यहां रखा है दुनिया के 60 देशों का 5000 टन सोना, 12-12 किलो की ईंटो का लगा है ढेर; सामने आईं खजाने की तस्वीरें
लंदन स्थित बैंक ऑफ इंग्लैड के तहखाने में 60 से ज्यादा देशों का 5000 टन सोना रखा है। जिसकी तस्वीरें सामने आई हैं।

बैंक ऑफ इंग्लैंड का भूमिगत खजाना: 60 देशों का 5000 टन सोना, यूरोप का सबसे बड़ा वॉल्ट

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नई दिल्ली| सेंट्रल लंदन में एक जगह ऐसी है, जहां मेट्रो की सुरंग सीधा न जाकर अचानक मुड़ती है। इसकी वजह है- जमीन के नीचे फैले बैंक ऑफ इंग्लैंड के विशाल तहखाने। जिसे 'शहर के भीतर बसा शहर' भी कहा जाता है।
दावा है कि बैंक की कुल फ्लोर स्पेस का करीब 40% हिस्सा जमीन के नीचे है और इसी नेटवर्क के केंद्र में यूरोप की सबसे बड़ी गोल्ड तिजोरी मौजूद है।
लंदन में बैंक ऑफ इंग्लैंड के भूमिगत वॉल्ट (Bank of England gold vault) में दुनिया के 60 से ज्यादा देशों का 5000 टन से ज्यादा सोना (5000 tons gold London) रखा है।
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यह वॉल्ट यूरोप का सबसे बड़ा गोल्ड स्टोरेज (Europe biggest gold vault) है और दुनिया में केवल फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क (Federal Reserve Bank of New York) से पीछे है।
फेड के पास इससे 1000 टन ज्यादा सोना
स्काई न्यूज (SKY News) के मुताबिक, बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास कुल 12 विशाल वॉल्ट (London gold vault) हैं। हर वॉल्ट में हजारों गोल्ड बार रखे हैं। कुल मिलाकर यहां 5,000 टन से ज्यादा सोना जमा है।
तुलना करें तो यह मात्रा अमेरिका के फोर्ट नॉक्स से भी अधिक बताई जाती है, जबकि न्यूयॉर्क फेड के पास इससे लगभग 1,000 टन ज्यादा भंडार है।

हर ब्रिक का वजह 12 से 13 किलोग्राम
यहां रखे हर गोल्ड बार का वजन 400 ट्रॉय औंस (करीब 12-13 किलोग्राम) है। हर बार पर सीरियल नंबर या बारकोड होता है। जब सोना खरीदा-बेचा जाता है, तो अधिकतर मामलों में बार अपनी जगह से हिलता भी नहीं, सिर्फ उसका कोड नए मालिक को ट्रांसफर हो जाता है।
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यहां ब्रिटेन का सिर्फ 300 टन ही सोना
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे भंडार का अधिकांश हिस्सा बैंक ऑफ इंग्लैंड का नहीं है। बैंक के पास खुद सिर्फ 2 गोल्ड बार डिस्प्ले के लिए हैं। ब्रिटेन सरकार का लगभग 300 टन सोना यहां रखा है। 60 से ज्यादा देशों के केंद्रीय बैंक अपना सोना यहां सुरक्षित रखते हैं। यानी यह तिजोरी दुनिया के सरकारी खजानों का केंद्र है।
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बैंक ऑफ इंग्लैंड के भूमिगत वॉल्ट सिर्फ सोने का भंडार नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का प्रतीक हैं। 5,000 टन से ज्यादा सोना, 60 से अधिक देशों की संपत्ति और बदलते भू-राजनीतिक समीकरण, ये सब लंदन को आज भी दुनिया की गोल्ड कैपिटल बनाए हुए हैं।
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ब्रिटेन को हुआ 4.27 लाख करोड़ का नुकसान
1990 के दशक के आखिर में तत्कालीन वित्त मंत्री गोर्डोन ब्राउन (Gordon Brown) ने ब्रिटेन के आधे से ज्यादा गोल्ड रिजर्व बेचने का फैसला लिया था। उस समय सोने की कीमत करीब 275 डॉलर प्रति औंस थी।
आज कीमत लगभग 5,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच चुकी है। एक विश्लेषण के मुताबिक उस बिक्री से ब्रिटेन को करीब 47 अरब डॉलर (करीब 4,27,437 लाख करोड़ रुपए) का अनुमानित नुकसान हुआ।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रूय बैले (Andrew Bailey) का कहना है कि उस समय रिजर्व को ज्यादा 'उपयोगी' बनाने की बहस थी, क्योंकि सोना तिजोरी में पड़ा रहता है और आय नहीं देता।
