्यान देने की जरूरत है, जैसे रिटर्न रेशियो और ब्रांड जो कंपनी की वैल्यूए्रशन तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। हालांकि, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ऊपर बताए गए पैरामीटर निवेशकों को मल्टी बैगर चुनने में हमेशा कारगर हैं, लेकिन ये ऐसी कंपनियों की छटनी करने में जरूर सहायक हैं, जिनमें निवेश करने से बचना चाहिए।

(लेखक डीवीपी इक्विटी रणनीतिकार, एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

Posted By: Manish Mishra

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