बाजार में नीचे स्तर पर खरीद और ऊंचे स्तर पर बिक्री की सलाह हमेशा दी जाती है। आमतौर पर सभी को लगता है कि यह रणनीति अच्छा रिटर्न देने में मददगार है। लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? कोई भी निवेशक यह कैसे समझ पाएगा कि बाजार में करेक्शन का दौर पूरा हो गया है? अगर स्टॉक खरीदने के बाद और बड़ा करेक्शन हो गया तो क्या होगा? ऐसे बहुत से सवाल इस अवधारणा पर सवालिया निशान लगा देते हैं। अब सवाल यह भी है कि निवेशक को करना क्या चाहिए? बतौर निवेशक सबसे सही तरीका है बाजार की उठापटक से प्रभावित हुए बिना निवेश करते रहना। निवेश के लिए लंबी अवधि में अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाले स्टॉक या म्यूचुअल फंड का चुनाव किया जाए, तो कुछ वर्ष बाद अच्छा रिटर्न मिलना तय है।

एक पुराना चुटकुला है। किसी नवयुवक ने एक अनुभवी व्यक्ति से पूछा, ‘स्टॉक मार्केट से पैसा कैसे कमा सकता हूं?’ उस व्यक्ति ने जवाब दिया, ‘बहुत आसान है। नीचे पर खरीदो, ऊंचे पर बेचो।’ युवक का अगला सवाल था, ‘आपकी बात सही है, लेकिन ऐसा होगा कैसे?’ अनुभवी व्यक्ति का उत्तर था, ‘यह समझना बहुत मुश्किल है। इसमें तो पूरी जिंदगी लग जाती है।’

यह एक अच्छा चुटकुला भले नहीं हो, लेकिन बात है बिलकुल सही। ‘नीचे पर खरीदो, ऊंचे पर बेचो’ का सबसे सामान्य सा अर्थ लगाया जाता है कि बाजार में खरीदी तब करो, जब गिरावट का दौर हो, जैसा पिछले कुछ हफ्तों में रहा है। निवेशक और सलाहकार अक्सर यह विचार देते हैं कि करेक्शन (एक मूर्खतापूर्ण अवधारणा) का दौर खरीदी के लिए सबसे अच्छा होता है। प्रमाण के तौर पर कोई भी पीछे के आंकड़े उठाकर जांच सकता है कि गिरावट के दौर में खरीदी करने वाले निवेशकों ने तेजी के दौर में खरीदी करने वालों की तुलना में बेहतर रिटर्न पाया है। इस तरह की गणना निश्चित रूप से अच्छा उदाहरण हो सकती है।

अब सवाल दूसरा है। जब बाजार में करेक्शन हो रहा होता है और बाजार करेक्ट यानी सही हो चुका होता है (मैं इस अवधारणा को थोड़ा और आगे ले जा रहा हूं), आप यह कैसे जान पाएंगे कि अब इसमें और करेक्शन नहीं होने वाला? और अगर इसमें और बड़ा करेक्शन हो, तब क्या होगा? आपको इसके इनकरेक्ट यानी गलत होने के लिए कितना इंतजार करना होगा? ये वाल इस पूरी अवधारणा पर ही सवाल खड़ा कर देते हैं। ऐसे में इसका सबसे करेक्ट यानी सही उत्तर यही है कि आप जब भी भविष्य का अनुमान लगाने का प्रयास करते हैं, वह किसी तुक्के से ज्यादा नहीं होता।

हालांकि यह तरीका आदर्श क्यों नहीं है, इसका कारण दूसरा है। सबसे हास्यास्पद बात यह है कि गिरावट वाले बाजार में निवेश की सलाह तो दी ही जाती है। उसी वक्त गिरते हुए बाजार में निवेश से बचने से बचने को भी कहा जाता है। गिरावट में दौर में अक्सर एक स्टॉप लॉस लगाकर निवेश को बेचने और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करने को कहा जाता है।

सभी बातें बहुत तार्किक और समझदारी भरी लगती हैं। यह भी बहुत तार्किक लगता है कि मार्केट में गिरावट के वक्त स्टॉक खरीदे जाएं या इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाए। अब यह तर्क भी दिया जा सकता है कि अगर गिरावट के दौर में खरीदना अच्छा विचार है, तो तेजी के दौर में बेचना भी अच्छा विचार ही माना जाना चाहिए। दोनों ही बातों से लगता है कि हमें अच्छा रिटर्न मिलेगा।

असल में ऐसा नहीं है। सबसे सही कदम है कि ऐसे समय में खरीद मत करें जब आपको या अन्य लोगों को लगता है कि बाजार तेजी की ओर जाने वाला है। निवेशक को निवेश की गुणवत्ता के हिसाब से फैसला लेना चाहिए। खरीदते समय यह देखना चाहिए कि वह स्टॉक अपनी स्वाभाविक कीमत के इर्द-गिर्द है या नहीं। कभी उस स्टॉक के या बाजार के भविष्य का अंदाजा लगाकर फैसला नहीं करना चाहिए। एक सदी से ज्यादा का अनुभव यही बताता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव चलता रहता है।

पेशेवर लोग तो जैसा चाहते हैं, वैसा कर सकते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए रास्ता एकदम स्पष्ट है। उन्हें लंबी अवधि में अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाले तीन से चार म्यूचुअल फंड का चुनाव करना चाहिए और एसआइपी की मदद से सतत रूप से उनमें निवेश करना चाहिए। मार्केट के उतार-चढ़ाव से परेशान नहीं होना चाहिए। म्यूचुअल फंड में एसआइपी या किसी भी अन्य तरीके से निवेश का सीधा सा मतलब होता है कि बाजार के बुरे दौर में भी निवेश जारी रहे।

आप भविष्य नहीं देख सकते। आप यह भी नहीं जान सकते कि बाजार कब करेक्ट या इनकरेक्ट होगा। आप नहीं जानते कि इनमें से कुछ भी कब अचानक हो जाएगा। भरोसे के साथ आप जो बात जानते हैं, वह यही है कि सतत रूप से कुछ वर्षो में इक्विटी में किया हुआ निवेश बड़े उतार-चढ़ाव के साथ शानदार रिटर्न देगा। बड़े रिटर्न और बड़े उतार-चढ़ाव के इस संयोग का लाभ उठाने का सही तरीका यही है कि लगातार निवेश करते रहिए। बिना रुके निवेश करना ही सही रास्ता है।

(इस लेख के लेखक धीरेन्द्र कुमार है जो कि वैल्यू रिसर्च के सीईओ हैं।)

Posted By: Praveen Dwivedi