नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। फिच रेटिंग्स ने शनिवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे का स्तर अनुमान से थोड़ा बढ़ गया है। इसके बावजूद वह देश की सोवरेन रेटिंग्स का आकलन शुक्रवार को पेश हुए बजट के आधार पर नहीं, बल्कि इस वर्ष पूर्ण बजट के आधार पर करेगी। एजेंसी के मुताबिक वह चुनाव बाद के बजट में मध्यम अवधि के रुख का आकलन करना चाहती है।

शुक्रवार को अगले वित्त वर्ष (2019-20) के लिए अंतरिम बजट पेश करते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने किसान हितैषी कई कदमों की घोषणा की। इसके तहत उन्होंने दो हेक्टेयर यानी लगभग पांच एकड़ तक भूमि वाले किसानों को सालाना छह हजार रुपये भुगतान का वादा किया। इससे 12 करोड़ किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। हालांकि इन कदमों के चलते उन्हें चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा अनुमान में 0.1 फीसद की बढ़ोतरी करनी पड़ी।

चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने 3.3 फीसद का राजकोषीय घाटा लक्ष्य रखा था, जिसे 3.4 फीसद कर दिया गया। अगले वित्त वर्ष के लिए भी सरकार ने 3.1 फीसद राजकोषीय घाटे के पूर्व निर्धारित लक्ष्य को 3.4 फीसद कर दिया है। फिच रेटिंग्स के प्रमुख (एशिया पैसिफिक सोवरेन्स) स्टीफन श्वार्ज् ने कहा कि पेश किए गए अंतरिम बजट पर चुनाव पूर्व होने वाले खर्चो का दबाव दिख रहा है। इसके चलते अगले वित्त वर्ष में भी राजकोषीय घाटे पर मामूली दबाव दिखेगा। उन्होंने कहा कि लंबी अवधि के लिए राजकोषीय आंकड़े ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। हम चुनाव बाद के बजट के आधार पर सोवरेन रेटिंग्स का आकलन करेंगे, क्योंकि उसी में मध्यम से लंबी अवधि के आउटलुक का पता चल पाएगा।

Posted By: Praveen Dwivedi

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