नई दिल्ली, धीरेंद्र कुमार। किसी भी निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल करने के लिए विशेषज्ञ होने की वैसे तो जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आप विशेषज्ञ नहीं हैं तो बेहतर यही है कि आप अपनी सीमाओं को पहचानें। आपको खरीदने लायक असेट की भविष्य की उत्पादकता पर ध्यान देना होगा। अगर इसकी गणना नहीं हो पा रही है कि असेट भविष्य में आपको क्या कमाकर देगा तो उसे भूल जाना ही बेहतर है। फिर इस बात का कोई मोल नहीं रहता कि दूसरे निवेशक उस असेट का कितना भुगतान कर रहे हैं या करेंगे। किसी भी निवेश का सीधा और सरल तर्क यह है कि वह क्या करता है और कर सकता है, न कि उसकी कीमत कितनी है या कितनी होगी। अगर आप किसी निवेश की संभावित कीमत पर फोकस कर रहे हैं तो तय है कि आप सिर्फ अंदाजा लगा रहे हैं। ऐसा करने में कुछ भी गलत नहीं है। मगर मैं जानता हूं कि सफलतापूर्वक अंदाजा नहीं लगा सकता हूं। और जो सफलतापूर्वक अंदाजा करने का दावा करते हैं, उनके दावे पर मुझे संदेह है।  

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रिटर्न, लिक्विडिटी, बाजार का उतार-चढ़ाव और अनुमान। हम आमतौर पर यह मानते हैं कि निवेश में ये बातें मायने रखती हैं। ऐसा सोचने में कुछ गलत भी नहीं है। हममें से जो लोग इन बातों पर सही तरीके से अमल करते हैं, वे बाकी 99 फीसदी निवेशकों से शायद बेहतर हैं। आजकल के बेहद व्यस्त और नतीजों पर जोर देने वाली सोच के बीच हम सिर्फ यह देखते हैं कि निवेश क्या है। और निवेश जो है, हम उसके पीछे की वजहों पर गहराई से गौर नहीं करते हैं। 

हालांकि, कुछ अलग तरह के निवेशक एक कदम पीछे खींचकर थोड़ा गहराई से सोचना शुरू करते हैं। वारेन बफेट ने शेयर होल्डर्स को लिखे एक पत्र में कुछ बातें कही हैं। उन्होंने अपने दो निवेश की कहानी बताई। उनके ये दो निवेश सबसे ज्यादा असामान्य असेट में थे। एक निवेश अमेरिका के ग्रामीण इलाके नेब्रास्का में एक फार्म यानी बड़े फसली भू-भाग के रूप में था। और दूसरा न्यूयॉर्क सिटी के बाहरी इलाके में रेंटल प्रॉपर्टी थी। यह एक तरह से छोटा मॉल था जिसमें कुछ दुकानें थीं। ये दोनो निवेश तब किए गए थे जब बैंक या कर्ज देने वाले संस्थान इस तरह की प्रॉपर्टी कम कीमतों में बेचने के लिए मजबूर थे। साफ है कि उस समय कारोबार के लिए संभावनाएं बहुत अच्छी नहीं दिख रही थीं। तो आपको क्या लगता है कि बफेट ने रिटर्न, लिक्विडिटी, जोखिम और अनुमान का फॉर्मूला आजमाया? नहीं। 

बफेट ने बताया है कि उन्होंने इस बिक्री का आकलन कैसे किया। उन्होंने फार्म यानी खेती वाली जमीन के लिए लिखा कि मैं फार्म चलाने के बारे में कुछ भी नहीं जानता था। लेकिन मेरे एक बेटे को खेती-किसानी पसंद थी। और मैंने उससे दोनों बातें सीख ली थीं कि फार्म में कितने मक्के और सोयाबीन का उत्पादन होगा व फार्म को चलाने पर कितना खर्च आएगा। इस अनुमान से मैंने फार्म से मिलने वाले सामान्य रिटर्न का हिसाब लगा लिया। मुझे यह जानने के लिए बहुत ज्याादा ज्ञान और बुद्धिमत्ता की जरूरत नहीं थी कि इसकी कीमत और नीचे जाने का जोखिम नहीं है। 

