नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। अरुण जेटली पहले ऐसे वित्त मंत्री हैं, जिन्होंने आम बजट और रेलवे बजट को संयुक्त रूप से पेश किया। उन्होंने एक फरवरी 2017 को ऐसा किया था। इससे पहले ये दोनों बजट अलग-अलग पेश किये जाते रहे हैं। अंतिम बार 25 फरवरी 2016 को रेल बजट अलग से पेश किया गया था। इस दिन रेल बजट और आम बजट को अलग-अलग पेश करने की 92 साल की परंपरा खत्म हुई थी। रेलवे बजट के आम बजट में विलय के बाद से सरकार द्वार भारतीय रेलवे के लिए कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। आइए जानते हैं कि ये घोषणाएं क्या-क्या हैं।

साल 2017 के बजट की घोषणाएं

साल 2017 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहला संयुक्त बजट पेश किया था। इस बजट में जेटली ने भारतीय रेलवे के लिए 1.3 लाख करोड़ रुपये आवंटित किये थे। यह भारतीय रेलवे के इतिहास का सबसे बड़ा आवंटन था। यह भारतीय रेलवे के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। साल 2017 के बजट में जेटली ने यात्रियों की सुरक्षा, विकास कार्यों, स्वच्छता और वित्त व लेखा सुधार पर विशेष ध्यान दिया था। वहीं, एक अभूतपूर्व पहल करते हुए जेटली ने IRCTC, IRCON और IRFC जैसी रेलवे की सब्सिडियरीज की बाजार में लिस्टिंग करने का भी प्रस्ताव रखा।

साल 2018 के बजट की घोषणाएं

साल 2017 की तरह ही 2018 में भी रेलवे को बजट में अच्छा आवंटन दिया गया। वित्त मंत्री ने इस साल रेलवे के लिए खर्च को बढ़ाकर रिकॉर्ड 1.48 लाख करोड़ रुपये कर दिया। इस बजट में पूंजीगत व्यय पर अधिक ध्यान दिया गया। यह आवंटन रेलवे की क्षमता बढ़ाने को लेकर केंद्रित था। जिसमें ट्रैक के नवीकरण व दोहरीकरण, गैज में बदलाव और 600 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण शामिल था।

साल 2019 के बजट की घोषणाएं

इस साल के बजट में रेलवे के लिए आवंटन में और वृद्धि हुई और यह सर्वाधिक 1.6 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यह आवंटन सभी लोगों के लिए रेल यात्रा को सहज और सुखद बनाने को लेकर केंद्रित था, इसलिए यात्री सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान दिया गया। इसमें यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी खासा ध्यान दिया गया। भारत आज दुनिया का ऐसा पहला देश बन गया है, जिसने रेलवे का पूरी तरह विधुतिकरण कर दिया है। भारत पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन का भी निर्माण कर रहा है, जो कि अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलेगी।

Posted By: Pawan Jayaswal

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