किसी बहस को मुकम्मल होने के लिए कितने समय की जरूरत होती है। आप कहेंगे कि कुछ घंटे। हो सकता है कि कुछ दिन या महीने तक भी कोई बहस चल जाए। लेकिन क्या ऐसा संभव है कि कई सदी बीत जाने पर भी किसी बात पर एकमत ना हुआ जा सके? चौंकिए मत, सोने में निवेश एक ऐसा ही मुद्दा है। बड़ी-बड़ी चर्चाओं के बाद भी यह प्रश्न अनुत्तरित बना हुआ है कि सोना निवेश के लिहाज से सही है या नहीं।

सोना हर भारतीय परिवार का अहम हिस्सा माना जाता है। सोने को लेकर एक पारंपरिक की सोच है कि यह साधारण और बहुत काम का निवेश है, बुरे वक्त का सहारा है और हर परिवार को सोने में निवेश करना चाहिए। इस धारणा को मानने वाले सोचते हैं कि सोने को आसानी से बेचकर पैसा मिल सकता है। यही नहीं, इसकी ज्यादा कीमत मिलने की उम्मीद भी रहती है। सोने के बारे में दूसरी और थोड़ा आधुनिक सोच है कि यह भी अन्य कमोडिटी की तरह ही है और बचत के लिहाज से किसी व्यक्ति विशेष के लिए यह ज्यादा फायदेमंद नहीं है।

एक तीसरी सोच भी है, जिसका समर्थन मैं भी करता हूं कि कानूनी तौर पर सोने को निवेश तो माना जा सकता है, लेकिन कुछ कारणों से यह अच्छा निवेश नहीं है। सवाल है कि किसी निवेश को अच्छा या खराब आखिर किन पैमानों पर माना जाता है? इसका सीधा सा जवाब है उससे मिलने वाले रिटर्न, लिक्विडिटी, स्टेबिलिटी और ऐसे ही कुछ अन्य मानकों के आधार पर। आकलन किया जाए तो इन मोर्चो पर सोना कतई खरा नहीं उतरता।

सवाल यह भी है कि क्या केवल रिटर्न ही वह कारण है, जिसके आधार पर सोने को अच्छा निवेश नहीं माना जा सकता। ऐसा नहीं है। रिटर्न के अतिरिक्त भी कुछ कारण है, जिनकी वजह से सोने को अच्छा निवेश नहीं कहा जा सकता। सोना ऐसी श्रेणी का निवेश है, जिससे कुछ भी उत्पादित नहीं होता। इसके मूल्य में वृद्धि की अवधारणा केवल इस सोच पर टिकी है कि बेचते समय कोई उसके लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार होगा।

इक्विटी, बांड या अन्य जमा योजनाओं से इतर सोने में लगने वाला पैसा अर्थव्यवस्था में कोई योगदान नहीं देता। उतना ही पैसा किसी कारोबार में या किसी अन्य उत्पादक आर्थिक गतिविधि में लगाकर बेहतर संपत्ति अर्जित की जा सकती है। वह पैसा कई अन्य संदर्भो में भी बढ़ सकता है। वहीं सोने के मामले में ऐसा कुछ नहीं होता। आपने जितना सोना खरीदा, वह उतना ही बना रहेगा। संपत्ति के लिहाज से देखा जाए, तो आपकी संपत्ति जस की तस बनी रहती है। आपका फायदा केवल इस उम्मीद पर है कि जब आप इसे बेचेंगे, तब कोई इसकी ज्यादा कीमत चुकाएगा। कीमत में बहुत बड़ा बदलाव हो, यह भी जरूरी नहीं है।

