नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। किसानों की आय दोगुना करने को पशुपालन उद्योग के प्रोत्साहन पर भी सरकार का फोकस है। पशुओं को खुरपका और मुंहपका जैसे रोगों से मुक्ति दिलाने के साथ 2025 तक दूध प्रसंस्करण क्षमता को दोगुना किया जाएगा। यानी देश की दूध प्रसंस्करण क्षमता 53.5 मिलियन टन से बढ़ाकर कुल 108 मिलियन टन करने का टारगेट है। केंद्र सरकार ने बजट में छोटे और भूमिहीन किसानो व महिला पशुपालकों का पूरा ध्यान रखा है।

बजट पूर्व सर्वे में गत पांच वर्षो में पशुधन क्षेत्र 7.9 प्रतिशत तक बढ़ा है। दुनिया में भारत सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना है। वर्ष 2018-19 में 187.7 मिलियन टन था जो 2017-18 की तुलना में 6.5 प्रतिशत बढ़ा था। प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 394 ग्राम तक पहुंच गयी है। पशुपालन रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है। सर्वे के मुताबिक करीब 15.60 मिलियन श्रमिक पशुपालन से जुडे है।

पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ सरकार ने पशुओं की रोगमुक्ति पर बजट में विशेष ध्यान दिया है। वर्ष 2025 तक पशुओं के खुर और मुंह में होने वाली बीमारी ब्रुसिलोसिस व भेड़ व बकरियों की पेटिस रूमिनेंट नामक बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही पशुओं की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान का कवरेज 30 से बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने का लक्ष्य भी तय किया है। मनरेगा से चारागार को विकसित किया जाएगा।

Posted By: Pawan Jayaswal

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