मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

राकेश भार्गव। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को अपना पहला बजट पेश किया। राजग सरकार के लगातार दूसरे कार्यकाल का यह पहला बजट है। हालांकि वित्त मंत्री ने उन करदाताओं को भारत का जिम्मेदार नागरिक होने के लिए धन्यवाद दिया है जो अपने करों का भुगतान कर रहे हैं। मध्‍य वर्ग निराश हैं क्योंकि सरकार उनकी उम्मीदों पर खरा उतरती नहीं दिख रही है। बजट में आम आदमी के लिए कोई बड़ी कर रियायत की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, उसकी मदद के लिए कई पहलें भी की गई हैं।

आवास ऋण पर ब्याज पर अतिरिक्त कटौती
आवासीय संपत्ति खरीदने के लिए किसी वित्तीय संस्थान से लिए गए कर्ज पर लगने वाले ब्याज को लेकर आयकर में 1.50 लाख रुपये तक की राहत देने के लिए एक नई धारा 80ईईए जोड़ी गई है। यह लाभ उन्हीं आवासीय संपत्तियों पर मिल सकेगा जिनका स्टांप शुल्क 45 लाख से ज्यादा नहीं होगा। इस छूट का उद्देश्य सरकार के ‘सभी के लिए आवास’ लक्ष्य को बल देना और घर खरीदारों को समर्थ बनाना है।

इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए कर्ज के ब्याज पर भी राहत
किसी भी वित्तीय संस्थान से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के वास्ते लिए गए कर्ज के ब्याज पर भी आयकर में 1.5 लाख रुपये की राहत मुहैया कराने के लिए एक नई धारा 80ईईबी जोड़ी गई है। करदाता के पास कर्ज मंजूर होने की तारीख तक यदि कोई दूसरा इलेक्ट्रिक वाहन नहीं होगा तो उसे इस छूट का लाभ मिल सकेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाना समय की मांग है। अब ऐसे हालात हैं कि इससे बचना सही नहीं होगा। यह ठीक है कि सरकार की इलेक्ट्रिक वाहनों का हब बनाने की योजना है।

आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य
ऐसे करदाता जिनके करेंट अकाउंट में एक करोड़ रुपये या इससे अधिक जमा हैं या विदेश यात्राओं पर दो लाख रुपये या इससे ज्यादा खर्च करते हैं या एक लाख रुपये या इससे ज्यादा का बिजली बिल भरते हैं तो उनके लिए आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य किया गया है। पैन लेने में राहत: सरकार ने आम आदमी को बहुउद्देश्यीय पहचान सुबूत हासिल करने में राहत दी है। इसके लिए पैन और आधार की अनुमति दी है। यदि किसी व्यक्ति को पैन आवंटित नहीं है तो अब वह आधार नंबर से आयकर रिटर्न भर सकेगा। इसके साथ ही यदि किसी व्यक्ति ने अपने आधार नंबर को लिंक करा लिया है तो वह पैन की जगह आधार से आईटी रिटर्न भर सकता है।

अधिभार दरों में बदलाव
वित्त मंत्री ने उच्च आय वर्ग के लोगों पर लगने वाले अधिभार दरों में बदलाव किया है। एचयूएफ, एओपी, बीओआइ और एजेपी के लिए अधिभार दर 10 फीसद (50 लाख से ज्यादा एक करोड़ रुपये तक की आय के लिए) होगा। एक करोड़ से ज्यादा और दो करोड़ रुपये तक की आय के लिए 15 फीसद, दो करोड़ से ज्यादा और पांच करोड़ रुपये तक की आय पर 25 फीसद और पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की आय पर अधिभार 37 फीसद होगा।(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं।)

Posted By: Krishna Bihari Singh

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