नई दिल्‍ली, अमर पंडित। हम ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जहां स्टार और रेटिंग का राज है। बॉलीवुड से लेकर क्रिकेट तक लोग लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे मेगा सितारों को लोग पसंद करते हैं। आपको जानकर हैरत हो सकती है कि इन सितारों या रेटिंग का निवेश की दुनिया से क्या संबंध है? म्‍युचुअल फंड का स्टार से काफी गहरा संबंध है, क्योंकि जब निवेश की बात आती है तो हम में से ज्यादातर लोग म्‍युचुअल फंड्स के पिछले साल के प्रदर्शन को काफी तवज्जो देते हैं। हम अपने लिए सबसे ज्यादा रेटिंग वाले या सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले म्‍युचुअल फंड चाहते हैं। 

फाइव स्टार म्‍युचुअल फंड का प्रचार-प्रसार कर वित्तीय सेवाएं देने वाली कंपनी अपनी आक्रामक मार्केटिंग रणनीति से लोगों को इन म्‍युचुअल फंड की परफॉर्मेंस का पीछा करने के लिए लुभा रही है। मैगजीन और टीवी चैनल भी विशेषज्ञों के माध्यम से यह बताने में पीछे नहीं है कि आपको किस तरह से भविष्य में अच्छा फायदा देने वाले म्‍युचुअल फंड में निवेश करना चाहिए। कुछ लोग आसान तरीके से पिछली बार अच्छा प्रदर्शन करने वाले म्‍युचुअल फंड का चुनाव इस उम्मीद में करते हैं कि वह इस साल भी अच्छा परफॉर्म करेंगे।

असल में बेस्ट परफार्मेंस देने वाले फंड की एक या दो साल की सफलता के बाद औंधे मुंह गिरने के बारे में बहुत ज्यादा सुना नहीं गया है। इससे आप यह सवाल पूछ सकते हैं कि ऐसा क्यों होता है। आइए इसके कुछ कारणों की पड़ताल करते हैं:

  • स्टार परफॉर्मिंग स्कीम से अचानक ढेर सारे पैसे आ जाते हैं। इसमें अच्छा फाइनेंशियल रिटर्न मिलता है, जिससे यह सोचना पड़ता है कि इस रकम को कहां लगाया जाए। 
  • मध्यम श्रेणी के उपक्रमों के म्‍युचुअल फंड से बहुत ज्यादा पैसा बटोरने के लिए अवसरों की कमी को देखकर या तो बड़ी कंपनियों के फंड की ओर देखते हैं या उसी कंपनी के और शेयर खरीद लेते हैं।
  • जब कंपनी का कोई प्रमुख प्रोडक्ट मार्केट में अच्छा प्रदर्शन करता है तो म्‍युचुअल फंड हाउसेज इन रिटर्न को लेकर खूब प्रचार करते हैं, परफॉर्मेंस का बढ़ा-चढ़ाकर प्रचार करते हैं। कई दूसरी स्कीम लॉन्च करते हैं, जिससे फंड मैनेजर का ध्‍यान मुख्‍य उत्पाक से हटकर कई दूसरी पेशकशों पर चला जाता है। 

मैं यह कहने की कोशिश नहीं कर रहा हूं कि फाइव स्टार रेटिंग वाले फंड पर विचार ही नहीं करना चाहिए। इसकी जगह मैं ज्यादा बड़े परिप्रेक्ष्य में यह बताना चाहूंगा कि किसी कंपनी का म्‍युचुअल फंड खरीदते हुए आपको इसके अलावा भी किन महत्वपूर्ण बातों को ध्यान रखना चाहिए। अपने वित्तीय लक्ष्यों, मौजूदा स्थिति, रिटर्न की जरूरत और परिसंपत्ति आवंटन के अलावा कुछ अन्य तथ्य है, जिसका म्‍युचुअल फंड खरीदते समय आपको ध्यान रखना चाहिए। कुछ ऐसे तथ्य है, जो म्‍युचुअल फंड खरीदते समय आपकी नजर में रहने चाहिए।