क्या इस बात का अर्थ है कि किसी को सोने में निवेश नहीं करना चाहिए? मुङो लगता है कि उत्तर एकदम स्पष्ट है। जो लोग वर्तमान वित्तीय व्यवस्था को जान रहे हैं और जिनके पास निवेश के अन्य विकल्प मौजूद हैं, उनके लिए सोने में निवेश का कोई अर्थ नहीं बचता। ऐसे लोग अगर सोने में निवेश करते हैं, तो निसंदेह उसे गलत फैसला ही कहा जाएगा। मेरे विचार से सोने का विकल्प केवल उन्हें चुनना चाहिए, जिनके पास निवेश का अन्य विकल्प नहीं है या जो वर्तमान वित्तीय व्यवस्था पर भरोसा नहीं रखते।

मूलत: सोने को निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक मुद्रा की तरह मानना चाहिए। नोटबंदी के दौरान कई मामले सामने आए थे, जहां किसी गृहिणी ने बड़ी नकदी छुपा कर रखी हुई थी। उस समय अचानक से उस नकदी को जमा कराना उनके लिए चुनौती बन गया था। गृहिणियां ही नहीं, बल्कि कई ऐसे लोग सामने आए थे, जिन्होंने अपनी बचत को नकदी के रूप में रखा हुआ था। ऐसे लोग नकदी की जगह सोना रख सकते हैं। उनके लिए सोना बेहतर विकल्प है। हमारे देश में सोने के और भी प्रयोग होते हैं। आपको कई ऐसे लोग भी मिल जाएंगे जो संपत्ति को टैक्स से बचाने के लिए भी सोने का इस्तेमाल करते हैं।

इन सबके बावजूद अगर आप सोना खरीदना चाहते हैं तो ‘पेपर गोल्ड’ के कई विकल्प उपलब्ध हैं। सोने पर आधारित म्यूचुअल फंड भी हैं, जो सोने की कीमत पर करीब से नजर रखते हैं। अगर आप कम से कम पांच साल के लिए पैसा लॉक करके रखने के लिए तैयार हैं तो भारत सरकार का गोल्ड बांड भी आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। इनका मूल्य सोने की कीमत के साथ बढ़ता है। साथ ही 2.5 फीसद सालाना का अतिरिक्त ब्याज भी इस पर मिलता है। गोल्ड म्यूचुअल फंड से इतर गोल्ड बांड से होने वाला फायदा कर मुक्त भी है। इसकी सीमा प्रति व्यक्ति चार किलो की है, जो किसी सामान्य निवेशक के लिहाज से बहुत है। आज के भाव से देखें तो चार किलो सोना करीब सवा करोड़ रुपये का बनता है।

सोने के प्रति आकर्षण की वजह ऐतिहासिक है। इतिहास और संस्कृति में सोने को जो महत्व दिया गया है, उसे देखते हुए लोग स्वीकार नहीं कर पाते हैं कि सोना निवेश के लिए अच्छा नहीं है। हम सोने को संपत्ति मानते हैं। हम इसे ऐसी मुद्रा मानते हैं, जो हर ऐतिहासिक परेशानी से पार पाने में सफल रही। निसंदेह यह सच है। सोना कीमती है, क्योंकि हर व्यक्ति मानता है कि ये कीमती है। कई लोगों के लिए यह धारणा ही पर्याप्त हो जाती है। हालांकि समझदारी इसी में है कि बिना पूरे सच को जाने सोने में निवेश का फैसला ना लें।

सोना हर भारतीय परिवार का जरूरी हिस्सा है। हर आम-खास परिवार यह मानता है कि सोना अच्छा और आसान निवेश है। बुरे वक्त में सोना काम आता है। लेकिन क्या सच में सोना अच्छा निवेश है? तथ्यों को देखें तो इसका उत्तर ‘नहीं’ मिलेगा। सोने में लगा पैसा अर्थव्यवस्था में कोई भूमिका नहीं निभाता है। सोना किसी निवेश से ज्यादा वैकल्पिक मुद्रा की तरह काम करता है। इसे इसी रूप में लेना बेहतर है।

(इस लेख के लेखक धीरेन्द्र कुमार हैं जो कि वैल्यू रिसर्च के सीईओ है।)

Posted By: Praveen Dwivedi