Gold-Silver Prices: डेढ़ लाख के नीचे जाने की तैयारी में सोना, चांदी ₹4400 टूटी; 16 सितंबर वाले फैसले से पहले बिकवाली
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की चिंताओं के कारण सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आई है।एमसीएक्स पर अक्तूबर ...और पढ़ें
-1789387025534_m.webp)
एमसीएक्स पर गोल्ड-सिल्वर दबाव के साथ कारोबार कर रहे हैं।
HighLights
स्पॉट गोल्ड की कीमतें $4,300 प्रति औंस से नीचे आईं।
कच्चे तेल में उछाल से वैश्विक महंगाई की चिंताएं बढ़ीं।
ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से सोने पर दबाव बढ़ा।
नई दिल्ली। कच्चे तेल (Crude Oil Prices) की बढ़ती कीमतों और महंगाई से जुड़ी चिंताएं सोने की कीमतों (Gold Prices) पर दबाव डाल रही हैं। सोमवार दोपहर 3 बजे स्पॉट गोल्ड की कीमतें $4,300 प्रति औंस के स्तर से नीचे आ गईं। लगातार तीन हफ़्तों की गिरावट के बाद इसमें और कमी आई है। सोने की कीमत गिरकर लगभग $4,290.5 प्रति औंस हो गई, जो अगस्त-सितंबर में इसके हालिया उच्चतम स्तर से काफी कम है। गोल्ड में गिरावट की बड़ी वजह महंगाई से जुड़ी चिंता है क्योंकि निवेशक इस हफ़्ते के आखिर में फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं।
एमसीएक्स पर अक्तूबर गोल्ड फ्यूचर में 1.17 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है और 151000 पर कारोबार कर रहा है, जबकि सिल्वर 1.66 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 231078 पर ट्रेड कर रहा है।
ब्याज दरें बढ़ने का डर
हाल के हफ़्तों में सोने की कीमत $4,600 प्रति औंस से ऊपर चली गई थी, जिससे अब इसमें मुनाफ़ा-वसूली (प्रॉफ़िट-टेकिंग) की संभावना बन गई है, क्योंकि निवेशक बढ़ती महंगाई के चलते ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं।
रॉयटर्स के अनुसार, बाज़ार अब बुधवार को ब्याज दरों में 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की लगभग 90 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहा है। ब्याज दरें बढ़ने से सोने पर दबाव पड़ता है क्योंकि ब्याज देने वाले निवेशों की तुलना में सोना (जिससे कोई ब्याज नहीं मिलता) कम आकर्षक हो जाता है।
कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमतें 4300 डॉलर के नीचे जा चुकी हैं और आने वाले दिनों में 4260 डॉलर के स्तर देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में एमसीएक्स पर सोने की कीमतें 150000 रुपये तक जा सकती हैं।
कच्चे तेल में उबाल
सोमवार को सऊदी अरब की मुख्य ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमलों के बाद उसे बंद किए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतें चार महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुँच गईं। इस रुकावट और मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव की वजह से सप्लाई और शिपिंग से जुड़े बड़े जोखिमों ने इस चिंता को फिर से बढ़ा दिया है कि ऊर्जा की ज़्यादा कीमतें ग्लोबल महंगाई को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकती हैं।
