जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार देश के स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए एंजल टैक्स मुद्दे को हल करने, कर प्रक्रियाओं का सरलीकरण करने और स्व प्रमाणन जैसे महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि स्टार्ट-अप के लिए टियर टू और टियर थ्री शहरों के साथ ही विज्ञापन, मार्केटिंग, पेशेवर सेवाओं, फिटनेस और वेलनेस, गेमिंग और स्पो‌र्ट्स के साथ आडियो-वीडियो सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बहुत अवसर हैं।

स्टार्ट-अप में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जरूरी

नैसकाम की वार्षिक प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप रिपोर्ट का अनावरण करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि स्टार्ट-अप को स्थानीय और वैश्विक बाजारों के लिए आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाना चाहिए। उनका कहना था कि हम स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे पास जल्द ही इसके लिए कुछ बजट भी आने वाला है। हम सभी उत्सुकता से इस बात का भी इंतजार कर रहे हैं कि जो मांगें सरकार के समक्ष रखी गई थीं, उन पर क्या फैसला लिया गया।

ईज आफ डूइंग को बढ़ावा

गोयल के अनुसार सरकार ईज आफ डूइंग को बढ़ावा देने के लिए अनुपालन बोझ को कम करने पर भी काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 26,500 से अधिक अनुपालनों को सरल बनाया गया है या फिर उसे डिजिटल कर दिया गया है। कुछ अनुपालनों को तो पूरी तरह से हटा दिया गया है। डिजिटल ई-कामर्स के लिए ओपेन नेटवर्क (ओएनडीसी) के बारे में गोयल ने कहा कि यह प्लेटफार्म सभी तरह की कंपनियों को आम आदमी तक पहुंचने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने कहा कि ओएनडीसी नए जमाने की तकनीक को आम आदमी तक सस्ती कीमत पर पहुंचाने में मदद करेगा और स्टार्ट-अप देश में बढ़ने के नए अवसर प्रदान करेगा।

पिछले वर्ष स्टार्ट-अप ने जुटाए 24.1 अरब डालर

पिछले वर्ष देश में 2,250 से अधिक स्टार्ट-अप सामने आए। यह एक वर्ष पहले के मुकाबले 600 अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में स्टार्ट-अप ने 24.1 अरब डालर जुटाए जो कोरोना से पहले के स्तर के मुकाबले दोगुना है। वर्ष 2020 की तुलना में उच्च मूल्य वाले सौदे तीन गुना बढ़ गए जो निवेशकों के भरोसे को दिखाता है और बताता है कि सक्रिय 'एंजल' निवेशक जोखिम लेने को तैयार हैं। नासकाम और जिनोव की रिपोर्ट में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई है।

भारतीय प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप परिवेश

सफलता का वर्ष शीर्षक से जारी अध्ययन में कहा गया कि निवेशकों का भरोसा बढ़ने के साथ स्टार्टअप गहन प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहे हैं और कौशल युक्त लोगों को खोज रहे हैं। इसके साथ ही भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र के स्टार्ट-अप का आधार निरंतर बढ़ रहा है। स्टार्ट-अप में सर्वाधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) अमेरिका से आ रहा है। बाकी की दुनिया की हिस्सेदारी भी इसमें बढ़ रही है। करीब 50 फीसदी सौदों में कम से कम एक निवेशक भारतीय मूल का है। देश में स्टार्ट-अप के स्थापित केंद्र जैसे दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और मुंबई का योगदान 71 फीसदी है। नासकाम की चेयरमैन देबजानी घोष ने कहा, ‘रिकार्डतोड़ निवेश और यूनीकार्न कंपनियों (एक अरब डालर से अधिक मूल्यांकन वाले स्टार्टअप) की संख्या बढ़ने के साथ भारतीय स्टार्ट-अप का भविष्य 2022 में और भी उज्जवल दिखाई दे रहा है।’

Edited By: Amit Singh