इंडोनेशिया के नए नियमों से भारत को तगड़ा झटका, GAP सर्टिफिकेट की वजह से रुक जाएगा मूंगफली का एक्सपोर्ट?
इंडोनेशिया ने मूंगफली आयात के लिए नए सख्त नियम और कोटा सिस्टम लागू किया है, जिसमें GAP सर्टिफिकेट अनिवार्य है। इससे भारतीय मूंगफली निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है।

इंडोनेशिया में इंपोर्ट नियम में सख्ती से भारत की मुश्किलें बढ़ीं (AI Image)
HighLights
इंडोनेशिया ने मूंगफली आयात के लिए नए सख्त नियम बनाए।
GAP सर्टिफिकेट अनिवार्य होने से निर्यात पर पड़ेगा असर।
भारतीय निर्यातकों को तैयारी के लिए मिला सिर्फ 14 दिन।
नई दिल्लीं| इंडोनेशिया ने अपने देश में इम्पोर्ट की जाने वाली मूंगफली के लिए नया नियम बनाया है जिसके बाद भारत की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल नए नियम के अनुसार गुणवत्ता मानकों को ज्यादा सख्त कर दिया गया है। इसके साथ ही इंडोनेशिया ने घरेलू उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए कोटा सिस्टम भी लागू कर दिया है।
व्यापारियों और किसानों को तैयारी के लिए सिर्फ 14 दिनों का समय दिया गया है, जबकि आमतौर पर ऐसी तैयारियों के लिए कम से कम 90 दिनों का समय दिया जाता है। जिससे एक्सपोर्टर्स को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
GAP सर्टिफिकेट लेना जरूरी
नए नियम के मुताबिक इंडोनेशिया को मूंगफली भेजने के लिए अब GAP (Good Agricultural Practices) सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य हो गया है। बता दें कि GAP का सर्टिफिकेट लेना आसान नहीं होता है, इसके लिए 90-180 दिनों का समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में अगले कुछ महीनों के लिए भारत से इंडोनेशिया के लिए मूंगफली का एक्सपोर्ट रुक सकता है।
भारत को सबसे ज्यादा नुकसान
इंडोनेशिया की ओर से बनाए नए नियम सभी देशों के लिए लागू होंगे लेकिन इससे भारत को अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका कारण ये है कि इंडोनिशिया भारत की मूंगफली का बड़ा खरीददार है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 7.46 लाख टन मूंगफली का निर्यात किया, जिसकी कीमत करीब 795 मिलियन डॉलर थी। इसमें से 2.77 लाख टन मूंगफली इंडोनेशिया में एक्सपोर्ट की गई थी।
वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से फरवरी के बीच भी कुछ ऐसा ही हाल रहा। भारत ने कुल 6.34 लाख टन मूंगफली का एक्सपोर्ट किया, जिसमें से 1.54 लाख टन इंडोनेशिया को भेजा गया। यही कारण है कि इंडोनेशिया के नए नियमों से भारतीय एक्सपोर्टर्स को तगड़ी चोट हुई है।
APEDA की कोशिश भी नहीं आई काम
देश में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यातको बढ़ावा देने वाली संस्था APEDA ने इंडोनेशिया के भीतर भारत के बाजार को मजबूत करने के लिए कई प्रयास किए थे, लेकिन उसकी कोशिशों को भी झटका लगा है। अब मूंगफली के दाने और छिलके वाली मूंगफली दोनों पर यह नियम लागू होंगे, हालांकि भुनी हुई मूंगफली पर यह नियम लागू नहीं है।
ये भी पढ़ें: West Asia War: भारत में तेजी से बढ़ने लगे ईरानी ड्राईफ्रूट्स के दाम, ₹5 हजार करोड़ के पिस्ता बाजार की टूटी सप्लाई चेन
इंडोनेशिया ने पहले भी लगाई थी रोक
मूंगफली को लेकर इंडोनेशिया के साथ व्यापार में बाधा का ये कोई पहला मुद्दा नहीं है। हमारा सबसे बड़ा खरीददार इंडोनेशिया सितंबर 2025 में गुणवत्ता मानकों का हवाला देते हुए इंपोर्ट पर पहले भी रोक लगा चुका है। उस वक्त मूंगफली में अफ्लाटॉक्सिन नाम के तत्व की मात्रा ज्यादा होने पर आपत्ति जताई गई थी। आपका बता दें कि अफ्लाटॉक्सिन फंगस से पैदा होता है जो हेल्थ के लिए बहुत नुकसानदायक है।
