नई दिल्ली, अरविंद पांडेय। अब वह दिन दूर नहीं, जब दुनिया के विकसित देशों के मुकाबले भारत भी रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में पूरी ताकत के साथ खड़ा हो सकेगा। फिलहाल इसकी जमीन तैयार हो गई है। अगले पांच साल में इस क्षेत्र पर 50 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है जो अब तक इस क्षेत्र पर खर्च होने वाली सबसे अधिक राशि होगी। यह राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकता के आधार पर होने वाले रिसर्च और इनोवेशन पर खर्च होगी। इसके साथ ही नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) के गठन का भी पूरा रोडमैप तैयार कर लिया गया है जो इसी साल से काम शुरू कर देगा।

अगले पांच साल में इस पर 50 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को वित्तीय वर्ष 2021-22 का बजट पेश करते हुए रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लक्ष्यों का एलान किया है। इसके तहत शोध और इनोवेशन के लिए 50 हजार करोड़ खर्च करने का एलान किया है जो अगले पांच साल में खर्च होगा। यानी हर साल औसतन 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे जो एक बड़ी राशि है। वैसे भी कोरोना संकटकाल में जिस तरह शोध और इनोवेशन के जरिये उम्मीदों की एक नई आस जगी, उसमें इस क्षेत्र को लेकर सरकार का फोकस बदला है। अब तक सरकार का इस क्षेत्र की तरफ सबसे कम फोकस था। इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि अब तक शोध और इनोवेशन पर कुल जीडीपी का एक फीसद से भी कम राशि खर्च होता है। 

अभी जीडीपी का एक फीसद से भी कम

मौजूदा समय में यह जीडीपी का सिर्फ 0.7 फीसद है। ऐसे में अब सरकार ने इस पर कुल जीडीपी का दो फीसद खर्च करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही इसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी भी बढ़ाई जाएगी। मौजूदा समय में शोध और इनोवेशन के क्षेत्र में निजी क्षेत्र का योगदान सिर्फ 37 फीसद ही है, जिसे अब बढ़ाकर 68 फीसद तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।वैसे भी मोदी सरकार का फोकस रिसर्च और इनोवेशन को लेकर ज्यादा है। इसे लेकर शैक्षणिक संस्थानों से शोध संस्थानों तक में एक नई मुहिम छिड़ी हुई है। 

देश के विकास को गति देने और अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए रिसर्च व इनोवेशन पर बढ़ा फोकस

इसके तहत एकीकृत शोध को बढ़ावा देने के साथ इनकी प्राथमिकताएं भी तय की जा रही हैं। जैसा कोरोना काल में देखने को मिला है, जब पीपीई किट, वेंटीलेटर, मास्क और सैनिटाइजर जैसी चीजों की जरूरत पड़ने पर इन्हें देश में ही तैयार किया गया। इस दौरान न सिर्फ देश की जरूरत को पूरा किया, बल्कि दूसरे देशों को भी भेजा गया। साथ ही यह विदेश से आने वाली सामग्रियों के मुकाबले सस्ती और अच्छी भी थी। इतना ही नहीं, पिछले कुछ साल में शोध और इनोवेशन के क्षेत्र में देश की वैश्विक रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। 

इनोवेशन के क्षेत्र में भारत अब वैश्विक रैंकिंग में 48वें स्थान पर आ गया है जो 2015 में 81वें स्थान था। हाल ही में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में भी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए रिसर्च और इनोवेशन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। इसके साथ ही शोध और इनोवेशन से जुड़ी देश की प्रतिभाओं को पलायन से रोकने के लिए एक नया माहौल तैयार करने पर जोर दिया गया है। फिलहाल बजट में की गई घोषणाओं से इसे मजबूती मिलेगी। साथ ही उन सभी क्षेत्रों पर भी काम हो पाएगा जो अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। जिसे तकनीकी तौर पर मजबूती देकर नए सिरे से खड़ा किया सकता है। 

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