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धान की अधिक पैदावार से किसानों की फजीहत! MSP से कम दाम नमी और खरीद की लिमिट से किसान परेशान; स्टोरेज को लेकर चिंता

Published: Mon, 12 Oct 2026 01:40 PM (IST)

धान की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों को सरकारी खरीद में देरी, नमी और खरीद सीमा जैसी समस्याओं का सामना ...और पढ़ें

धान की खरीद किसानों के लिए चुनौती बनी

धान की खरीद किसानों के लिए चुनौती बनी

HighLights

  1. बंपर धान पैदावार से हरियाणा के किसान परेशान।

  2. सरकारी खरीद में देरी, नमी और कम दाम की शिकायत।

  3. मंडियों में जगह की कमी, भंडारण क्षमता पर दबाव।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अक्टूबर महीने से धान की कटाई और सरकारी फसल खरीद शुरू हो जाती है। उत्तर भारत में धान की सरकारी खरीद तेज हो रही है, लेकिन हरियाणा में इस बार बंपर पैदावार किसानों के लिए परेशानी बन गई है। मंडियों में जगह की कमी, धान का समय पर उठान नहीं होने और सरकारी खरीद में बाधाओं के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए तीन से चार दिन और कई बार इससे भी ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि कुछ इलाकों में प्रति एकड़ खरीद की सीमा और धान में नमी अधिक होने के कारण उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है।

धान खरीदी की रफ्तार का यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी लेने लगा है। विपक्षी कांग्रेस हरियाणा में धान खरीद की समस्याओं को प्रमुखता से उठा रही है। इसका असर पड़ोसी राज्य पंजाब में भी दिखाई देने लगा है, जहां धान की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है और अगले 10 दिनों में इसके तेज होने की उम्मीद है। दोनों राज्यों में धान की अच्छी पैदावार के बीच खरीद, स्टोरेज और फसल के उठान को लेकर चुनौतियां सामने आ रही हैं।

खरीद की लिमिट पर भी सवाल

ऑल इंडिया नेशनल किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता इंदरजीत सिंह गोराया ने मीडिया को बताया कि इस साल हरियाणा में धान की पैदावार काफी अच्छी हुई है। औसतन एक एकड़ में 35-37 क्विंटल धान की उपज हो रही है। हालांकि, उनका आरोप है कि कुछ क्षेत्रों में सरकारी एजेंसियां प्रति एकड़ केवल 25 क्विंटल धान खरीद रही हैं।

गोराया ने आगे कहा कि यदि किसान के खेत में एक एकड़ से 35-37 क्विंटल धान पैदा होता है और सरकारी खरीद की सीमा 25 क्विंटल है, तो बाकी 10-12 क्विंटल फसल बेचने के लिए किसान को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि किसान अपनी बाकी उपज कहां बेचेगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंडियों में खरीद एजेंसियों का आवंटन पूरा नहीं हुआ है और यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रत्येक एजेंसी को कितनी मात्रा में धान खरीदना है। इसके अलावा, पिछले साल खरीदा गया धान भी कुछ जगहों पर भंडारण में पड़ा है और उसका उठान नहीं हुआ है। इससे नई फसल की खरीद प्रभावित हो रही है।

MSP से नीचे बिक्री का आरोप

किसानों की एक बड़ी शिकायत धान में नमी की मात्रा को लेकर भी है। अधिक नमी होने पर उपज की कीमत में कटौती किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई मंडियों में किसान 5 से 6 दिन से अपनी फसल बेचने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, नमी अधिक होने के कारण कुछ किसानों को MSP से ₹100-₹200 प्रति क्विंटल कम कीमत पर धान बेचना पड़ रहा है।

केंद्र सरकार ने 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए सामान्य धान का MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल तय किया है। हालांकि, गोराया का आरोप है कि कई जगह किसानों को 2,200-2,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से फसल बेचनी पड़ रही है। उन्होंने हरियाणा सरकार के धान उत्पादन के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए हैं।