आगे चलकर इसकी कीमतों में काफी इजाफा होने वाला है। उन्होंने न्यूयॉर्क रेंटल प्रॉपर्टी के लिए भी ऐसा ही सरल और आसान तरीका अपनाया। आने वाले दशकों में फार्म और रेंटल प्रॉपर्टी दोनों से इनकम बढ़ेगी। हालांकि मुनाफा बहुत नाटकीय तरीके से नहीं बढ़ेगा लेकिन ये दोनों निवेश जीवनभर मुझे मजबूती और संतोष देंगे। और इसके बाद मेरे बच्चों और उनके बच्चों को भी।

बफेट बहुत सरल बात कह रहे हैं। आपको निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल करने के लिए एक्सपर्ट होने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आप एक्सपर्ट नहीं हैं तो अपनी सीमाओं को पहचानना होगा। आपको उस असेट की भविष्य की उत्पादकता पर फोकस करना होगा जिसे आप खरीदना चाह रहे हैं। अगर आप इस बात का आसानी से हिसाब नहीं लगा पता रहे हैं कि असेट भविष्य में आपको क्या कमाकर देगा तो इसे भूल जाइए और आगे बढि़ए। हालांकि अहम बात यह नहीं है कि दूसरे निवेशक उस असेट का कितना भुगतान कर रहे हैं या वे कल कितना भुगतान कर रहे थे और कल कितना करेंगे। किसी भी निवेश का तर्क यह है कि वह क्या करता है और कर सकता है, न कि उसकी कीमत कितनी है या कितनी होगी। 

यह मेरी राय है। लेकिन बफेट फंडामेंटल पर ज्यादा जोर नहीं देते थे। खासकर तब, जब किसी निवेश के लिए भुगतान करने की बात हो। अगर आप किसी निवेश की संभावित कीमत पर फोकस कर रहे हैं तो आप अंदाजा लगा रहे हैं। ऐसा करने में कुछ भी गलत नहीं है। फिर भी मैं जानता हूं कि मैं सफलतापूर्वक अंदाजा नहीं लगा सकता हूं। और जो सफलतापूर्वक ऐसा करने का दावा करते हैं उन पर मुझे संदेह है। बफेट ने इस बात पर जरा भी ध्यान नहीं दिया कि दोनों असेट की पहले कीमत क्या थी। उन्होंने इस बात पर भी गौर नहीं किया कि अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को लेकर एक्सपर्ट क्या कर हैं या निवेश पर असर डालने वाले दूसरे फैक्टर क्या हैं। इनकी जगह उनके लिए अहम बात यह थी कि दोनों असेट्स कमाई कर रहे थे और यह कमाई जारी रहने वाली थी। और इन असेट्स की खरीद उस कीमत पर की जा रही थी जिसने उनकी भविष्य की उत्पादकता को आकर्षक बना दिया। 

अब अमेरिका में फार्म और न्यूयॉर्क में छोटे मॉल में निवेश की बातें भारत में इक्विटी निवेश के बारे में शायद ही कोई सबक दे सकती हैं। और खासकर महामारी के समय में। हालांकि, यह सिद्धांत गिरावट के जोखिम और मुनाफे दोनों के लिहाज से मजबूत है। क्या आपको वह निवेश निवेश के लिहाज से सही लगता है जिसका आकलन आप कर रहे हैं। अगर जवाब हां है तो यह निवेश है। अगर ऐसा नहीं है तो यह कुछ और है और आपको इससे बचना चाहिए।

(लेखक वैल्यू रिसर्च के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)

Posted By: Ankit Kumar

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