आमतौर पर सभी के मन में यह धारणा बन गई है कि कोई फाइनेंस प्रोडक्ट जितना जटिल है, उतना ही अच्छा भी होगा। जो निवेश के लिए प्रोडक्ट चुनने में सरलता का ध्यान रखते हैं, अक्सर वे भी अपना निवेश पोर्टफोलियो बहुत व्यापक कर लेते हैं। ना समझ में आने वाले किसी प्रोडक्ट में निवेश कर देना या फिर एक साथ 15-20 अलग-अलग प्रोडक्ट में निवेश कर देने से जटिल स्थिति बन जाती है। ऐसे में निवेशक के लिए अपने ही निवेश की असल हालत जानना मुश्किल हो जाता है। अक्सर यह जटिलता नुकसान का कारण बन जाती है। इसलिए एक समझदार निवेशक वही है, जो सीमित पोर्टफोलियो के तहत सीधे और सरल उत्पादों में निवेश का रास्ता अपनाए।

पिछले करीब दो दशक में टेक्नोलॉजी कंपनियों ने लगभग पूरी दुनिया पर कब्जा कर लिया है। देखा जाए तो करीब हर उद्योग में इन कंपनियों की सेंध है। इस अवधि में भी दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों ने इनकी अनदेखी की। दो महान निवेशक वारेन बफेट और चार्ली मुंजर टेक्नोलॉजी की इस बस पर सवार नहीं हुए। उन्होंने हाल ही में एप्पल और आइबीएम में निवेश किया है। उन्होंने यह कदम भी तब उठाया जब एप्पल कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनी में ढल गई है और आइबीएम एक बिजनेस सर्विस कंपनी बन गई है। सवाल है कि उन्होंने आखिर टेक्नोलॉजी की अनदेखी क्यों की? इससे भी बड़ा सवाल है कि उन दोनों के इस कदम से आम निवेशक कुछ सीख सकता है कि नहीं?

बफेट और मुंजर अपने शुरुआती दिनों में कहा करते थे कि वे ऐसी कंपनियों में पैसा नहीं लगाते, जिसका काम उन्हें समझ में नहीं आता है। कोई भी आम इंसान यही कहेगा कि इस सोच की वजह से उन दोनों ने निवेश के कितने अच्छे-अच्छे मौके गंवा दिए होंगे। अरबों रुपये अपने पास होने के बाद भी उन दोनों ने कभी गूगल या अमेजन में निवेश नहीं किया, जबकि इन वर्षो में इन दोनों कंपनियों ने निवेशकों को 20 गुने से ज्यादा का फायदा दिया है।

आम लोगों की नजर में हुए इस भारी-भरकम नुकसान के बाद भी दोनों बेहद खुश है। इसकी सीधी सी वजह है कि अपनी इस सोच के बावजूद दोनों दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में शुमार हैं। वे सफल है, क्योंकि उन्होंने उन कंपनियों में ही निवेश किया, जिनका कामकाज उन्हें समझ में आता है। मोटे तौर पर आप यह तो कह सकते हैं कि उन्होंने अमेजन व गूगल में निवेश और उससे कमाई का मौका गंवा दिया। हालांकि ठीक इसी वक्त उन्होंने पेट्स डॉट कॉम, वेबवैन, मायस्पेस और ऐसे ही कई बड़े डूब गए शेयरों में होने वाले नुकसान से भी खुद को बचाए रखा। अगर उन्होंने अमेजन और गूगल में निवेश करना शुरू किया होता, तो शायद इन डूब गए शेयरों में भी कर दिया होता। मीडिया दिग्गज रूपर्ट मडरेक ने 58 करोड़ डॉलर में मायस्पेस को खरीदा था। चार साल बाद उन्हें इसे 3.5 करोड़ डॉलर में बेचना पड़ा था। निसंदेह मडरेक को बफेट और मुंजर से यह सीखने की जरूरत है कि ऐसे कारोबार में हाथ नहीं लगाना चाहिए, जिसकी समझ ना हो।