जोखिम पर गौर कीजिए 

आपने जिस कंपनी के म्‍युचुअल फंड में निवेश किया है, अगर वह अच्छा प्रदर्शन कर रहा है तो वाकई अच्छी बात है, लेकिन उस कंपनी का मार्केट में कमजोर प्रदर्शन आपको स्टॉक मार्केट से हमेशा के लिए बाहर कर सकता है या ऐसे वक्त में आपको थोड़े समय के लिए रुक जाना चाहिए और जब आपकी कंपनी मार्केट में अच्छा प्रदर्शन कर रही हो उस समय बाजार में प्रवेश करना चाहिए।  

लगातार शानदार परफॉर्मेंस

बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान म्‍युचुअल फंड की परफॉर्मेंस कैसी रही। यह देखना भी जरूरी है। सर्वश्रेष्ठ फंड वह होते हैं, जिसमें तेजी से ऊपर उठने की क्षमता हो और जिसमें गिरावट काफी कम आए। इस तरह के फंड की पहचान करना काफी मुश्किल है क्योंकि इस तरह के फंड कम ही हो सकते हैं। आप किसी म्‍युचुअल फंड के पिछले 1, 3, 5 और 7 साल की परफॉर्मेंस देख सकते हैं कि इस अवधि में उनका प्रदर्शन कैसा रहा। आपको खासतौर से मार्केट में आई गिरावट के समय फंड की परफॉर्मेंस देखनी चाहिए।    

म्‍युचुअल फंड हाउसेज खुद भी यह अच्छी तरह जानते हैं कि केवल पिछले रिटर्न के आधार पर फंड का चुनाव करना काफी पुराना और पूरी तरह कामयाब कॉन्‍सेप्‍ट नहीं है। इसलिए कानून के माध्यम से उन्हें यह चेतावनी देने की जरूरत महसूस होती है, “पिछली परफॉर्मेंस भविष्य के प्रदर्शन का संकेत नहीं है।“ हालांकि सभी म्युचुअल फंड कंपनियां निवेशकों से अच्छे-खासे रिटर्न का वादा करती हैं क्योंकि निवेशकों के लिए रिटर्न ही सबसे ज्यादा अहमियत रखता है। यह आंशिक रूप से सत्य होने के साथ दुखद भी है क्योंकि अच्छे रिटर्न की चिंता में जोखिम के कारकों पर होने वाली चर्चा पीछे छूट जाती है और निवेशक आमतौर पर केवल अच्छा रिटर्न देने वाले म्‍युचुअल फंड खरीदने के बारे फैसला लेते हैं।   

मैं जो बात आपको समझाने की कोशिश कर रहा हूं वह यह है कि अभी तक पहले से जानने का ऐसा कोई तरीका नहीं है कि किस म्‍युचुअल फंड का मार्केट में प्रदर्शन आने वाले समय में सबसे शानदार रहेगा। इसलिए नंबर वन की पहचान की कोशिश करना बेकार की रवायद है। जो भी कंपनी अपने म्‍युचुअल फंड के “गोल्डन टच” या भविष्य में अच्छी परफॉर्मेंस का जोर-शोर से दावा करती है वह आपको और अपने आपको मूर्ख बना रही है।

एक निवेशक के तौर पर आपका ध्येय अपने वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निवेश का फैसला लेने का होना चाहिए। इससे आपको यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि आपको अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त के लिए कितना रिटर्न चाहिए। इसके अतिरिक्त आपको अपने म्‍युचुअल फंड की परफॉर्मेंस की अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए समीक्षा जरूर करनी चाहिए। अपने लक्ष्य को जानकर आप जरूरत से ज्यादा जोखिम लेने से भी बच जाएंगे। आपको अपने निवेश, जोखिम के कारकों और लक्ष्यों को प्राप्त करने की अवधि में उचित संतुलन बनाने के बारे में सोचना चाहिए। 

(लेखक हैप्‍पीनेस फैक्‍ट्री के संस्‍थापक और सीएफए हैं, प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।

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Posted By: Manish Mishra