क्रूड ऑयल में क्यों आया भयंकर उछाल, 6 हफ्ते के हाई पर पहुंच गए दाम; $100 पार होने से भारत में बढ़ेगी महंगाई?
Middle East conflict oil prices: मिडिल ईस्ट में गहराते सैन्य तनाव और लाल सागर में तेल सप्लाई में रुकावटों के ...और पढ़ें
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HighLights
क्रूड ऑयल की कीमतें 6 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर।
मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव, लाल सागर में रुकावटें मुख्य कारण।
भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| क्रूड ऑयल की कीमतों में एक बार फिर भयंकर आग लग गई है। मिडिल ईस्ट में गहराते सैन्य तनाव और लाल सागर के रास्ते तेल सप्लाई में पैदा हुई बड़ी रुकावटों के चलते क्रूड की कीमतें 6 हफ्ते के उच्चतम स्तर (Middle East conflict oil prices) पर पहुंच गई हैं।
हालात इतने बिगड़ गए हैं कि 24 जुलाई के बाद पहली बार कच्चे तेल ने $100 प्रति बैरल के खतरनाक स्तर (Brent crude crosses 100 dollars) को पार कर लिया है। कच्चे तेल में इस बेतहाशा तेजी ने भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के प्रमुख तेल ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमलों (Houthi attacks on Saudi oil facilities) की खबरों के बाद तेल की कीमतों में 2.50% से ज्यादा का उछाल आया है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड $100 के पार पहुंच गया है। जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है।
क्रूड को लेकर क्या चल रहा बाजार?
कैपिटल इकोनॉमिक्स के हमद हुसैन के मुताबिक, बाजार मानकर चल रहा है कि मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष लंबा खिंचेगा। सबसे बड़ा खतरा ओमान की खाड़ी से होने वाली सप्लाई में रुकावट का है। वहीं, सैक्सो बैंक के ओले हैनसेन ने बताया कि अगस्त में ओपेक (OPEC oil production decline) देशों का तेल उत्पादन 9 लाख बैरल प्रतिदिन घटकर 1.99 करोड़ बैरल पर आ गया है। पाइपलाइनों पर हमलों के कारण अकेले सऊदी अरब के उत्पादन में 1.1 मिलियन बैरल की भारी गिरावट आई है।
'115 डॉलर के पार जा सकते हैं दाम'
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी रिसर्च हेड, अनिंद्य बनर्जी ने स्थिति की गंभीरता को समझाते हुए बताया कि युद्ध अब शिपिंग रास्तों से सीधे लोडिंग टर्मिनल्स तक पहुंच चुका है। अमेरिकी सेना ने ईरान के 5 टैंकरों को तबाह कर दिया है, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन पोर्ट पर जहाजों को छोड़ने की चेतावनी दी है। सऊदी के जाजान और आभा समेत कई ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से वहां कामकाज रोकना पड़ा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz oil transit) से जहाजों की आवाजाही 130 से घटकर मात्र 10 रह गई है। बनर्जी के अनुसार, ब्रेंट में $102 का रेजिस्टेंस टूटने पर क्रूड $110 से $115 तक जा सकता है।"
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने बताया कि, भारत अपनी कुल खपत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। बनर्जी ने बताया कि भारत के लिए अहम मर्बन क्रूड 4% उछलकर $110 के ऊपर निकल गया है।
क्रूड महंगा होने से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ेगा। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का भारी दबाव बनेगा। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे देश में रोजमर्रा की हर चीज महंगी हो जाएगी और महंगाई दर बेकाबू हो सकती है।"
