नीलू रंजन, नई दिल्ली। आगामी बजट में केंद्र सरकार सरकारी अस्पतालों की दशा सुधारने के लिए बड़ा ऐलान कर सकती है। राजस्थान के कोटा व अन्य राज्यों के अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की कमी बड़ी समस्या के रूप में सामने आई है। देश में 75 नए मेडिकल कॉलेज खोलने और मौजूदा मेडिकल कालेजों में छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी कर डाक्टरों की कमी दूर करने के फैसलों के बाद सरकारी अस्पतालों के हालात सुधारना सरकार की प्राथमिकता में है।

दरअसल केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य सरकारों को सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सहायता दी जा रही है। लेकिन कोटा के अस्पताल में जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने और चिकित्सा उपकरणों के सुचारु रूप से काम नहीं करने व स्टॉफ की कमी का मामला सामने आने के बाद सरकार इस सहायता को और अधिक बढ़ाने और अस्पतालों में उनके इस्तेमाल की निगरानी की जरूरत महसूस कर रही है। इस बार बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इसके लिए किसी बड़ी योजना का ऐलान कर सकती हैं।

दरअसल आम लोगों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना मोदी सरकार की प्राथमिकता में रहा है। इसके लिए दो साल पहले बजट में देश के 50 करोड़ से अधिक गरीबों को पांच लाख रुपये तक मुफ्त और कैशलेस इलाज मुहैया कराने के लिए आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की गई थी। अभी तक इस योजना के तहत 70 लाख से अधिक गरीबों का इलाज हो चुका है। इसके साथ ही 2022 तक आम लोगों की पहुंच में अत्याधुनिक जांच सुविधाओं को लाने के लिए पूरे देश में डेढ़ लाख वेलनेस सेंटर खोलने का काम भी चल रहा है। लेकिन आयुष्मान भारत के तहत केवल गंभीर बीमारियों का द्वितीयक या तृतीयक श्रेणी के अस्पतालों में इलाज की सुविधा है। बीमार होने की स्थिति में गरीबों का एकमात्र सहारा सरकारी अस्पताल होता है।

दरअसल मोदी सरकार ने 2017 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में चिकित्सा बजट में बढ़ोतरी का महात्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके तहत 2015 तक चिकित्सा बजट को कुल जीडीपी का 2.5 फीसदी पहुंचाना है। इसे देखते हुए पिछले साल बजट में चिकित्सा क्षेत्र के आवंटन को 55,959 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 64, 559 करोड़ रुपये कर दिया था। लेकिन इसके बावजूद अभी भी बजटीय आवंटन जीडीपी के एक फीसदी से ज्यादा नहीं है। जाहिर है अगले पांच साल के भीतर बजटीय आवंटन में ढाई गुना तक बढ़ोतरी की शुरुआत इस साल से देखी जा सकती है।

प्राथमिकता चिकित्सा के लिए पांच लाख 38 हजार करोड़ की जरूरत

अगले पांच साल में देश में प्राथमिकता चिकित्सा के लिए ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पांच लाख 38 हजार 305 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। 15वें वित्त आयोग के सामने स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह मांग रखी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर दिये गए प्रजेंटेशन के अनुसार देश में प्राथमिकता चिकित्सा में आधारभूत ढांचे का बेहद अभाव है। वेलनेस सेंटर के लिए आधारभूत संरचना तैयार करने, स्वास्थ्यकर्मियों की कमी दूर करने, राष्ट्रीय एंबुलेंस सर्विस को सुचारू रूप से चलाने के साथ जांच उपकरणों और दवाइयों के लिए बड़े पैमाने पर धन की जरूरत पड़े़गी। वित्त आयोग ने स्वास्थ्य मंत्रालय से नीति आयोग के सदस्य डा. वीके पॉल के साथ मिलकर इसके लिए नए सिरे प्रस्ताव तैयार कर देने को कहा है।

 

Posted By: Nitesh

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