नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। कोविड-19 महामारी से पूरी दुनिया पिछले एक साल से जूझ रही है। इस महामारी ने लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक सेहत पर भी प्रभाव डाला है। हालांकि, इस महामारी के बाद हेल्थकेयर सेक्टर पर ज्यादा खर्च किए जाने की बात कई मंचों पर उठी है। इसी बीच टेलिमेडिसन जैसी चीजें और प्रमुखता के साथ उभरी हैं। इन सब चीजों की पृष्ठभूमि में एक फरवरी को देश का अगला आम बजट पेश किए जाने की संभावना है। ऐसे में हेल्थकेयर सेक्टर के दिग्गजों इस बार के बजट से किस प्रकार की उम्मीद रख रहे हैं। आइए जानते हैं:  

अपोलो टेलीहेल्थ के सीईओ विक्रम थापलू ने कहा कि अपने पिछले कार्यकाल में सरकार ने सस्ते और सुलभ हेल्थकेयर के लिए जोर आजमाइश की थी और हमें उम्मीद है कि इस साल के बजट में इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए योजनाओं को अमल में लाया जायेगा। उन्होंने कहा, ''हम हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर  व्यवस्थित और व्यापक सुधार के साथ हेल्थकेयर पर सरकार द्वारा ज्यादा खर्च किए जाने की उम्मीद करते हैं।''  

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थापलू ने कहा कि महामारी के दौरान टेलीमेडिसिन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टेलीमेडिसिन मरीज और हेल्थसिस्टम, इन्फेक्टेड और गैर-इन्फेक्टेड लोगों तथा क्लीनिक के बीच एक सुरक्षित इंटरैक्टिव साधन बनकर उभरा। भारतीय हेल्थकेयर इंडस्ट्री प्रगति की राह पर है और उम्मीद है कि तकनीक इस राह को सुगम बनाएगी। आने वाले समय में ज्यादा मेडिकल कॉलेज खुलने की उम्मीद है, जिसमें टेलीमेडिसिन को कोर्स में विस्तार से शामिल किया जाएगा। आने वाले बजट से उम्मीद है कि टेलीमेडिसिन सर्विस को सक्षम बनाने के लिए विभिन्न प्रदेशों में सरकारी मेडिकल कॉलेज में हब फैसिलिटीज को स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।''

'Tattvan e-clinics' के सीईओ और फाउंडर आयुष मिश्रा ने भी यह बात दोहरायी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ माह में करोड़ों लोगों ने अपनी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान और चर्चा के लिए अपने डॉक्टर या मेडिकल कंसल्टेंट से वीडिया या टेलीफोन के जरिए बात की। मिश्रा का मानना है कि टेलिमेडिसिन से जुड़ी सेवाएं आने वाले समय भी बनी रहेंगी और महामारी के बाद के समय में करीब 40-50 फीसद डॉक्टर टेलिकॉन्सलटेशन के जरिए ओपीडी सेवाएं जारी रखेंगे। इनमें एआई, एमएल, टेलि-मोबाइल ऑपरेटर जैसी सेवाएं शामिल हैं।  

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के समय में टेलिमेडिसिन ने लोगों की बहुत मदद की और बुजुर्ग लोगों के लिए तो यह वरदान साबित हुआ है जिनके संक्रमित होने का जोखिम काफी अधिक होता है। बुजुर्गों की उम्र के साथ होने वाली बीमारियों के लिए टेलि-कॉन्सलटेशन के जरिए इलाज बहुत कारगार साबित हो सकता है। मिश्रा ने कहा,  ''लॉकडाउन के समय राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में हमारे द्वारा चलाए गए टेलिमेडिसन कैंप को काफी अधिक सफलता मिली। इससे हमें इस बात का अंदाजा हुआ है कि टेलिमेडिसिन से जुड़ी सेवाएं जारी रहने वाली हैं।'' 

उन्होंने कहा कि लगभग एक पखवाड़े बाद वित्त वर्ष 2021-22 का केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। इस बजट में कोविड-19 से जुड़ी परेशानियों को कम करने और टेलिमेडिसिन सेक्टर की ग्रोथ के लिए अधिक आवंटन की उम्मीद है। सरकार को इस सेग्मेंट में स्टार्टअप और प्राइवेट कंपनियों के लिए भी कुछ करना चाहिए। इससे वे अपनी सेवाओं का विस्तार टियर-2 और टियर-3 शहरों तक कर पाएंगे।   

कोरोना काल में कई लोगों को एकाकी जीवन व्यतीत करना पड़ा। दूसरी ओर, कई लोगों की नौकरियां चली गईं या कई लोगों को वेतन में कटौती झेलनी पड़ी। ऐसे में लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी काफी कुछ किए जाने की जरूरत महसूस हुई। 

Docvita के सीईओ अनमोल अरोड़ा ने कहा कि 'महामारी के दौरान, टेलीमेडिसिन ने भारत में अनगिनत लोगों की समय पर देखभाल करने में मदद की और लॉकडाउन के दौरान कई लोगों की देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित की। इसके अलावा, टेलीमेडिसिन को भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग और आपूर्ति में ग्रामीण-शहरी असंतुलन के समाधान के रूप में लंबे समय से देखा जा रहा है। साथ ही लॉकडाउन से टेलीमेडिसिन को काफी अधिक विस्तार मिला।''

अरोड़ा ने भी इसको ध्यान में रखते हुए बजट में आवंटन बढ़ाए जाने की हिमायत की है। 

वरिष्ठ मनोचिकित्सक और मन:स्थली की फाउंडर डॉक्टर ज्योति कपूर ने इस बारे में कहा, ''हमें यह स्वीकार करना होगा कि देश की स्थिति पर मानसिक बीमारियां सामाजिक एवं आर्थिक असर डालती हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य की अहमियत को लेकर जागरूकता फैलाने, लोगों को शिक्षित करने और बुनियादी ढांचे के लिए विकास के लिए पर्याप्त निवेश की दरकार है। इस समस्या पर ध्यान नहीं देने से आने वाले समय में इकोनॉमी पर इसका ज्यादा गंभीर असर देखने को मिल सकता है।''

उन्होंने उदाहरण के जरिए अपनी बात रखी। कपूर ने कहा कि तनाव की वजह से किसी भी कर्मचारी का परफॉर्मेंस गिरता है। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम और लगातार एवं लंबी अवधि तक कामकाज से प्रदर्शन पर बहुत ज्यादा असर देखने को मिला है। ऐसे में इस क्षेत्र में निवेश की बहुत अधिक जरूरत है। 

ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर जीएसके वेलु ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने हेल्थकेयर इंडस्ट्री की दिशा बदल दी है। उन्होंने कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवा के प्रति आवंटन अतीत में एक चुनौती रही है। हमारे देश में महामारी की विकरालता स्वास्थ्य देखभाल पर सार्वजनिक खर्च में वृद्धि की आवश्यकता को दोहराती है । ऐसे में, स्वास्थ्य सेवा के उस बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देनी चाहिए जिससे स्वदेशी उपकरणो का उत्पादन बढ़ सके।

साथ ही, बजट सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) पर ध्यान केंद्रित कर, टियर-2 और 3 शहरों में निजी क्षेत्र के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण (वीजीएफ) विकल्प के चयन को सुगम बनाने के प्रावधानों को प्रस्तुत कर सकता है। इसके अलावा, बजट में स्वदेशी निर्माण को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य सेवा में निवेश को बढ़ावा देने के प्रावधानों को शामिल करना चाहिये।

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