अगर यह पूछा जाए कि निवेश की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा क्या है, तो उम्मीद यही है कि अगर सब नहीं तो ज्यादातर निवेशक डायवर्सिफिकेशन या विविधता की तरफ इशारा करेंगे। निवेश में विविधता लाना वाकई बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन विविधता का एक और प्रकार भी है, जो ज्यादा महत्वपूर्ण है और जो सबको नसीब नहीं है। जी हां, मैं जिंदगी की विविधता के बारे में बात कर रहा हूं।

अनिश्चितता के मौजूदा दौर में बहुत से लोगों को एक खास मुकाम पर पहुंचकर अपने कैरियर में ठहराव आ गया लगने लगता है। उन्हें ऐसा लगता है कि पता नहीं नौकरी कब तक चले और कब छूट जाए। जिन उद्योगों में बेहतर मौके और भविष्य हो सकते हैं, उनमें जाना भी उनके लिए मुश्किल होता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि किसी खास उद्योग या क्षेत्र में एक दशक या उससे ज्यादा वक्त तक एक ही तरह का काम करते रहने से लोग उसमें पारंगत तो होते हैं, लेकिन इसके साथ ही वे उस उद्योग और उस काम के गुलाम भी हो जाते हैं।

मेरा आकलन यह है कि जिन लोगों ने उम्र के इस पड़ाव (जहां कैरियर में ठहराव सा आने लगता है) तक अच्छी बचत कर ली होती है, वे मुश्किल वक्त को ज्यादा आरामदायक तरीके से झेल लेते हैं और अपनी पेशेवर जिंदगी को एक अलग और बेहतर दिशा देने में कामयाब हो जाते हैं। वे अपनी जिंदगी में विविधता लाने में कामयाब होते हैं। ऐसे में अगर सही मायनों में कहें, तो निवेश आपको इस लायक बनाता है कि आप अपनी जिंदगी में विविधता ला सकें।

यह ऐसी चीज है, जिस पर गहरा चिंतन होना चाहिए और जिसकी योजना सतर्क होकर बनाई जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो इसके कुछ नकारात्मक नतीजे भी हो सकते हैं। कुछ वर्ष पहले मेरे एक मित्र के सामने ऐसा संकट आया, जिससे मुझे यह जानने में मदद मिली कि यह समस्या असल में है क्या। यह दंपती एक बड़ी आइटी कंपनी में काम करता था। कहने की जरूरत नहीं कि दोनों के निवेश का एक बड़ा हिस्सा उनकी ही कंपनी के इंप्लॉई स्टॉक ऑप्शन योजना (ईएसओपी) के रूप में लगा हुआ था। इतना ही नहीं, दोनों को लगता था कि चूंकि वे आइटी क्षेत्र में काम कर रहे हैं, तो उन्हें इस क्षेत्र की समझ औरों से ज्यादा है। इस वजह से उन्होंने अन्य आइटी कंपनियों में भी अच्छी-खासी रकम का निवेश किया हुआ था। इसके बाद जो हुआ, आप उसका अंदाजा लगा सकते हैं।

निवेश में विविधता की बेइंतहा कमी के चलते एक निश्चित मुकाम पर पहुंचने के बाद दोनों की जिंदगी ऐसे मुकाम पर पहुंची, जो उनके लिए आसान नहीं थी। टेक्नोलॉजी सेक्टर का चढ़ता सूरज वर्षो बाद जब अपने ढलान पर आया, तो दंपती को ऐसा लगने लगा कि जिसे वह लंबी अवधि के लिए बेहतर भविष्य समझे बैठे थे, असल में वैसी कोई चीज अस्तित्व में नहीं थी। इसके साथ ही अपनी जिस कंपनी में उन्होंने बड़ी रकम का निवेश किया हुआ था, वह निवेश महज एक वर्ष से कुछ ज्यादा समय में घटकर आधे से कम रह गया। जब शेयर बाजारों में उछाल का मौसम था, तब टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर जिस गति से चढ़े, सेक्टर में ठहराव आते ही वे उससे कहीं ज्यादा तेजी से गिरने लगे। इससे दंपती को टेक्नोलॉजी क्षेत्र की उन कंपनियों से भी मायूसी हाथ लगी, जिनमें उन्होंने निवेश किया हुआ था।

बहुत से निवेशकों को इस सच्चाई का एहसास नहीं है। विविधता किसी भी निवेश रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। निवेशकों से यह उम्मीद की जाती है कि वे कम से कम इतने अलग-अलग सेक्टर में निवेश करें, जिससे कि अगर किसी एक सेक्टर में बुरा वक्त आए तो दूसरा उसकी भरपाई कर दे। लेकिन विविधता की शुरुआत महज निवेश से नहीं, बल्कि जिंदगी से भी हो। आपका कैरियर किसी एक उद्योग से जुड़ा हुआ है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि निवेश जहां तक संभव हो, डायवर्सिफाइड होना चाहिए।

असल में जब हम कई मामलों में निवेश के विविध नहीं होने के पीछे की वजह तलाशने निकलते हैं, तो पता चलता है कि वे वजहें भी अपनी जगह पर ठीक ही हैं। सच यह है कि ईएसओपी का विकल्प चुनने वाले ज्यादातर कर्मचारी सही मायनों में निवेशक नहीं होते। उन्हें अपनी कंपनी की तरफ से ईएसओपी का विकल्प दिया जाता है, तो वे उसे चुन लेते हैं। इससे आगे वे शेयर बाजारों में नियमित तौर पर निवेश नहीं करते। वे कभी बड़ी मात्रा में शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश नहीं करते, लिहाजा उनका ज्यादातर निवेश अपनी ही कंपनी में हुआ पड़ा रहता है। दिक्कत यह है कि मुङो ऐसी कई कंपनियों के बारे में पता चला है जो ईएसओपी के तहत दिए शेयरों की बिक्री को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाती हैं।

उससे भी बुरी बात यह है कि ईएसओपी धारकों में से कुछ से बात करने पर पता चला है कि अगर वे अपने निवेश में विविधता लाती भी हैं, तो अपने सेक्टर को छोड़कर अन्य सेक्टरों में निवेश नहीं करतीं। ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि उन्हें उस सेक्टर के बारे में बेहतर समझ का भ्रम रहता है। मारुति का कर्मचारी अगर टाटा मोटर्स में या इन्फोसिस का कर्मचारी टीसीएस में निवेश करता है, तो कर्मचारी को भले ही लग सकता है कि वह निवेश में विविधता ला रहा है। लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं है। अपने कैरियर और निवेश दोनों को किसी एक कंपनी या एक सेक्टर में लगाना किसी सूरत में अच्छी बात नहीं है। इससे भी बड़ी एक बात है। वह यह कि निवेश को ज्यादा से ज्यादा अलग-अलग सेक्टर में लगाने के कई बार ऐसे नतीजे आते हैं, जो निवेशक को सुखद आश्चर्य में डालते हैं।

(इस लेख के लेखक धीरेंद्र कुमार हैं जो कि वैल्यू रिसर्च के सीईओ हैं)

Posted By: Praveen Dwivedi

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