बिलकुल यही सीख आम निवेशकों को भी लेनी चाहिए, लेकिन लोग ऐसा करते नहीं हैं। कोई उत्पाद हो या सेवा, हमें उसकी ऊपरी चमक, उसके आसपास बुना हुआ शब्दों का जाल और उसकी जटिलता ही लुभाती है। आधुनिक प्रौद्योगिकी ने लोगों को जटिलता का प्रेमी बना दिया है। आमतौर पर लोग यही मानने लगे हैं कि जो जितना जटिल होता है, उतना ही अच्छा होता है।

दुर्भाग्य से पर्सनल फाइनेंस के मामले में यह विचार बहुत गलत है। पर्सनल फाइनेंस के मामले में उत्पाद का सामान्य होना मददगार ही नहीं, बल्कि बेहद जरूरी भी है। इसकी वजह भी बहुत सीधी सी है कि अगर निवेशक अपने उत्पादों को समङोगा ही नहीं, तो यह फैसला कैसे कर पाएगा कि वह निवेश उसके लिए कितना सही है। उसके लिए यह जानना भी मुश्किल होगा उस फाइनेंस प्रोडक्ट को बेचने वाला कितने सही दावे कर रहा है।

अब सवाल यह भी है कि आप सब कुछ कैसे जान सकते हैं? इसका सबसे आसान तरीका है कि चीजों को सरल बनाए रखिए। दुर्भाग्य की बात है कि लोग इस संदेश को उलटा समझते हैं। जब मैं आज के सेविंग और इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट पर नजर डालता हूं और लोगों के निवेश पोर्टफोलियो को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि लोगों को जागरूक होने की बहुत जरूरत है। मार्केटिंग वाले एक चीज समझाते हैं कि अपने पैसे को अलग-अलग कई उत्पादों में निवेश करना रणनीतिक रूप से अच्छा कदम है। लेकिन इसी के साथ यह भी जरूरी है कि अगर आप खुद को कुछ समझदार निवेशकों में शुमार करना चाहते हैं, तो पोर्टफोलियो को छोटा रखने के लिए भी प्रतिबद्ध रहिए। सरलता केवल आपके निवेश प्रोडक्ट में ही नहीं, पूरे पोर्टफोलियो में होनी चाहिए।

अगर किसी ने 20 अलग-अलग प्रोडक्ट में निवेश किया हुआ है, तो निश्चित रूप से उसके निवेश कितने भी सीधे और सरल हों, लेकिन पूरी स्थिति बहुत जटिल बन जाएगी। ज्यादातर लोगों के साथ ऐसी ही स्थिति है और इसे समझना निश्चित रूप से मुश्किल होता है। मैं यही कहना चाहूंगा कि 100 में 99 निवेशकों को सिर्फ इतना करने की जरूरत है कि आपातकालीन स्थिति के लिए एक ठीकठाक सी राशि बचाकर रखें, एक बड़ा सा टर्म इंश्योरेंस लें और ज्यादा से ज्यादा तीन या चार म्यूचुअल फंडों में निवेश करें। इनमें से एक फंड टैक्स सेवर हो सकता है। इस तरह का योग बहुत सरल है। इसे कोई भी समझ सकता है और अपने निवेश पर नजर भी रख सकता है। सरलता इसलिए मददगार होती है, क्योंकि इसमें आपके लिए समझना आसान होता है कि आपके निवेश की स्थिति क्या है। जब यह सफल होता है, तो आप सफलता को और आगे बढ़ा सकते हैं। जब सफलता नहीं मिलती है तो आप आसानी से यह समझ पाते हैं कि सफलता क्यों नहीं मिली।

(यह लेख धीरेन्द्र कुमार ने लिखा है जो कि वैल्यू रिसर्च के सीईओ हैं।)

Posted By: Praveen Dwivedi