नई दिल्‍ली, अजीत मेनन। टैक्‍सपेयर्स अपना टैक्‍स बचाने के लिए, विशेषकर आयकर की धारा 80सी के तहत मिले प्रावधानों के तहत, हमेशा पूरी कोशिश करते हैं। इस धारा के तहत टैक्‍स बचाने के लिए एक दर्जन से अधिक तरीके मौजूद हैं और इनमें से किसी एक उचित तरीके का चुनाव करना कोई आसान काम नहीं है। इन दर्जन भर उत्‍पादों में से कुछ तो सुनिश्चित रिटर्न प्रदान करते हैं, जबकि कुछ मार्केट से जुड़े रिटर्न की पेशकश करते हैं। आयकर की 30 प्रतिशत उच्‍चतम श्रेणी में धारा 80C के तहत एक व्‍यक्ति एक वित्‍त वर्ष में पूरे 1.5 लाख रुपये का निवेश कर मौजूदा कर नियमों (4 प्रतिशत शिक्षा उपकर के साथ) के साथ प्रति वर्ष 46,800 रुपये का वास्‍तविक कर बचत का लाभ प्राप्‍त कर सकता है। 

जब टैक्‍स बचत की बात आती है, तब एक वेतनभोगी करदाता कर्मचारी भविष्‍य निधि कोष (EPF) में योगदान के जरिये महत्‍वपूर्ण कर बचत का रास्‍ता अपनाता है। यह 1.5 लाख रुपये की सीमा के तहत शेष राशि को निश्चित रिटर्न प्रदान करने वाले अन्‍य विकल्‍पों में निवेश करने के अवसरों को सीमित करता है। मार्केट लिंक्‍ड विकल्‍पों में इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग्‍स स्‍कीम (ELSS) बेहतर हैं। ईएलएसएस एक इक्विटी म्‍युचुअल फंड श्रेणी है, जिसमें निवेश पर आयकर की धारा 80सी के तहत कर छूट उपलब्‍ध है। 

वर्तमान टैक्‍स नियमों के मुताबिक, पात्र निवेशक (व्‍यक्ति/एचयूएफ) आयकर कानून, 1961 की धारा 80सी के तहत इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग स्‍कीम (ईएलएसएस) में 1,50,000 रुपये तक के निवेश (अन्‍य निर्धारित निवेश के साथ) राशि को अपनी सकल कुल आय में से घटाने के हकदार होते हैं। ऊपर बताए गए 46,800 रुपये की कर बचत की गणना उच्‍च आयकर स्‍लैब पर आधारित है। उपकर सहित कर पर मौजूदा 4 प्रतिशत शिक्षा उपकर को जोड़कर, प्रति वर्ष कर बचत 1.5 लाख रुपये पर 31.2 प्रतिशत या 46,800 रुपये होगी। 

इस पर दीर्घावधि पूंजी लाभ और लाभांश वितरण टैक्‍स का भी भुगतान करना होगा। कर लाभ आयकर कानून, 1961 के प्रावधानों और समय-समय पर इनमें होने वाले संशोधनों पर निर्भर करता है। हालांकि यहां इस बात का ध्‍यान रखना आवश्‍यक है कि ईएलएसएस में निवेश के माध्‍यम से कर बचत केवल तभी संभव है, जब करदाता टैक्‍स दर की मौजूदा व्‍यवस्‍था का चुनाव करता है। टैक्‍स दर की नई व्‍यवस्‍था में करदाता को किसी भी प्रकार की कटौती का लाभ नहीं मिलता है।  

ईएलएसएस में निवेश को इक्विटी फंड के रूप में आर्हता प्राप्‍त करने के लिए न्‍यूनतम इक्विटी निवेश 80 प्रतिशत होना चाहिए, जो तकनीकी रूप से 100 प्रतिशत तक हो सकता है। ईएलएसएस में सभी बाजार पूंजीकरण में निवेश करने की तरलता भी है, जो इसे इक्विटी फंड्स के बीच एक लचीला और विशिष्‍ट निवेश उत्‍पाद बनाता है।  

