टिम हरफोर्ड मानते हैं कि एसआइपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) कम रिटर्न देता है। किसी एक समय पर सिर्फ रिटर्न के लिहाज से एकमुश्त निवेश करना बेहतर रहता है। जिन्होंने हरफोर्ड का नाम नहीं सुना है, उनके लिए वह मशहूर अर्थशास्त्री और बेहतरीन लेखक हैं जो फाइनेंशियल टाइम्स में ‘दि अंडरकवर इकोनॉमिस्ट’ कॉलम लिखते हैं। उनका ब्लॉग सबसे दिलचस्प ब्लॉग्स में से एक है जिसे मैं नियमित रूप से पढ़ता हूं।

हालांकि, हाल के उनके एक लेख पर ध्यान गया। उन्होंने यह कहते हुए अपनी बात शुरू की कि क्या प्रति माह एक छोटी रकम निवेश करना बेहतर है या बड़ी राशि एकमुश्त लगाना ठीक है? सीमित दायरे वाले एक लेख की व्यापक व्याख्या क्या होती है। शेयरों में नियमित निवेश के पक्ष में सबसे ज्यादा तर्क दिया जाता है, उसे ‘कॉस्ट एवरेजिंग’ कहा जाता है। खुदरा निवश सलाहकार अनेक बार यह तर्क देते हैं। वे कहते हैं कि इससे शेयर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों का फायदा उठा सकते हैं। इस तरह अगर आप एक निश्चित राशि हर महीने निवेश करते हैं तो आप फंड की वैल्यू घटने के समय ज्यादा यूनिट खरीद सकते हैं। सैद्धांतिक दृष्टि से यह तर्क बेहतरीन व सहज के साथ ही गलत प्रतीत होता है। यह तर्क गलत तब लगता है जब बाजार के ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर परखते हैं।

जब आप कॉस्ट एवरेजिंग शब्द का इस्तेमाल करते हैं जो इक्विटी ट्रेडिंग में ज्यादा प्रयोग होता है। म्यूचुअल फंडों में एसआइपी के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। तो क्या सच है? क्या ऐतिहासिक आंकड़ों से यह साबित होता है कि एकमुश्त निवेश मुकाबले एसआइपी के जरिये निवेश करने से आपको कम रिटर्न मिलता है। इसका उत्तर है कि अधिकांश समय में यह सही होता है। लेकिन अधिकांश शब्द पर गौर करने की जरूरत है। अगर आप स्टडी करते हैं जिसमें आप काल्पनिक रूप से प्रति माह या प्रति वर्ष निवेश करना शुरू करते हैं तो ज्यादातर मामलों में एकमुश्त निवेश बेहतर हो सकता है। अगर आप एक विशेषज्ञ हैं और यह स्टडी कर रहे हैं तो आप इसका औसत निकालेंगे और निष्कर्ष होगा कि एसआइपी में निवेश करना तर्कसंगत नहीं है।

लेकिन इसके जवाब में बड़ा तर्क है। वास्तव में दो अहम तर्क हैं। पहला, अगर आप वास्तविक जमाकर्ता हैं तो आप मासिक वेतन पाने वाले हो सकते हैं। एकमुश्त रकम पाना महज कुछ लोगों के लिए संभव होगा। ऐसा ज्यादातर लोगों के मामले में नहीं होता है। ऐसे में आप हर महीने कमाते हैं तो छोटी राशि आप आसानी से बचा सकते हैं। दरअसल, अपने वेतन का छोटा हिस्सा हर महीने बचाना अच्छी आदत है। कॉस्ट एवरिंज संयोगवश होने वाला लाभ है। बचत करने की आदत अहम है जो आपको भविष्य में संपदा बनाने के लिए प्रेरित करती है।

दूसरा तर्क इससे कहीं ज्यादा पेचीदा है। अगर आपके पास एकमुश्त रकम है तो भी आपको एसआइपी में निवेश करना चाहिए। भले ही तथ्य है कि औसतन एकमुश्त निवेश करना बेहतर रिटर्न देता है। आपको एकमुश्त राशि लिक्विड फंड में फंड में या बैंक में जमा करनी चाहिए और उससे एसटीपी (सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान) के जरिये निवेश करना चाहिए। एसटीपी भी एसआइपी के समान होता है।

इसके पीछे वजह है कि आपका अनुभव सैकड़ों सैंपलों का औसत नहीं होगा। उनमें से आप सिर्फ एक सैंपल भर होगे। अगर दस फीसद भी संभावना इस बात की है कि कि आप जैसे ही शेयर बाजार में निवेश करें तो बाजार में अनायास भारी गिरावट आ जाए जो आपको बर्बाद कर दे। क्या होगा अगर आप इस दस फीसद संभावना में आ गए? वह रकम जो आप निवेश कर रहे हैं, वह आपके जीवन के लिए अत्यंत अहम हो सकती है। किसी विशेषज्ञ के अध्ययन में सिर्फ एवरेज यानी औसत मायने रखता है। आपके और आपके द्वारा निवेश की गई बचत राशि के लिए वह क्षीण संभावना भी अत्यधिक अहम है जिसमें आप अपनी राशि का बड़ा हिस्सा गंवा सकते हों।

एक प्रश्न तुरंत खड़ा होता है कि अगर आपको कहीं से एकमुश्त रकम मिली है तो आपको एसटीपी के जरिये कितने समय में निवेश करनी चाहिए? मैंने अनेक लोगों के अनुभवों पर गौर किया और सामान्य सा नियम बनाया है कि एकमुश्त रकम आपके जीवन के लिए कितनी अहमियत रखती है। अगर इसमें से आधी राशि गवां दें तो आपको इसे वापस कमाने में कितना समय लगेगा। इसका आशय है कि यह रकम अगर आपके एक साल के वेतन के बराबर है तो आपको छह माह के दौरान एसटीपी या एसआइपी के जरिये निवेश करनी चाहिए।

अधिकतम समय सीमा की बात करें तो बाजार की चक्रीय अवधि को ध्यान में रखते हुए और आपके जीवन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण राशि तीन साल से पांच साल में निवेश करना पर्याप्त होगा। मैंने कई बार लिखा है कि एसआइपी का आधार गणितीय नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक है।

(इस लेख के लेखक वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार हैं।)

Posted By: Praveen Dwivedi