किसानों ने नमी को लेकर जताई चिंता

किसानों की शिकायत है कि उत्तर भारत में हाल में शुरू की गई कुछ नई किस्मों में नमी की मात्रा अधिक रहती है। इससे खरीद के निर्धारित मानकों को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। मशीनों से कटाई होने पर भी धान की नमी कम करने में परेशानी आती है। हालांकि, इन आरोपों और नई किस्मों में नमी की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

पंजाब में भी 1.8 करोड़ टन धान खरीदने का लक्ष्य

हरियाणा के पड़ोसी राज्य पंजाब में भी धान खरीद सीजन की शुरुआत चुनौतियों के बीच हुई है। राज्य में 2026-27 के दौरान करीब 1.8 करोड़ टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अनुमानित उत्पादन लगभग 1.9 करोड़ टन है। किसानों का कहना है कि इस साल अच्छी पैदावार के कारण वास्तविक उत्पादन 2 करोड़ टन से अधिक हो सकता है।

पंजाब में धान की खरीद के दौरान भी नमी की मात्रा एक बड़ी समस्या बन सकती है। किसानों का कहना है कि कुछ नई किस्मों में स्वाभाविक रूप से नमी अधिक होती है, जिसके कारण निर्धारित मानकों के अनुरूप फसल तैयार करना मुश्किल होता है। मशीनों से कटाई के बाद नमी कम करने में होने वाली परेशानी इस समस्या को और बढ़ा देती है।

अधिक उत्पादन से खरीद का दबाव बढ़ा

विशेषज्ञों और कृषि क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत में धान का अधिक उत्पादन और उसके लिए सीमित बिक्री विकल्प सरकारी खरीद व्यवस्था पर दबाव बढ़ा रहे हैं। इसका असर केंद्रीय पूल में जमा अनाज के भंडार और भंडारण क्षमता पर भी पड़ रहा है।

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में 31 अगस्त 2026 तक पिछले सालों की खरीद से करीब 1.53 करोड़ टन चावल का स्टॉक मौजूद था। राज्य में नए सीजन के दौरान करीब 1.8 करोड़ टन धान खरीदने की योजना है। मिलिंग के बाद इससे लगभग 1.206 करोड़ टन चावल मिलने का अनुमान है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अगस्त 2026 तक केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त गेहूं और चावल भंडारण क्षमता करीब 2.684 करोड़ टन थी। वहीं, 31 अगस्त को राज्य में कुल खाद्यान्न स्टॉक लगभग 2.764 करोड़ टन था। यानी दर्ज कुल स्टॉक संयुक्त भंडारण क्षमता से करीब 12 लाख टन अधिक था।

हरियाणा में भी भंडारण क्षमता पर दबाव

हरियाणा में भी ऐसी ही स्थिति सामने आ रही है। केंद्र सरकार ने राज्य में किसानों से करीब 58 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। मिलिंग के बाद इससे लगभग 38 लाख टन चावल मिलने का अनुमान है।

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केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 तक हरियाणा में पिछले वर्षों की खरीद से करीब 43 लाख टन चावल का स्टॉक मौजूद था। वहीं, 1 अगस्त तक केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त गेहूं और चावल भंडारण क्षमता लगभग 1.394 करोड़ टन थी। 31 अगस्त को राज्य में गेहूं और चावल का कुल स्टॉक करीब 1.432 करोड़ टन दर्ज किया गया था।

इस तरह कुल स्टॉक संयुक्त भंडारण क्षमता से लगभग 38 लाख टन अधिक था। हालांकि, ये आंकड़े नए खरीद सीजन से पहले के हैं और सितंबर-अक्टूबर के दौरान स्टॉक में हुई निकासी को शामिल नहीं करते। फिर भी, ये आंकड़े दिखाते हैं कि नई फसल आने के समय दोनों राज्यों में खरीद और भंडारण व्यवस्था पर कितना दबाव हो सकता है।