इसके अलावा, ईएलएसएस में निवेश के लिए सबसे कम तीन साल का लॉक-इन पीरियड है, वहीं इसके विपरीत अन्‍य टैक्स सेविंग इंस्‍ट्रूमेंट्स में 5 साल का लॉक-इन पीरियड आम बात है। तीन साल के लॉक-इन का मतलब है कि आप खरीद की तारीख से तीन साल पूरा होने से पहले खरीदी गई यूनिट्स को बेच नहीं सकते हैं। 

म्‍युचुअल फंड में सिस्‍टेमैटिक इनवेस्‍टमेंट प्‍लान (एसआईपी) के माध्‍यम से निवेश को सुविधाजनक बनाया गया है और इसमें अंतिम समय की हड़बड़ाहट के बजाए, प्रति माह 12,500 रुपये के साथ सालभर निवेश किया जा सकता है। हालांकि, प्रत्‍येक एसआईपी किस्‍त के लिए लॉक-इन अवधि अलग-अलग होती है, जिसका मतलब है कि प्रत्‍येक मासिक एसआईपी 3 साल की अवधि के लिए लॉक रहती है।   

ईएलएसएस का चयन टैक्‍स बचाने के विकल्‍प के रूप में करने का एक और कारण है, इसका उच्‍च रिटर्न प्रदान करने की संभावना। इक्विटी में निवेश प्रभावी रूप से बेहतर रिटर्न प्रदान करता है जो नियमित रूप से  महंगाई दर से अधिक होता है। वहीं इसके विपरीत अधिकांश निश्चित रिटर्न वाले टैक्‍स सेविंग विकल्‍प जैसे पीपीएफ, 5 साल की एफडी, एनएससी आदि मुश्किल से मुद्रास्‍फीति से अधिक रिटर्न देने में सफल होते हैं। इतना ही नहीं, पिछले एक दशक में ऐसे टैक्‍स सेविंग उत्‍पादों से मिलने वाला निश्‍चित रिटर्न घटा है, जिससे इनके प्रति आकर्षण भी कम हो रहा है। 

ईएलएसएस में निवेश पर होने वाला लाभ और रिडम्‍पशन से प्राप्‍त राशि भी पूरी तरह टैक्‍स मुक्‍त होती है। ईएलएसएस बेहतर पोस्‍ट-टैक्‍स रिटर्न प्रदान करता है, क्‍योंकि ईएलएसएस म्‍युचुअल फंड से एक साल में प्राप्‍त होने वाला 1 लाख रुपये तक का दीर्घावधि पूंजीगत लाभ (LTCG) को आयकर से छूट प्राप्‍त है। इस सीमा से अधिक लाभ पर 10 प्रतिशत की दर से टैक्‍स देय होता है। पीपीएफ को छोड़कर अन्‍य टैक्‍स बचत वाले विकल्‍पों से प्राप्‍त होने वाले लाभ पर आंशिक या पूरा टैक्‍स देना होता है।      

ईएलएसएस में कर बचत के साथ ही संपत्ति निर्माण करने की विशेषता इसे सभी निवेशकों के लिए एक उपयुक्‍त और बेहतर पहला इक्विटी निवेश विकल्‍प बनाता है। पहली बार निवेश करने वालों को अनिवार्य लॉक-इन से फायदा होता है और टैक्‍स बचत से इनसेंटिव मिलता है। अनुभवी निवेशक अपने वित्‍तीय लक्ष्‍यों को हासिल करने के लिए अपने इनवेस्‍टमेंट पोर्टफोलियो में ईएलएसएस को शामिल कर लाभ उठा सकते हैं। कुल मिलाकर, करदाता अपने आयकर दायित्‍व को कम करने, म्‍युचुअल फंड निवेश का अनुभव लेने और संपत्ति निर्माण के लिए ईएलएसएस के विभिन्‍न फीचर्स का लाभ उठा सकते हैं। 

(लेखक पीजीआईएम इंडिया म्‍युचुअल फंड के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

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