नई दिल्‍ली, अजीत मेनन। लोग अपने भविष्य का फैसला नहीं करते, वे अपनी आदतों का फैसला करते हैं और उनकी आदतें उनके भविष्य का फैसला करती हैं। एफएम अलेक्जेंडर का यह वक्तव्य मुझे कई वजहों से एक धागे से जोड़ता है। अन्य चीजों के अलावा मैं सोचता हूं कि वित्त की दुनिया में बेहतर आदतों की शक्ति की अक्सर उपेक्षा कर दी जाती है या एक ताकत के रूप में उतना महत्त्व नहीं पाती हैं। यह दीर्घावधि के हिसाब से संपत्ति के सृजन में मददगार हो सकता है। निवेशकों का बहुत ज्यादा ध्यान वित्त के तकनीकी पहलुओं, बाजार की मौजूदा धारणाओं, समाचार चैनलों पर विशेषज्ञ के कथनों का अर्थ निकालने आदि पर रहता है। बहरहाल मैं यह तर्क प्रस्तुत करने जा रहा हूं कि सिर्फ अच्छी वित्तीय आदतें ही एक निवेशक के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त शर्त है।

आइए कुछ गतिविधियों पर नजर डालते हैं, जो इस दायरे के तहत आती हैं और इसके लिए बहुत कम तकनीकी जानकारी या वित्त में विशेषज्ञता की जरूरत होती है।

पहला है खुद को भुगतान करने की आदत

यह एक अवधारणा है, जिसमें कोई व्यक्ति महीने में जितना कमाता है, उसमें से एक निश्चित रकम हर हाल में बचाता है। उदारहण के लिए मकान मालिक, काम वाली, घर के तमाम तरह के बिलों, मनोरंजन आदि पर भुगतान के पहले खुद के लिए भुगतान करना। यह एक समयावधि के बाद बचत की आसान सी प्रक्रिया है, जिसके जरिये पर्याप्त पूंजी एकत्र की जा सकती है। यह पूंजी रिटायरमेंट के वर्षों के दौरान खुद को बनाए रखने के लिए पर्याप्त होगी।

कर्ज के जाल से बचने की आदत

इसका मतलब यह है कि व्यक्ति को अपने साधनों के मुताबिक जीना चाहिए और कर्ज लेकर ऐसी खरीदारी नहीं की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में आर्थिक हालत पतली हो जाए। यहां ध्यान रखने वाली महत्त्वपूर्ण बात यह है कि किस ब्याज दर पर कर्ज लिया गया है और कर्ज की रकम कितनी है। यह आदत मौजूदा कर्ज को हर महीने चुकाने से जुड़ी है। कुछ कर्ज जैसे Home Loan की उपेक्षा नहीं की जा सकती है क्योंकि यह एक भावनात्मक फैसला भी होता है। बहरहाल कर्ज लेने वाले की एक रणनीति कुछ रकम सालाना चुका देने की होनी चाहिए। उदाहरण के लिए यह लक्ष्य सालाना बोनस के माध्यम से हासिल किया जा सकता है। कम ब्याज दर के वातावरण में ज्यादा कर्ज लेने की प्रेरणा मिल सकती है, लेकिन चक्र बदलने पर यह कर्ज प्रबंधन से बाहर हो सकता है।

सभी अंडों को एक ही टोकरी में न रखने की आपकी आदत

इसके लिए आज के दौर में तकनीकी नाम दिया गया है, विविधीकरण। इसका मतलब यह है कि व्यक्ति को जोखिमों को नियंत्रण में रखने का ध्यान रखते हुए विभिन्न संपत्ति वर्ग में निवेश करना चाहिए। इससे स्वतः ही यह सुनिश्चित हो जाता है कि एक निवेशक मुनाफा अधिकतम करने की ओर नहीं देख रहा है, जिसकी वजह से प्रायः किसी विशेष संपत्ति वर्ग में जरूरत से ज्यादा धन लगा दिया जाता है, जो नई नवेली सनक हो सकती है। हालांकि, मैं इसे एक कदम और आगे बढ़ाऊंगा और न केवल संपत्ति वर्गों के बीच, बल्कि जहां भी संभव हो, संबंधित खर्चों और करों को ध्यान में रखते हुए विविधता लाऊंगा। उदाहरण के लिए अगर आप इक्विटी पर विचार कर रहे हैं तो विभिन्न तरीकों, बाजार पूंजी आदि के बीच विविधीकरण पर विचार करना चाहिए। एक मिश्रित पोर्टफोलियो, जिसें यह सभी रणनीतियां मिली होती हैं, प्रमुख आवंटन करने के लिए उस पर भी विचार करना चाहिए।

आवेग में खरीदारी कम करने की आदत

इसके माध्यम से मैं यह सुझाव नहीं दे रहा हूं कि हम सभी को मितव्ययी जीवनशैली अपनाने की जरूरत है। इसे सही तरीके से समझने के लिए आप अपनी खुद की आमदनी और वर्षों के दौरान बदली जीवनशैली पर गौर कर सकते हैं। हमारा खर्च हमारी आमदनी के हिसाब से करीब जादूई तरीके से बढ़ा हुआ हो सकता है। इसकी वजह से आमदनी बढ़ने के बजाय हमारी बचत की दर कम हो जाती है। यह मुख्य रूप से इसलिए होता है कि हम आवश्यक खर्चों और अपनी इच्छाओं के बीच भ्रमित हो जाते हैं। यह बनाना और इसे बरकरार रख पाना बहुत कठिन आदत है। इसकी वजह यह है कि हमारे ऊपर सहकर्मियों का दबाव होता है। हमने व्यापक तौर पर अपनी सोसाइटी के मुताबिक मानक तय कर रखे हैं। लेकिन इस आदत में वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करने की अधिकतम संभावना और क्षमता है।

अच्छे साथ की आदत

जीवन में सहयोग के लिए आप अन्य लोगों की तुलना में अपने परिवार पर ज्यादा भरोसा करते हैं, क्योंकि वे आपको किसी और की तुलना में बेहतर समझते हैं। ऐसे में एक तरह से वे आपके ‘भावनात्मक विशेषज्ञ’ हैं। इसी तरह जीवन के हर पहलू के लिए हमें सच्चे विशेषज्ञों की जरूरत होती है। पारदर्शी और सक्षम तरीके से वित्तीय सलाह देने वाले विशेषज्ञों के साथ खुद को घेरे रखने के लाभ पर अधिक जोर नहीं दिया जा सकता है। यह अनावश्यक व्यय की तरह लग सकता है, जब बेहतर चल रहा हो। लेकिन परिवार की तरह ही एक विशेषज्ञ का सही मूल्य तब पता चलता है, जब बुरे दौर चल रहे होते हैं।

निष्कर्ष

मैं यह कहना चाहूंगा कि उपरोक्त आदतों के लिए किसी क्षेत्र विशेषज्ञ की जरूरत नहीं है। लेकिन जीवन का आनंद लेने के लिए एक बार पूरी तरह से लिप्त हो जाना, योजनाओं के बारे में लचीला रुख अपनाना और विचारों को खुला रखना जरूरी है। स्वस्थ मस्तिष्क और शरीर का मिश्रण अपने आप में संपत्ति का सबसे बड़ा सृजनकर्ता है।

(लेखक पीजीआईएम इंडिया म्युचुअल फंड में सीईओ हैं। छपे विचार उनके निजी हैं।)

Edited By: Ashish Deep