नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। शिक्षा सुधारक, दार्शनिक, और मनोवैज्ञानिक जॉन डेवी का एक मशहूर कथन है, "शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं है; शिक्षा ही जीवन है।" प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर स्तरों पर शिक्षा की अहमियत को नकारा नहीं जा सकता है। यह न केवल किसी की संज्ञानात्मक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बल्कि जीवन में स्वयं की सफलता के लिए एक ठोस नींव रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके महत्व और हर साल उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या के बावजूद उच्च शिक्षा, विशेष रूप से विदेशों में अक्सर एक सपना माना जाता है, जिसकी लागत की वजह से कुछ लोग ही इस सपने को साकार कर पाते हैं। या ऐसा ही हम सोचते हैं।

इन्‍क्रेड फाइनेंसियल सर्विसेज के डायरेक्टर नीलांजन चट्टोराज के मुताबिक एजकेशन लोन ने ऐसे छात्रों को बड़ी राहत दी है जो अब अपने परिवार की सारी बचत को समाप्त करने की चिंता किए बिना भारत और विदेशों में अपने सपनों के पाठ्यक्रम और विश्वविद्यालयों में अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। दुर्भाग्य से, पारंपरिक कर्ज देने वाली संस्थाओं ने कभी-कभी गैर-शैक्षणिक कारकों, जैसे कि माता-पिता की कम आय या बचत, कर्ज चुकाने में उनकी अनुमानित अक्षमता, घर जैसी संपत्ति के गिरवी रखने की कमी आदि जैसे कारणों की वजह से कर्ज आवेदनों को खारिज कर दिया जाना, जो ऐसे कर्ज के लिए आवेदन करने के उद्देश्य को ही खत्म कर देता है।

छात्र केंद्रित दृष्टिकोण

2007-2008 के आसपास विशेष और समर्पित शिक्षा कर्ज प्लेटफार्मों के आगमन के साथ शिक्षा ऋण आवेदनों के मूल्यांकन का एक नया प्रकार तेजी से उभर कर सामने आया है। यह मॉडल शिक्षाविदों की गुणवत्ता और वांछित अध्ययन कार्यक्रम पर बहुत हद तक निर्भर सकता है और इस वजह से बहुत हद तक अभिभावकों की भागीदारी की ज़रुरत नहीं रह जाती है।

इसके अलावा, इस कर्ज को लेने के लिए गिरवी रखे जाने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है, जिसकी वजह से लाखों छात्रों को उनके उच्च शिक्षा लक्ष्यों के लिए समय पर और किफायती वित्तीय मदद के विकल्पों की सुलभता प्रदान की है। ये प्लेटफ़ॉर्म वैश्विक स्तर पर बेहद व्यापक रूप से विभाजित उच्च शिक्षा क्षेत्र पर शोध करने और समझने पर अधिक संसाधन खर्च करने में सक्षम हैं, जिसका मतलब छात्र हितैषी कर्ज विकल्प और आसान प्रक्रियाओं का उपलब्ध होना है। अब डॉलर में कर्ज देने वाले विदेशी वित्तीय संस्थाओं ने भारतीय छात्रों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं, यद्यपि अभी यह सीमित संख्या में विश्वविद्यालयों के लिए ही उपलब्ध है।

सह-आवेदकों की भूमिका

ऋण के लिए सह-आवेदक या सह-उधारकर्ता आम तौर पर एक परिवार का सदस्य या रिश्तेदार होता है जो छात्र के भुगतान करने में असमर्थ होने की स्थिति में ऋण चुकाने की जिम्मेदारी लेता है। जबकि अधिकांश कर्जदाता अभी भी ऐसे सह-आवेदकों की आवश्यकता को स्वीकार करते हैं, लेकिन उनकी वित्तीय स्थिति को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता है, लेकिन इसके लिए छात्र के पास बेहतर शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए।

हालांकि पारंपरिक संस्थान केवल माता-पिता को सह-आवेदक के रूप में रखने पर जोर देते हुए कर्ज देने से हाथ पीछे खींच सकते हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि नए जमाने के फिनटेक कर्दाजता, जैसे कि इनक्रेड अनुमान लगाने की बेहतर क्षमता से लैस हैं। यह एक सुलभ कर्ज और उसकी आसान स्वीकृति प्रक्रिया सुनिश्चित करता है जो आय के स्थिर स्रोत के बिना माता-पिता या माता-पिता की अनुपस्थिति में भी सह-आवेदक की क्रेडिट-योग्यता से कुछ हद तक स्वतंत्र है।

"शिक्षा महँगी है, लेकिन अज्ञानता की कीमत इससे भी ज्यादा है"

विदेशी शिक्षा के लिए न केवल एक मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि, मानक जांच में उच्च अंक और उत्साह की जरूरत होती है बल्कि इसके लिए मजबूत वित्तीय प्रतिबद्धताओं की भी आवश्यकता होती है। वैश्विक स्तर पर विश्वविद्यालयों में बढ़ती लागत और महंगाई की वजह से खर्च को पूरा करने में बचत भी कम पड़ने लगती है। शिक्षा ऋण इस अंतर को पाटने का पुल है और इसे भविष्य में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। अधिकांश स्थिति में यह सबसे अधिक जीवन बदलने वाला और गहरा निवेश होता है जो कोई व्यक्ति कभी भी कर सकता है।

किसी की उच्च शिक्षा की फंडिंग को बाह्य रूप से पूरा करने से बहुत हद भुगतान का बोझ कम हो जाता है। यह किसी के जीवन भर की बचत में सेंध नहीं लगाता है, और छात्रों को राहत मिल सकती है क्योंकि ईएमआई एक छूट की अवधि के साथ शुरू होती है, जिससे उन्हें वित्तीय रूप से स्थिर होने के लिए कुछ समय मिल जाता है। यह याद रखना बेहद जरूरी है कि शिक्षा प्रदत्त मूल्य की कोई तुलना नहीं हो सकती है और किसी को भी इस लक्ष्य को हासिल करने से नहीं चूकना चाहिए। करना बस इतना है कि आपको बेहतर उपलब्ध विकल्पों के बारे में जागरूक रहते हुए ऊंची उड़ान भरने की कोशिश करनी चाहिए।

Edited By: Saurabh Verma